RBI ने सितंबर अवधि के लिए विदेशी मुद्रा कारोबार के दैनिक आंकड़े जारी किए

RBI ने सितंबर अवधि के लिए विदेशी मुद्रा कारोबार के दैनिक आंकड़े जारी किए
RBI का ताजा फॉरेक्स डेटा

भारत में विदेशी मुद्रा बाजार की गतिविधि पर ताजा झलक देते हुए भारतीय रिजर्व बैंक ने 15 सितंबर 2026 से 18 सितंबर 2026 तक के दैनिक मर्चेंट और इंटर-बैंक लेनदेन के आंकड़े जारी किए। यह डेटा स्पॉट, फॉरवर्ड, स्वैप और फॉरवर्ड रद्दीकरण जैसे खंडों में खरीद और बिक्री दोनों को USD मिलियन में दिखाता है।

हाइलाइट्स

  • 15-18 सितंबर 2026 के दौरान मर्चेंट खरीद FCY/INR स्पॉट में प्रतिदिन $5,621-6,949 मिलियन और मर्चेंट बिक्री $5,832-7,866 मिलियन रही।
  • इंटर-बैंक FCY/INR स्पॉट खरीद 15 सितंबर को $22,656 मिलियन से बढ़कर 17 सितंबर को $27,211 मिलियन और 18 सितंबर को $21,770 मिलियन पर रही।
  • इंटर-बैंक FCY/FCY फॉरवर्ड बिक्री 15 सितंबर को $23,301 मिलियन से बढ़ते हुए 18 सितंबर 2026 को $31,215 मिलियन पर पहुंची, जो तेज गतिविधि दर्शाती है।

सितंबर 2026 के कारोबार के प्रमुख आंकड़े

RBI की प्रेस विज्ञप्ति 2026-2027/1283 के अनुसार, जारी किए गए अनंतिम आंकड़े 15 सितंबर 2026 से 18 सितंबर 2026 के बीच विदेशी मुद्रा बाजार में मर्चेंट और इंटर-बैंक सेगमेंट की दैनिक गतिविधि को दर्शाते हैं। नोट में कहा गया है कि इंटर-बैंक सेगमेंट का दैनिक टर्नओवर दोनों प्रतिपक्षों द्वारा दी गई रिपोर्टिंग पर आधारित है।

मर्चेंट खरीद में 15 सितंबर को FCY/INR स्पॉट 6,699 मिलियन डॉलर, 16 सितंबर को 6,073 मिलियन डॉलर, 17 सितंबर को 5,621 मिलियन डॉलर और 18 सितंबर को 6,949 मिलियन डॉलर दर्ज हुआ। इसी अवधि में मर्चेंट बिक्री के लिए FCY/INR स्पॉट 7,866 मिलियन डॉलर, 6,528 मिलियन डॉलर, 5,832 मिलियन डॉलर और 6,408 मिलियन डॉलर रहा।

इंटर-बैंक खरीद में FCY/INR स्पॉट 15 सितंबर को 22,656 मिलियन डॉलर से 17 सितंबर को 27,211 मिलियन डॉलर तक पहुंचता है, जबकि 18 सितंबर को यह 21,770 मिलियन डॉलर पर आता है। इंटर-बैंक बिक्री में FCY/FCY फॉरवर्ड 23,301 मिलियन डॉलर से बढ़कर 18 सितंबर को 31,215 मिलियन डॉलर तक पहुंचता है, जो समीक्षा अवधि में इस खंड की बड़ी गतिविधि को दिखाता है।

बाजार और बैंकिंग क्षेत्र के लिए महत्व

ये आंकड़े भारत के विदेशी मुद्रा बाजार में कॉरपोरेट ग्राहक प्रवाह और बैंकों के बीच तरलता प्रबंधन, दोनों की दिशा समझने में मदद करते हैं। स्पॉट, फॉरवर्ड और स्वैप लेनदेन में उतार-चढ़ाव से यह संकेत मिलता है कि प्रतिभागी अल्पकालिक भुगतान जरूरतों, हेजिंग मांग और इंटर-बैंक पोजिशनिंग को सक्रिय रूप से समायोजित करते हैं।

चार कारोबारी दिनों का यह स्नैपशॉट नियामकीय पारदर्शिता के लिहाज से भी महत्वपूर्ण है, क्योंकि इससे बाजार सहभागियों को अलग-अलग उत्पाद श्रेणियों में कारोबार की तीव्रता का तुलनात्मक आधार मिलता है। RBI ने डेटा को अनंतिम बताया है, इसलिए बाजार विश्लेषण में इसे प्रारंभिक संदर्भ के रूप में देखा जाता है।

हमारी पिछली रिपोर्ट में आरबीआई गवर्नर संजय मल्होत्रा की उस चेतावनी पर चर्चा की गई थी कि वैश्विक वित्तीय परिस्थितियों में और सख्ती आने पर इसका असर बैंकों और बाजारों तक फैल सकता है। लेख में ऊंचे उत्तोलन, खिंचे हुए इक्विटी मूल्यांकन, बॉन्ड यील्ड में तेजी और एआई निवेश चक्र में संभावित सुस्ती जैसे कारकों को वित्तीय स्थिरता के लिए जोखिम चैनल बताया गया था, साथ ही यह भी कि भारत पर दबाव मुख्यतः बाह्य क्षेत्र के जरिए आ सकता है।

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