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लेकिन हमने सब कुछ सहेज लिया 🙂.
प्रसिद्ध निवेश कंपनी मोटिलाल ओसवाल ने जॉर्ज बर्नार्ड शॉ के विचारों पर चर्चा की।
शॉ के अनुसार, ''वाजिब व्यक्ति दुनिया के अनुरूप होता है; जबकि अवाजिब व्यक्ति दुनिया को खुद के अनुरूप बनाने की कोशिश करता है।'' यह बयान प्रगति की अवधारणा और सोच के अंदाज को चुनौती देता है।
मोटिलाल ओसवाल के विशेषज्ञों का मानना है कि नवाचार और प्रगति अवाजिब व्यक्ति की सोच और दृष्टिकोण पर निर्भर करती है। यह विचारधारा व्यवसायिक और सांस्कृतिक शोषण को दर्शा सकती है।
मोटिलाल ओसवाल के इस दृष्टिकोण की गहराई को समझने के लिए कंपनी के अनुभव आधारित निर्णयों और प्रायोगिक नवाचारों पर विस्तार से चर्चा करता हुआ एक विश्लेषण अनुभव के महत्व पर जोर शीर्षक लेख में प्रस्तुत किया गया था। इसके अतिरिक्त, आत्मिक शांति के लिए क्षमा की भूमिका तथा निवेश की मानसिकताओं पर केंद्रित आत्मिक शांति के लिए क्षमा महत्वपूर्य नामक विश्लेषण भी इन विचारों को व्यापक संदर्भ देता है।