RBI ने भुवनेश्वर में डेटा सेंटर, साइबर सुरक्षा प्रशिक्षण संस्थान शुरू किया

RBI ने भुवनेश्वर में डेटा सेंटर, साइबर सुरक्षा प्रशिक्षण संस्थान शुरू किया
RBI की डिजिटल सुरक्षा पहल

भारत की डिजिटल वित्तीय संरचना को मजबूत करने की दिशा में रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया ने ओडिशा के भुवनेश्वर में नया डेटा सेंटर और साइबर सुरक्षा प्रशिक्षण संस्थान शुरू किया है। यह सुविधा बैंकिंग प्रणाली के महत्वपूर्ण भुगतान और प्रौद्योगिकी ढांचे को सहारा देने के साथ साइबर सुरक्षा, AI और उभरती तकनीकों में कौशल निर्माण पर भी केंद्रित है।

हाइलाइट्स

  • प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भुवनेश्वर में RBI के नए डेटा सेंटर और साइबर सुरक्षा प्रशिक्षण संस्थान का उद्घाटन किया।
  • नया डेटा सेंटर RBI की मिशन-क्रिटिकल प्रणालियाँ जैसे RTGS और NEFT होस्ट करेगा, और प्रशिक्षण संस्थान AI समेत उभरती तकनीकों की विशेषज्ञता विकसित करेगा।
  • यह परियोजना भारत के डिजिटल भुगतान तंत्र को सुदृढ़ करने और वित्तीय क्षेत्र की साइबर सुरक्षा तथा तकनीकी क्षमताओं की दीर्घकालिक मजबूती के लिए महत्वपूर्ण है।

उद्घाटन के केंद्र में वित्तीय प्रौद्योगिकी ढांचा

RBI की प्रेस विज्ञप्ति के अनुसार, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भुवनेश्वर में रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया के नए डेटा सेंटर और साइबर सुरक्षा प्रशिक्षण संस्थान का उद्घाटन किया। कार्यक्रम में ओडिशा के राज्यपाल ब्रजमोहन राम, मुख्यमंत्री मोहन चरण माझी, केंद्रीय वित्त और कॉरपोरेट कार्य मंत्री निर्मला सीतारमण, केंद्रीय जनजातीय कार्य मंत्री जुएल ओराम, राज्य के उपमुख्यमंत्री और अन्य जनप्रतिनिधि भी मौजूद रहे।

अपने संबोधन में प्रधानमंत्री ने कहा कि डेटा सेंटर और साइबर सुरक्षा प्रशिक्षण संस्थान भारत की डिजिटल वित्तीय अवसंरचना को मजबूत करने और प्रौद्योगिकीय आत्मनिर्भरता को आगे बढ़ाने में अहम भूमिका निभाते हैं। उन्होंने जोर दिया कि सुरक्षित बैंकिंग प्रणाली के लिए सुरक्षित डिजिटल ढांचा, मजबूत डेटा सेंटर और शक्तिशाली कंप्यूटिंग सिस्टम आवश्यक हैं, और RBI की यह नई सुविधा उसी दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।

वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने कहा कि लचीला अवसंरचना ढांचा वित्तीय स्थिरता की सुरक्षा और सतत आर्थिक वृद्धि के लिए रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण है। उनके अनुसार, नया डेटा सेंटर RBI की मिशन-क्रिटिकल प्रणालियों, जिनमें RTGS और NEFT शामिल हैं, को होस्ट करेगा, जबकि प्रशिक्षण संस्थान साइबर सुरक्षा, AI और अन्य उभरती तकनीकों में विशेषज्ञता विकसित करेगा।

भुगतान प्रणाली और कौशल विकास पर असर

रिजर्व बैंक के गवर्नर संजय मल्होत्रा ने अपने स्वागत भाषण में कहा कि केंद्रीय बैंक उभरती तकनीकों के उपयोग, डिजिटल अवसंरचना को सुदृढ़ करने, साइबर सुरक्षा बढ़ाने और स्वदेशी प्रौद्योगिकीय क्षमताओं के विकास के लिए प्रतिबद्ध है। उन्होंने इस पहल को 2047 तक विकसित राष्ट्र बनने की देश की आकांक्षा के समर्थन से भी जोड़ा।

यह परियोजना RBI के संचालन ढांचे के लिए इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि यह उन प्रणालियों को आधार देती है जो भारत के डिजिटल भुगतान तंत्र के केंद्र में हैं. इसके साथ ही, प्रशिक्षण संस्थान वित्तीय क्षेत्र, प्रौद्योगिकी प्रदाताओं और व्यापक बैंकिंग पारिस्थितिकी तंत्र के लिए साइबर जोखिम प्रबंधन और नई तकनीकी क्षमताओं के निर्माण में दीर्घकालिक भूमिका निभाता है।

हमारी पिछली रिपोर्ट में अमेरिकी AI डेटा सेंटरों के तेज़ विस्तार के सामने उभर रही बाधाओं पर चर्चा की गई थी—जिसमें ऊंची वित्तीय लागत, निर्माण में देरी और बिजली आपूर्ति की सीमाएं शामिल हैं। लेख में बताया गया था कि कई घोषित परियोजनाएं समय पर पूरी होना कठिन दिख रहा है, जिससे निवेशकों का भरोसा और कंप्यूटिंग क्षमता के वास्तविक विस्तार की गति पर सवाल खड़े हो रहे हैं।

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