RBI ने SGB 2018-19 सीरीज-IV के समयपूर्व मोचन का मूल्य 1 जुलाई के लिए 14,086 रुपये तय किया
भारत सरकार की 2018 की अधिसूचना के तहत Sovereign Gold Bond 2018-19 Series-IV के निवेशकों के लिए अगली समयपूर्व मोचन तिथि 1 जुलाई 2026 है। इस मोचन के लिए प्रति इकाई 14,086 रुपये का मूल्य तय किया गया है, जो 999 शुद्धता वाले सोने के पिछले तीन कारोबारी दिनों के औसत बंद भाव पर आधारित है।
हाइलाइट्स
- RBI ने SGB 2018-19 Series-IV का समयपूर्व मोचन मूल्य 1 जुलाई 2026 के लिए प्रति यूनिट 14,086 रुपये निर्धारित किया।
- मोचन मूल्य IBJA द्वारा प्रकाशित 999 शुद्धता के सोने के 25, 29 और 30 जून 2026 के बंद भावों के औसत पर आधारित है।
- यह मूल्य SGB 2018-19 Series-IV में निवेशकों को परिपक्वता से पहले नकद निकासी का स्पष्ट मानक और बाजारों के लिए संदर्भ बिंदु प्रदान करता है।
समयपूर्व मोचन की शर्तें और मूल्य निर्धारण
RBI की प्रेस विज्ञप्ति के अनुसार, Sovereign Gold Bond Scheme के तहत सोने के बॉन्ड का समयपूर्व मोचन निर्गम तिथि से पांचवें वर्ष के बाद उस तिथि पर अनुमत है, जिस दिन ब्याज देय होता है। SGB 2018-19 Series-IV की निर्गम तिथि 1 जनवरी 2019 है, इसलिए इस किश्त के लिए अगली समयपूर्व मोचन तिथि 1 जुलाई 2026 निर्धारित है।
मोचन मूल्य India Bullion and Jewellers Association Ltd, IBJA, द्वारा प्रकाशित 999 शुद्धता वाले सोने के बंद भाव के साधारण औसत पर आधारित है। 1 जुलाई 2026 को देय समयपूर्व मोचन के लिए यह औसत 25 जून, 29 जून और 30 जून 2026 के तीन कारोबारी दिनों के बंद भाव से निकाला गया है।
निवेशकों और बाजार के लिए महत्व
घोषित मूल्य उन निवेशकों के लिए अहम है जो SGB 2018-19 Series-IV से परिपक्वता से पहले बाहर निकलने का विकल्प इस्तेमाल करना चाहते हैं। प्रति इकाई 14,086 रुपये का मोचन मूल्य उन्हें इस किश्त के लिए नकदी प्राप्ति का स्पष्ट मानक देता है।Sovereign Gold Bond योजना में मोचन मूल्य को बाजार आधारित सोना कीमतों से जोड़ा जाता है, जिससे निवेशकों को पारदर्शी निर्धारण मिलता है। इस तरह की घोषणा बैंकिंग और बुलियन बाजार, दोनों के लिए संदर्भ बिंदु का काम करती है।
हमारी पिछली रिपोर्ट में EUR/INR (यूरो बनाम भारतीय रुपया) में हल्की बढ़त, रुपये की मजबूती के कारक (कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट और पूंजी प्रवाह) और ऑनलाइन/डिजिटल फॉरेक्स लेनदेन पर बढ़ती नियामकीय जांच के संभावित असर पर चर्चा की गई थी। लेख में यह भी बताया गया था कि तकनीकी संकेत बुलिश मोमेंटम दिखाते हैं, लेकिन ओवरबॉट संकेतों के कारण निकट अवधि में जोड़ी के एक सीमित दायरे में समेकित रहने की संभावना बनी रहती है।
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