राज्य सरकारी प्रतिभूतियों की नीलामी में 21,700 करोड़ रुपये के मुकाबले 21,491.03 करोड़ रुपये स्वीकार

राज्य सरकारी प्रतिभूतियों की नीलामी में 21,700 करोड़ रुपये के मुकाबले 21,491.03 करोड़ रुपये स्वीकार
नीलामी में 21,491 करोड़ स्वीकृत

भारतीय राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों की ताजा बाजार उधारी नीलामी में अधिकांश निर्गमों को पूर्ण या लगभग पूर्ण सदस्यता मिलती है। कुल 21,700 करोड़ रुपये जुटाने के कार्यक्रम के मुकाबले 21,491.03 करोड़ रुपये स्वीकार किए जाते हैं, जबकि असम आंशिक स्वीकृति और जम्मू-कश्मीर के एक पुनर्निर्गम में शून्य स्वीकृति दर्ज होती है।

हाइलाइट्स

  • भारतीय रिजर्व बैंक की राज्य सरकारी प्रतिभूतियों की नीलामी में 21,700 करोड़ रुपये के मुकाबले 21,491.03 करोड़ रुपये की राशि स्वीकृत हुई।
  • लंबी अवधि की प्रतिभूतियों पर यील्ड 7.5% से 7.7% के दायरे में रही, जबकि अल्पकालिक प्रतिभूतियां दिल्ली में 7.31% और मध्य प्रदेश में 7.39% यील्ड पर स्वीकृत हुईं।
  • असम ने 991.03 करोड़ रुपये आंशिक रूप से स्वीकार किया और जम्मू-कश्मीर ने एक पुनर्निर्गम को पूरी तरह अस्वीकार किया, जो उधारी लागत पर राज्यों की सतर्कता को दर्शाता है।

नीलामी परिणाम और उधारी का ब्योरा

जैसा कि भारतीय रिजर्व बैंक की प्रेस विज्ञप्ति के हवाले से बताया गया है, राज्य सरकारी प्रतिभूतियों की यील्ड/मूल्य आधारित नीलामी में बिहार, केरल, मध्य प्रदेश, ओडिशा, तमिलनाडु, उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड और पश्चिम बंगाल सहित कई उधारकर्ताओं को निर्धारित राशि के अनुरूप स्वीकृति मिलती है। कुल स्वीकृत राशि 21,491.03 करोड़ रुपये रहती है, जो घोषित 21,700 करोड़ रुपये से थोड़ी कम है।

असम 10 वर्षीय प्रतिभूति में 1,000 करोड़ रुपये के मुकाबले 991.03 करोड़ रुपये स्वीकार करता है। जम्मू-कश्मीर 7.60% जम्मू और कश्मीर SGS 2038 के 8 जुलाई 2026 को जारी पुनर्निर्गम में 200 करोड़ रुपये के मुकाबले कोई राशि स्वीकार नहीं करता, जबकि उसके 7.81% जम्मू और कश्मीर SGS 2051 के पुनर्निर्गम में 500 करोड़ रुपये पूर्ण रूप से स्वीकार होते हैं।

बिहार 15 वर्षीय और 18 वर्षीय प्रतिभूतियों में 1,000-1,000 करोड़ रुपये जुटाता है, जिनकी यील्ड क्रमशः 7.66% और 7.71% रहती है। दिल्ली 7 वर्षीय प्रतिभूति में 300 करोड़ रुपये 7.31% पर और 2041 परिपक्वता वाले पुनर्निर्गम में 300 करोड़ रुपये 7.5995% यील्ड पर स्वीकार करती है। मध्य प्रदेश 8 वर्षीय, 12 वर्षीय और 2048 परिपक्वता वाले पुनर्निर्गम में क्रमशः 1,000 करोड़, 1,400 करोड़ और 2,000 करोड़ रुपये जुटाता है।

केरल 2042 और 2049 परिपक्वता वाले पुनर्निर्गमों में क्रमशः 1,000 करोड़ और 1,200 करोड़ रुपये स्वीकार करता है। तमिलनाडु 2034 और 2041 परिपक्वता वाले दो पुनर्निर्गमों में 1,000-1,000 करोड़ रुपये जुटाता है, जबकि उत्तर प्रदेश 2038 और 2046 परिपक्वता वाले पुनर्निर्गमों में 1,000 करोड़ और 1,600 करोड़ रुपये स्वीकार करता है। पश्चिम बंगाल 9 वर्षीय और 21 वर्षीय प्रतिभूतियों में 1,600 करोड़ और 2,200 करोड़ रुपये जुटाता है।

यील्ड संकेत और बाजार प्रभाव

नीलामी के नतीजे दिखाते हैं कि लंबी अवधि की राज्य उधारी में यील्ड प्रायः 7.5% से 7.7% के दायरे में रहती है, हालांकि कुछ कम अवधि के कागजों में यह इससे नीचे भी दिखाई देती है। 7 वर्षीय दिल्ली प्रतिभूति 7.31% पर और 8 वर्षीय मध्य प्रदेश प्रतिभूति 7.39% पर स्वीकार होती है, जिससे कम अवधि के कर्ज की अपेक्षाकृत नरम कीमत का संकेत मिलता है।

दूसरी ओर, 18 वर्षीय बिहार और ओडिशा प्रतिभूतियां 7.70% से 7.71% के आसपास रहती हैं, जबकि 21 वर्षीय पश्चिम बंगाल प्रतिभूति भी 7.71% पर स्वीकार होती है। इससे पता चलता है कि लंबी अवधि के राज्य कर्ज में निवेशकों की मांग बनी रहती है, लेकिन अवधि बढ़ने के साथ उधारी लागत भी ऊंची रहती है।

चयनात्मक स्वीकृति यह भी दर्शाती है कि जारीकर्ता यील्ड स्तरों को लेकर सतर्क रहते हैं। असम का आंशिक स्वीकार और जम्मू-कश्मीर के एक पुनर्निर्गम को पूरी तरह अस्वीकार किया जाना इस बात का संकेत है कि कुछ राज्य बाजार कीमतों के मुकाबले उधारी लागत पर अधिक अनुशासन बरतते हैं।

हमारी पिछली रिपोर्ट में NSE के Nifty सूचकांकों की जुलाई समीक्षा के तहत ESG और Shariah बेंचमार्क में होने वाले बदलावों पर चर्चा की गई थी, जो 31 जुलाई 2026 से प्रभावी होने थे। इसमें Nifty100 ESG और Nifty100 Enhanced ESG से TCS को हटाने और Nifty500 Shariah में कुछ कंपनियों को बाहर/शामिल करने जैसे कदमों का उल्लेख था, जिनका असर इंडेक्स फंड, ETF और अन्य बेंचमार्क-आधारित निवेश उत्पादों की ट्रैकिंग और पोर्टफोलियो पुनर्संतुलन पर पड़ता है।

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