आरबीआई ने विनिर्माण क्षेत्र के लिए औद्योगिक परिदृश्य सर्वे का 115वां दौर शुरू किया

आरबीआई ने विनिर्माण क्षेत्र के लिए औद्योगिक परिदृश्य सर्वे का 115वां दौर शुरू किया
आरबीआई का नया सर्वे

भारत के विनिर्माण क्षेत्र में कारोबारी रुझानों का आकलन करने के लिए भारतीय रिजर्व बैंक जुलाई से सितंबर 2026 संदर्भ अवधि वाला तिमाही औद्योगिक परिदृश्य सर्वे का 115वां दौर शुरू करता है। यह सर्वे मौजूदा तिमाही Q2:2026-27 के कारोबारी मनोभाव के साथ अगली तिमाही Q3:2026-27 और उसके बाद की दो तिमाहियों के प्रमुख संकेतकों पर भी दृष्टिकोण जुटाता है।

हाइलाइट्स

  • आरबीआई ने विनिर्माण क्षेत्र के लिए औद्योगिक परिदृश्य सर्वे का 115वां दौर Q2:2026-27 से Q1:2027-28 तक की धारणा और अपेक्षाओं पर केंद्रित शुरू किया।
  • सर्वे के लिए Genesis Management & Market Research Pvt. Ltd. को जुलाई-सितंबर 2026 की अवधि हेतु अधिकृत किया गया, जिसमें कंपनियाँ वेबसाइट या सीधे संपर्क के ज़रिए भाग ले सकती हैं।
  • सर्वे के नतीजे मांग, वित्त, रोजगार और कीमतों पर अग्रिम संकेत प्रदान कर भारतीय विनिर्माण क्षेत्र की व्यापारिक भावना और नीति निर्धारण को प्रभावित करते हैं।

सर्वे का दायरा और भागीदारी प्रक्रिया

जैसा कि भारतीय रिजर्व बैंक की प्रेस विज्ञप्ति के अनुसार बताया गया है, यह सर्वे मांग की स्थिति, वित्तीय परिस्थितियों, रोजगार की स्थिति और कीमतों से जुड़े गुणात्मक संकेतकों के आधार पर उद्योग की धारणा का आकलन करता है। इसमें Q2:2026-27 के मौजूदा कारोबारी हालात और Q3:2026-27 की अपेक्षाओं के साथ Q4:2026-27 और Q1:2027-28 के प्रमुख मानकों पर दृष्टिकोण भी शामिल है।

आरबीआई ने जुलाई से सितंबर 2026 अवधि के लिए इस सर्वे के संचालन हेतु M/s Genesis Management & Market Research Pvt. Ltd. को अधिकृत किया है। चयनित कंपनियों से एजेंसी सीधे संपर्क करती है, जबकि अन्य विनिर्माण कंपनियों को भी बैंक की वेबसाइट के 'Survey' उपशीर्षक से प्रश्नावली डाउनलोड कर भाग लेने के लिए प्रोत्साहित किया जाता है।

प्रमाणित और भरी हुई प्रश्नावली उसमें दिए गए संपर्क विवरण के अनुसार ई-मेल से भेजी जा सकती है। बैंक ने स्पष्ट किया है कि सर्वे के निष्कर्ष नियमित रूप से अपनी वेबसाइट पर सार रूप में जारी किए जाते हैं और उत्तरदाताओं की पहचान उजागर नहीं की जाती।

विनिर्माण क्षेत्र और नीति संकेतों पर असर

यह सर्वे भारतीय विनिर्माण क्षेत्र की कारोबारी भावना का एक नियमित संकेतक है, जिससे मांग, वित्त, रोजगार और मूल्य रुझानों पर अग्रिम संकेत मिलते हैं। ऐसे गुणात्मक आकलन केंद्रीय बैंक को उद्योग की चाल और निकट अवधि की अपेक्षाओं को समझने में सहायक होते हैं।

सर्वे में व्यापक भागीदारी से विभिन्न आकार और उप-क्षेत्रों की कंपनियों का दृष्टिकोण शामिल हो सकता है, जिससे निष्कर्ष अधिक प्रतिनिधिक बनते हैं। पूछताछ या स्पष्टीकरण के लिए आरबीआई ने सांख्यिकी और सूचना प्रबंधन विभाग के एंटरप्राइज सर्वे प्रभाग, बांद्रा-कुर्ला कॉम्प्लेक्स, मुंबई स्थित संपर्क विवरण भी साझा किए हैं।

हमारी पिछली रिपोर्ट में भारत में मध्यम वर्ग के तेजी से विस्तार और उसके खपत-आधारित वृद्धि को मजबूती देने वाले रुझानों पर चर्चा की गई थी। लेख में बताया गया था कि वित्तीय समावेशन, डिजिटल भुगतान और कर राहत जैसे कारकों ने खर्च की क्षमता बढ़ाने के साथ छोटे शहरों तक मांग का दायरा फैलाया है, जिससे अर्थव्यवस्था की व्यापक खपत तस्वीर बनती है।

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