भारत-कंबोडिया भुगतान संपर्क शुरू, UPI से QR व्यापारी भुगतान को बढ़ावा

भारत-कंबोडिया भुगतान संपर्क शुरू, UPI से QR व्यापारी भुगतान को बढ़ावा
UPI से कंबोडिया भुगतान

सीमापार डिजिटल भुगतान को सस्ता और अधिक सुलभ बनाने की भारत की पहल के तहत भारत और कंबोडिया के बीच भुगतान प्रणालियों की कनेक्टिविटी शुरू होती है। इस व्यवस्था से कंबोडिया जाने वाले भारतीय यात्री अब वहां KHQR-सक्षम 45 लाख से अधिक व्यापारियों को अपने UPI ऐप के जरिए रीयल टाइम में भुगतान कर सकते हैं।

हाइलाइट्स

  • 2 जून 2026 को फ्नोम पेन्ह में भारत और कंबोडिया के बीच QR-कोड आधारित व्यापारी भुगतान संपर्क NPCI International Payments Limited तथा Acleda Bank Plc. के सहयोग से शुरू हुआ।
  • इस कनेक्टिविटी से भारतीय यात्री कंबोडिया में KHQR से जुड़े व्यापारियों पर अपने UPI ऐप से रीयल टाइम में भुगतान कर सकेंगे, जिससे नकदी निर्भरता कम होगी।
  • दूसरे चरण में कंबोडिया के यात्री भारत में UPI QR-सक्षम व्यापारियों को भुगतान कर पाएंगे, जिससे द्विपक्षीय खुदरा भुगतान संपर्क और क्षेत्रीय फिनटेक एकीकरण को बढ़ावा मिलेगा।

फ्नोम पेन्ह में पहले चरण की शुरुआत

भारतीय रिजर्व बैंक की प्रेस विज्ञप्ति के अनुसार, (Reserve Bank of India) भारत और कंबोडिया के बीच QR-कोड आधारित व्यापारी भुगतानों के लिए यह कनेक्टिविटी 2 जून 2026 को फ्नोम पेन्ह में शुरू की गई। यह NPCI International Payments Limited और Acleda Bank Plc. के बीच सहयोग के पहले चरण का संचालन में आना है, जिसे RBI और नेशनल बैंक ऑफ कंबोडिया के संरक्षण में आगे बढ़ाया जाता है।

यह पहल Unified Payments Interface, यानी UPI, को अन्य न्यायक्षेत्रों की तेज भुगतान प्रणालियों से जोड़ने की RBI की व्यापक रणनीति का हिस्सा है। RBI कहता है कि यह प्रयास G20 रोडमैप के अनुरूप है, जिसका उद्देश्य सीमापार भुगतानों को अधिक किफायती, कुशल, पारदर्शी और सुलभ बनाना है।

यात्रियों और भुगतान क्षेत्र पर संभावित असर

नई व्यवस्था के साथ भारतीय यात्री कंबोडिया में KHQR, जो वहां का राष्ट्रीय QR मानक है, से जुड़े व्यापारियों पर UPI एप्लिकेशन के माध्यम से भुगतान कर सकते हैं। RBI के अनुसार, इससे भौतिक दुकानों पर रीयल टाइम भुगतान संभव होता है, नकदी पर निर्भरता घटती है और कार्ड आधारित भुगतान के विकल्प का विस्तार होता है।

दूसरे चरण में कंबोडिया के यात्रियों को भारत में UPI QR-सक्षम व्यापारियों को भुगतान करने की सुविधा बाद में शुरू की जानी है। इससे दोनों देशों के खुदरा भुगतान संपर्क को दोतरफा बनाने की दिशा में प्रगति होती है और क्षेत्रीय फिनटेक एकीकरण को भी समर्थन मिलता है।

RBI की मौद्रिक नीति समिति (MPC) की बैठक और 5 जून को आने वाले नीतिगत फैसले पर हमारी पिछली रिपोर्ट में बताया गया था कि अप्रैल में मुद्रास्फीति लक्ष्य से नीचे होने के बावजूद कच्चे तेल के ऊंचे दाम, रुपये की कमजोरी और कमजोर मानसून की आशंका से अनिश्चितता बढ़ी है। रिपोर्ट में बाजार की अपेक्षाओं का भी जिक्र था, जहां अधिकांश अर्थशास्त्री रेपो दर 5.25% पर स्थिर रहने का अनुमान लगा रहे थे, साथ ही तेल और USD/INR की चाल को मुद्रास्फीति जोखिम के लिए अहम कारक माना गया था।

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