भारतीय रिजर्व बैंक ने गैर-बैंकिंग वित्तीय क्षेत्र में नियामकीय कार्रवाई के तहत 13 कंपनियों के पंजीकरण प्रमाणपत्र रद्द कर दिए हैं। इस कदम के बाद ये कंपनियां RBI अधिनियम, 1934 में परिभाषित गैर-बैंकिंग वित्तीय संस्थान का कारोबार नहीं कर सकतीं, और सूची में पश्चिम बंगाल व तमिलनाडु की इकाइयां प्रमुख हैं।
हाइलाइट्स
- RBI ने 7 से 21 सितंबर 2026 के बीच 13 एनबीएफसी का पंजीकरण प्रमाणपत्र धारा 45-IA(6) के तहत रद्द किया।
- कोलकाता, जलपाईगुड़ी और चेन्नई की कंपनियों सहित Nakodar Finance, Ajitnath Steels, Britex Financial Services जैसी इकाइयों पर यह कार्रवाई लागू हुई।
- रद्दीकरण के बाद संबंधित कंपनियां एनबीएफसी गतिविधि नहीं कर पाएंगी, जिससे पूर्वी भारत और तमिलनाडु के एनबीएफसी सेक्टर पर अनुपालन का दबाव बढ़ा।
रद्दीकरण आदेश और प्रभावित कंपनियां
भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) की प्रेस विज्ञप्ति 2026-2027/1295 के अनुसार, केंद्रीय बैंक ने RBI अधिनियम, 1934 की धारा 45-IA(6) के तहत यह कार्रवाई की है। आदेशों की तिथियां 7 सितंबर 2026 से 21 सितंबर 2026 के बीच हैं, और इनमें पुराने तथा अपेक्षाकृत नए, दोनों तरह के पंजीकरण शामिल हैं।रद्द किए गए पंजीकरणों में Nakodar Finance Private Limited, Ajitnath Steels Pvt Ltd, Astrol Dealcom Pvt Ltd, Bhagyashri Trading Pvt Ltd, Booh Finance Company Pvt Ltd, Britex Financial Services Pvt. Ltd., Sajili Vinimay Pvt. Ltd., Bhumika Fiscal Services Private Limited, Blue Mount Exports Pvt Ltd., Delta Capital Market Ltd., Rajesh Fiscal Services Private Limited, Sarla Finance Pvt. Ltd. और Shreyans Vyapaar (P) Ltd शामिल हैं। इन कंपनियों के पंजीकृत कार्यालय मुख्य रूप से कोलकाता और उसके आसपास के क्षेत्रों में हैं, जबकि कुछ इकाइयां चेन्नई और जलपाईगुड़ी से भी संबद्ध हैं।
सूची में शामिल कंपनियों को अलग-अलग वर्षों में पंजीकरण प्रमाणपत्र जारी किए गए थे, जिनमें 1998, 2001, 2003, 2004, 2011, 2014 और 2018 जैसे वर्ष शामिल हैं। इससे संकेत मिलता है कि कार्रवाई केवल हालिया पंजीकरणों तक सीमित नहीं है, बल्कि RBI के रिकॉर्ड में मौजूद विभिन्न अवधियों की एनबीएफसी इकाइयों को कवर करती है।
एनबीएफसी क्षेत्र पर नियामकीय असर
पंजीकरण प्रमाणपत्र रद्द होने के बाद संबंधित कंपनियां गैर-बैंकिंग वित्तीय संस्थान के रूप में कोई कारोबार नहीं कर सकतीं। यह कार्रवाई बाजार में केवल अधिकृत संस्थाओं को एनबीएफसी गतिविधियां संचालित करने देने की RBI की निगरानी व्यवस्था को रेखांकित करती है।पूर्वी भारत, खासकर पश्चिम बंगाल, इस सूची में सबसे अधिक प्रतिनिधित्व वाला क्षेत्र है, जिससे वहां के एनबीएफसी परिदृश्य में अनुपालन और लाइसेंसिंग की अहमियत और बढ़ जाती है। तमिलनाडु की शामिल कंपनियों के लिए भी यह कदम बताता है कि नियामकीय मानकों का पालन न होने पर परिचालन अधिकार सीधे प्रभावित हो सकते हैं।
हमारी पिछली रिपोर्ट में आरबीआई गवर्नर संजय मल्होत्रा की वह चेतावनी बताई गई थी कि वैश्विक वित्तीय परिस्थितियों में सख्ती बढ़ने पर उसका असर बैंकों और गैर-बैंक वित्तीय संस्थानों तक फैल सकता है। इसमें ऊंचे लीवरेज, खिंचे हुए इक्विटी मूल्यांकन और एआई निवेश चक्र में संभावित सुस्ती जैसे जोखिम चैनलों के साथ-साथ वित्तीय स्थिरता के लिए लक्षित नियामकीय और पर्यवेक्षी उपायों की जरूरत पर भी जोर दिया गया था।
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