RBI ने NBFC और HFC के CoR समर्पण आवेदन मानदंड संशोधित किए
भारतीय रिजर्व बैंक ने NBFC और HFC के लिए पंजीकरण प्रमाणपत्र, CoR, के स्वैच्छिक समर्पण और रद्दीकरण से जुड़ी आवेदन प्रक्रिया को संशोधित किया है। यह बदलाव 29 अप्रैल 2026 के संशोधन निर्देशों के बाद आया है और अद्यतन आवेदन पत्र तथा सांकेतिक जांचसूची अब PRAVAAH पोर्टल पर जमा करने के लिए उपलब्ध हैं।
हाइलाइट्स
- RBI ने CoR के स्वैच्छिक समर्पण के लिए आवेदन प्रक्रिया और जांचसूची 29 अप्रैल 2026 के संशोधित निर्देशों के तहत अद्यतन की।
- NBFC और HFC अब PRAVAAH पोर्टल के माध्यम से सभी आवश्यक दस्तावेजों के साथ संशोधित आवेदन जमा कर सकेंगे।
- CoR रद्दीकरण की औपचारिक सूचना मिलने तक NBFC और HFC को सभी नियामकीय और पर्यवेक्षी दायित्वों का पालन करना अनिवार्य रहेगा।
संशोधित आवेदन प्रक्रिया और दस्तावेजी आवश्यकताएं
Reserve Bank of India की 23 सितंबर 2025 की प्रेस विज्ञप्ति के आधार पर CoR के स्वैच्छिक समर्पण के लिए आवेदन पत्र और सांकेतिक जांचसूची उपलब्ध कराई गई थी, जिसे अब 29 अप्रैल 2026 के संशोधन निर्देशों के बाद अद्यतन किया गया है। यह संशोधन Reserve Bank of India (Non-Banking Financial Companies, Registration, Exemptions and Framework for Scale Based Regulation) Amendment Directions, 2026 के तहत Unregistered Type I NBFCs से संबंधित बदलावों के अनुरूप किया गया है।
आवेदक NBFC, जिनमें HFC भी शामिल हैं, PRAVAAH पोर्टल के माध्यम से विधिवत भरा हुआ आवेदन पत्र और जांचसूची के अनुसार सभी आवश्यक दस्तावेज जमा कर सकते हैं। केंद्रीय बैंक का उद्देश्य स्वैच्छिक समर्पण की प्रक्रिया को अधिक स्पष्ट और मानकीकृत बनाना है, ताकि रद्दीकरण संबंधी आवेदनों की जांच एक समान ढंग से हो सके।
रद्दीकरण तक अनुपालन जारी रखने का निर्देश
केंद्रीय बैंक ने स्पष्ट किया है कि केवल आवेदन और सहायक दस्तावेज जमा कर देने भर से CoR रद्द नहीं माना जाएगा। संबंधित इकाइयों को RBI, NHB और अन्य सक्षम प्राधिकरणों द्वारा जारी सभी लागू दिशानिर्देशों और निर्देशों का पालन जारी रखना होगा।जब तक RBI संबंधित इकाई को CoR रद्द किए जाने का निर्णय औपचारिक रूप से सूचित नहीं करता, तब तक NBFC और HFC को आवश्यक नियामकीय और पर्यवेक्षी रिटर्न भी जमा करते रहना होगा। यह व्यवस्था गैर-बैंकिंग वित्तीय क्षेत्र में नियामकीय निरंतरता बनाए रखने और रद्दीकरण प्रक्रिया के दौरान पर्यवेक्षण संबंधी किसी शून्य को रोकने के लिए महत्वपूर्ण है।
हमारी पिछली रिपोर्ट में मई 2026 में भारत के औद्योगिक उत्पादन (IIP) की वृद्धि 5.1% रहने और नई IIP श्रृंखला तथा Output Producer Price Index पद्धति लागू होने के प्रभाव पर चर्चा की गई थी। इसमें बिजली उत्पादन, विनिर्माण और पूंजीगत वस्तुओं में मजबूती को निवेश गतिविधि व घरेलू मांग की निरंतरता का संकेत बताया गया, साथ ही पद्धति बदलाव से कुछ क्षेत्रों की वृद्धि दर और आगे चलकर GDP आंकड़ों में संशोधन की संभावना भी रेखांकित की गई।
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