आरबीआई ने विदेशी मुद्रा कारोबार के साप्ताहिक आंकड़े जारी किए

आरबीआई ने विदेशी मुद्रा कारोबार के साप्ताहिक आंकड़े जारी किए
विदेशी मुद्रा रिपोर्ट

भारत के विदेशी मुद्रा बाजार में 12 अक्टूबर 2026 से 16 अक्टूबर 2026 के बीच मर्चेंट और इंटर-बैंक सौदों का दैनिक ब्योरा जारी किया गया है। यह आंकड़ा स्पॉट, फॉरवर्ड, स्वैप और फॉरवर्ड कैंसलेशन श्रेणियों में खरीद और बिक्री गतिविधि का विस्तृत संकेत देता है।

हाइलाइट्स

  • 12-16 अक्टूबर 2026 में मर्चेंट FCY/INR स्पॉट खरीद 1,575 से 5,877 USD मिलियन और बिक्री 2,326 से 7,777 USD मिलियन रही।
  • इंटर-बैंक FCY/INR फॉरवर्ड बिक्री 9,089 से 24,364 और फिर 20,446 USD मिलियन तक बढ़ी, जिससे थोक बाजार गतिविधि में उल्लेखनीय वृद्धि आई।
  • रिपोर्टिंग अवधि में इंटर-बैंक कारोबार मर्चेंट से बड़ा रहा, मुख्यत: FCY/INR स्पॉट और फॉरवर्ड सौदों के कारण बैंकिंग तरलता प्रबंधन हावी रहा।

12 से 16 अक्टूबर के कारोबार का ब्योरा

जैसा कि Reserve Bank of India की प्रेस विज्ञप्ति 2026-2027/1450 के अनुसार बताया गया है, केंद्रीय बैंक ने 12 अक्टूबर 2026 से 16 अक्टूबर 2026 की अवधि के लिए विदेशी मुद्रा में दैनिक मर्चेंट और इंटर-बैंक लेनदेन के आंकड़े जारी किए हैं। सभी आंकड़े USD मिलियन में हैं और इनमें FCY/INR तथा FCY/FCY सौदों के साथ स्पॉट, फॉरवर्ड, स्वैप और फॉरवर्ड कैंसलेशन शामिल हैं।

मर्चेंट खरीद में 12 अक्टूबर को FCY/INR स्पॉट 1,575 और फॉरवर्ड 2,544 रहा, जो 16 अक्टूबर तक क्रमशः 5,877 और 1,539 पर दर्ज हुआ। इसी अवधि में इंटर-बैंक खरीद में FCY/INR स्पॉट 16,180 से 14,212 के बीच रहा, जबकि FCY/FCY स्पॉट 6,016 से 10,579 के दायरे में उतार-चढ़ाव दिखाता है।

मर्चेंट बिक्री में 12 अक्टूबर को FCY/INR स्पॉट 2,326 और 16 अक्टूबर को 7,777 दर्ज हुआ। इंटर-बैंक बिक्री में FCY/INR फॉरवर्ड 9,089 से 24,364 और फिर 20,446 तक गया, जिससे सप्ताह के दौरान थोक बाजार गतिविधि में उल्लेखनीय परिवर्तन दिखाई देता है।

बाजार संकेत और डेटा की प्रकृति

जारी आंकड़े बताते हैं कि रिपोर्टिंग अवधि में इंटर-बैंक खंड का कारोबार मर्चेंट खंड की तुलना में काफी बड़ा बना रहा, खासकर FCY/INR स्पॉट और फॉरवर्ड सौदों में। इससे संकेत मिलता है कि बैंकिंग प्रणाली के भीतर तरलता प्रबंधन और हेजिंग गतिविधियां कुल विदेशी मुद्रा कारोबार का प्रमुख हिस्सा बनी हुई हैं।

आरबीआई ने यह भी कहा है कि इंटर-बैंक खंड का दैनिक कारोबार दोनों प्रतिपक्षों द्वारा रिपोर्ट किए गए डेटा पर आधारित है। आंकड़े प्रोविजनल हैं, इसलिए बाद के संकलन में इनमें सीमित संशोधन संभव है।

भारतीय बैंकों में अप्रत्यक्ष एवरग्रीनिंग की प्रथा पर हमारी पहले की रिपोर्ट में बताया गया था कि कुछ कमजोर पूंजी वाले बैंक संबंधित पक्षों के जरिए धन घुमाकर खराब ऋणों की पहचान टाल सकते हैं, जिससे वसूली का आभास बनता है लेकिन वास्तविक जोखिम छिप जाता है। रिपोर्ट के अनुसार ऐसे ऋण अधिक डिफॉल्ट-प्रवण हो सकते हैं और इनका बढ़ना बैंक शेयरों व व्यापक वित्तीय स्थिरता के लिए जोखिम बढ़ाता है, इसलिए नियामकीय निगरानी में समूह संरचना और फंड फ्लो जैसी कड़ियों पर ध्यान जरूरी है।

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