RBI ने सितंबर अवधि के लिए विदेशी मुद्रा कारोबार का दैनिक डेटा जारी किया

RBI ने सितंबर अवधि के लिए विदेशी मुद्रा कारोबार का दैनिक डेटा जारी किया
RBI ने जारी किया डेटा

भारतीय विदेशी मुद्रा बाजार की गतिविधि पर साप्ताहिक नजर देते हुए भारतीय रिजर्व बैंक ने 7 सितंबर 2026 से 11 सितंबर 2026 की अवधि के लिए दैनिक मर्चेंट और इंटर-बैंक लेनदेन के आंकड़े जारी किए। यह डेटा USD मिलियन में है और इसमें स्पॉट, फॉरवर्ड, स्वैप तथा फॉरवर्ड रद्दीकरण से जुड़े खरीद और बिक्री दोनों पक्ष शामिल हैं।

हाइलाइट्स

  • 10 सितंबर 2026 को इंटर-बैंक FCY/INR स्पॉट खरीद 29,894 मिलियन डॉलर और फॉरवर्ड खरीद 40,904 मिलियन डॉलर रही।
  • 11 सितंबर 2026 को मर्चेंट FCY/INR स्पॉट खरीद 7,646 मिलियन डॉलर और स्पॉट बिक्री 7,975 मिलियन डॉलर दर्ज हुई।
  • रिपोर्टिंग अवधि में इंटर-बैंक सेगमेंट का आकार मर्चेंट सेगमेंट की तुलना में कहीं बड़ा बना रहा, बैंक-से-बैंक सौदों की अहमियत स्पष्ट हुई।

साप्ताहिक कारोबार के आंकड़े और दायरा

RBI की प्रेस विज्ञप्ति 2026-2027/1282 के अनुसार, केंद्रीय बैंक ने 7 सितंबर 2026 से 11 सितंबर 2026 तक के विदेशी मुद्रा कारोबार के दैनिक आंकड़े प्रकाशित किए हैं। जारी विवरण में मर्चेंट और इंटर-बैंक खंडों में FCY/INR तथा FCY/FCY लेनदेन के तहत स्पॉट, फॉरवर्ड, स्वैप और फॉरवर्ड के रद्दीकरण से संबंधित खरीद और बिक्री का ब्योरा शामिल है।

जारी तालिका के मुताबिक 10 सितंबर 2026 को इंटर-बैंक FCY/INR स्पॉट खरीद 29,894 मिलियन डॉलर और फॉरवर्ड खरीद 40,904 मिलियन डॉलर रही, जबकि 11 सितंबर 2026 को यह क्रमशः 20,439 मिलियन डॉलर और 31,325 मिलियन डॉलर दर्ज हुई। मर्चेंट खंड में 11 सितंबर 2026 को FCY/INR स्पॉट खरीद 7,646 मिलियन डॉलर और स्पॉट बिक्री 7,975 मिलियन डॉलर रही।

केंद्रीय बैंक ने यह भी कहा है कि इंटर-बैंक खंड का दैनिक टर्नओवर दोनों समकक्ष पक्षों द्वारा रिपोर्ट किए गए डेटा पर आधारित है। आंकड़ों को अस्थायी, यानी प्रोविजनल डेटा, के रूप में चिह्नित किया गया है।

बाजार पारदर्शिता और क्षेत्रीय महत्व

इस तरह के दैनिक विदेशी मुद्रा कारोबार के आंकड़े बैंकिंग तंत्र, कॉरपोरेट ट्रेजरी और बाजार सहभागियों को मुद्रा बाजार की तरलता, सौदों की संरचना और खंडवार गतिविधि समझने में मदद करते हैं। विशेष रूप से मर्चेंट और इंटर-बैंक लेनदेन का अलग-अलग खुलासा आयातकों, निर्यातकों, डीलरों और वित्तीय संस्थानों के लिए बाजार संकेतों का उपयोगी आधार बनता है।

डेटा से यह भी स्पष्ट होता है कि रिपोर्टिंग अवधि में इंटर-बैंक खंड का आकार मर्चेंट खंड की तुलना में काफी बड़ा बना रहता है, जो भारत के विदेशी मुद्रा बाजार में बैंक-से-बैंक सौदों की केंद्रीय भूमिका को दर्शाता है। RBI की नियमित डेटा रिलीज बाजार पारदर्शिता बढ़ाने के साथ-साथ नियामकीय निगरानी और व्यापक वित्तीय प्रणाली के आकलन में भी योगदान देती है।

आरबीआई गवर्नर संजय मल्होत्रा की वैश्विक वित्तीय जोखिमों पर चेतावनी पर हमारी पिछली रिपोर्ट में बताया गया था कि वित्तीय परिस्थितियों में सख्ती, ऊंचा उत्तोलन और खिंचे हुए इक्विटी मूल्यांकन बैंकों व गैर-बैंक वित्तीय संस्थानों पर दबाव बढ़ा सकते हैं। उस लेख में यह भी रेखांकित किया गया था कि एआई निवेश चक्र में सुस्ती या परिसंपत्ति कीमतों का तेज पुनर्मूल्यांकन बाजार अस्थिरता को बढ़ा सकता है, जबकि भारत पर असर मुख्यतः बाह्य दबावों और पूंजी प्रवाह की बदलती प्रकृति के जरिए दिख सकता है।

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