ट्वीट लेखक द्वारा हटा दिया गया था.
लेकिन हमने सब कुछ सहेज लिया 🙂.
उद्योगपति हर्ष गोयनका ने एक ट्वीट में समाज के व्यवहारिक तंत्र पर तंज किया।
उन्होंने कहा कि लोग छोटी समस्याओं पर अपनी नाराजगी दिखाते हैं, जैसे कि ''विमान के विलंबित होने पर दिमागी संतुलन खो बैठते हैं।''
जबकि बड़ी समस्याओं के लिए, जैसे कि ''निराशा भरी नौकरी में फंसे रहना'' या ''अपने सपनों को मरने देना'', वे चुपचाप स्वीकार कर लेते हैं।
गोयनका का संदेश था कि ''वास्तविक समस्याओं के प्रति शांत स्वीकृति'' से बदलने की आवश्यकता है।
गोयनका द्वारा उठाए गए इन व्यवहारिक मसलों की झलक पहले भी उनकी टिप्पणियों में मिलती रही है—हाल ही में उन्होंने उल्लेख किया था कि असली प्रतिष्ठा कठिन परिश्रम से प्राप्त होती है, जिसे उन्होंने मेहनत को बताया असली प्रतिष्ठा का प्रतीक नामक लेख में विश्लेषित किया था। सामाजिक तंत्र के प्रति उनकी यह दृष्टि सार्वजनिक परिवेश के प्रसंगों तक भी जाती है, जैसा कि दिल्ली मेट्रो में जलभराव पर उनके सशक्त कटाक्ष में परिलक्षित हुआ था।