आरबीआई ने विदेशी मुद्रा कारोबार के साप्ताहिक आंकड़े जारी किए

आरबीआई ने विदेशी मुद्रा कारोबार के साप्ताहिक आंकड़े जारी किए
विदेशी मुद्रा आंकड़े जारी

भारतीय विदेशी मुद्रा बाजार में 19 अक्टूबर 2026 से 23 अक्टूबर 2026 के बीच मर्चेंट और इंटर-बैंक सौदों का दैनिक ब्योरा अब सार्वजनिक हो गया है। भारतीय रिजर्व बैंक की ओर से जारी यह अस्थायी डेटा डॉलर-आधारित खरीद और बिक्री प्रवाह की झलक देता है, जिससे बाजार गतिविधि और बैंकिंग खंड के आकार का आकलन किया जा सकता है।

हाइलाइट्स

  • 23 अक्टूबर 2026 को मर्चेंट एफसीवाई/आईएनआर स्पॉट खरीद 11,621 मिलियन डॉलर और बिक्री 11,756 मिलियन डॉलर रही।
  • 23 अक्टूबर 2026 को इंटर-बैंक एफसीवाई/आईएनआर स्पॉट खरीद 25,576 मिलियन डॉलर और बिक्री 24,315 मिलियन डॉलर दर्ज हुई।
  • 23 अक्टूबर 2026 को इंटर-बैंक एफसीवाई/एफसीवाई स्पॉट खरीद 30,114 मिलियन डॉलर और बिक्री 31,139 मिलियन डॉलर रही, आंकड़े अस्थायी हैं।

23 अक्टूबर सप्ताह के लेनदेन का ब्योरा

जैसा कि भारतीय रिजर्व बैंक की प्रेस विज्ञप्ति 2026-2027/1451 के अनुसार, केंद्रीय बैंक ने 19 अक्टूबर 2026 से 23 अक्टूबर 2026 की अवधि के लिए विदेशी मुद्रा बाजार में दैनिक मर्चेंट और इंटर-बैंक लेनदेन के आंकड़े जारी किए हैं। सभी आंकड़े U.S. डॉलर मिलियन में हैं और इन्हें अस्थायी डेटा के रूप में प्रकाशित किया गया है।

जारी तालिका में एफसीवाई/आईएनआर और एफसीवाई/एफसीवाई सौदों के तहत स्पॉट, फॉरवर्ड और फॉरवर्ड रद्दीकरण के आंकड़े दिए गए हैं। 23 अक्टूबर 2026 को मर्चेंट खंड में एफसीवाई/आईएनआर स्पॉट खरीद 11,621 रही, जबकि इसी दिन बिक्री 11,756 दर्ज हुई। उसी दिन इंटर-बैंक खंड में एफसीवाई/आईएनआर स्पॉट खरीद 25,576 और बिक्री 24,315 रही।

सप्ताह के दौरान इंटर-बैंक एफसीवाई/एफसीवाई स्पॉट कारोबार भी ऊंचे स्तर पर रहा। 22 अक्टूबर 2026 को इस श्रेणी में खरीद 30,076 और बिक्री 27,370 रही, जबकि 23 अक्टूबर 2026 को खरीद 30,114 और बिक्री 31,139 दर्ज हुई।

बाजार गतिविधि और डेटा की उपयोगिता

यह डेटा विदेशी मुद्रा बाजार में बैंकों और ग्राहकों की गतिविधि के पैटर्न को समझने के लिए महत्वपूर्ण माना जाता है, खासकर तब जब आयात, निर्यात, हेजिंग और अल्पकालिक तरलता प्रबंधन से जुड़े सौदों का आकार बदलता है। मर्चेंट और इंटर-बैंक खंडों का अलग-अलग खुलासा बाजार की गहराई और भागीदारी के स्वरूप को स्पष्ट करता है।

आरबीआई ने नोट में कहा है कि इंटर-बैंक खंड का दैनिक कारोबार उन दोनों प्रतिपक्षों द्वारा रिपोर्ट किए गए आंकड़ों पर आधारित है जो सौदों में शामिल रहते हैं। इससे यह स्पष्ट होता है कि प्रकाशित संख्याएं बैंकिंग प्रणाली के भीतर वास्तविक गतिविधि का व्यापक संकेत देती हैं, हालांकि इन्हें अस्थायी डेटा के रूप में देखा जाना चाहिए।

हमारी पिछली रिपोर्ट में भारतीय बैंकों में ‘अप्रत्यक्ष एवरग्रीनिंग’ की प्रवृत्ति पर चर्चा की गई थी, जहां कुछ कमजोर पूंजी वाले बैंक संबंधित पक्षों के जरिए धन घुमाकर खराब ऋणों की पहचान और दबाव को टालने की कोशिश करते हैं। लेख में बताया गया था कि ऐसे ऋण अपेक्षाकृत अधिक डिफॉल्ट-प्रवण होते हैं और बैंक शेयरों व व्यापक वित्तीय स्थिरता के लिए जोखिम बढ़ा सकते हैं, जिससे लक्षित नियामकीय और पर्यवेक्षी निगरानी की जरूरत रेखांकित होती है।

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