पश्चिम एशिया युद्ध के बावजूद सोने की कीमतों में तेज उछाल क्यों नहीं आया
फरवरी के अंत में ईरान पर अमेरिका और इजरायल के समन्वित हमलों के बाद वैश्विक बाजारों में सामान्य जोखिम-टालू प्रतिक्रिया दिखी, लेकिन सोने की चाल अपेक्षाकृत सीमित रही। श्रिराम वेल्थ के मार्च के ‘मैक्रो एंड मार्केट’ अपडेट के अनुसार, घटनाक्रम के तुरंत बाद सोना लगभग 2.15% बढ़ा और चांदी 1.63% चढ़ी, फिर भी भारत में 10 ग्राम का भाव 2 लाख रुपये तक जाने जैसी अटकलें पूरी नहीं हुईं। बाजार सहभागियों के मुताबिक इसके पीछे सिर्फ युद्ध नहीं, बल्कि पहले से बनी पोजिशनिंग, तेल की तेज प्रतिक्रिया और व्यापक मैक्रो कारक एक साथ काम कर रहे हैं।
हाइलाइट्स
- स्पॉट मार्केट में 5,400 डॉलर के ऊपर मजबूत रेजिस्टेंस और शुरुआती मांग के बाद कॉमेक्स पर लगभग 5,000 रुपये की करेक्शन आई।
- युद्ध के बीच गोल्ड-सिल्वर म्यूचुअल फंड ट्रांजैक्शन लगभग तीन गुना बढ़े, पर चांदी की औद्योगिक मांग के कारण लाभ सीमित रहे।
- 2025 में रुपये की कमजोरी (लगभग 5% गिरावट, 91 रुपये प्रति डॉलर से ऊपर) के चलते भारत में सोना 81,798 रुपये से 1,32,640 रुपये तक पहुंचा।
रैली क्यों रुकी, पोजिशनिंग और तेल का दबाव
सोने को लेकर अपेक्षित ‘फ्रेंजी’ नहीं दिखी और बाजार फिलहाल ‘वेट एंड वॉच’ में है, ऐसा Forbes India के अनुसार, पीएनजी ज्वेलर्स के चेयरमैन और मैनेजिंग डायरेक्टर सौरभ गाडगिल ने कहा। इंडिया बुलियन एंड ज्वेलर्स एसोसिएशन के नेशनल सेक्रेटरी सुरेंद्र मेहता के मुताबिक स्पॉट मार्केट में 5,400 डॉलर के ऊपर सोने को मजबूत रेजिस्टेंस मिला है, और 5,474 डॉलर से ऊपर ब्रेक के बिना कीमतें रेंज में रह सकती हैं। मेहता ने यह भी दावा किया कि कुछ छोटे देश युद्ध के माहौल में हथियारों की खरीद के लिए सोना बेच सकते हैं, जिससे ऊपर की तरफ दबाव बनता है। गाडगिल के अनुसार, शुरुआती मांग निकलने के बाद कॉमेक्स पर मार्जिन प्रेशर के चलते सोने में लगभग 5,000 रुपये की करेक्शन आई और कई निवेशक गोल्ड फ्यूचर्स से क्रूड फ्यूचर्स की तरफ शिफ्ट हुए क्योंकि तेल में तेजी तेज थी।निवेशक व्यवहार, ईटीएफ प्रवाह और गोल्ड बनाम सिल्वर
युद्ध की खबर के बाद बुलियन खरीदने की रुचि बढ़ी, लेकिन बाजार बंद रहने और नई बुकिंग का हेज नहीं कर पाने के कारण ज्यादातर ज्वेलर्स ने स्टॉक से ही बिक्री की, जिससे ‘पेंट-अप डिमांड’ का असर दिखा। स्टेबल मनी के को-फाउंडर सौरभ जैन के मुताबिक उनके प्लेटफॉर्म पर गोल्ड और सिल्वर म्यूचुअल फंड के ट्रांजैक्शन पिछले दिन की तुलना में लगभग तीन गुना हो गए, जो जोखिम से बचने वाली रिअलोकेशन को दर्शाता है। हालांकि, मोतीलाल ओसवाल फाइनेंशियल सर्विसेज के कमोडिटीज एनालिस्ट मानव मोदी के अनुसार सुरक्षित निवेश की धारणा के कारण गोल्ड में खरीद रुचि चांदी से अधिक रहती है। उन्होंने कहा कि चांदी की करीब 60% मांग औद्योगिक उपयोग से आती है, इसलिए युद्ध से औद्योगिक मंदी का जोखिम बढ़े तो चांदी के लाभ सीमित रह सकते हैं।भारत के लिए रुपया, सह-संबंध और आगे का संकेत
वेल्थ मैनेजर्स के अनुसार 2025 में इक्विटी और सोने का साथ-साथ चढ़ना बताता है कि सह-संबंध मैक्रो रेजीम के साथ बदलते हैं। INVasset PMS के बिजनेस हेड भाविक जोशी ने कहा कि इस चक्र में सोना अकेले नहीं, बल्कि मुद्रा कमजोरी, सॉवरेन रिजर्व रिअलोकेशन और स्थिर लिक्विडिटी स्थितियों के संयोजन से बढ़ा। भारतीय निवेशक के लिए घरेलू कीमतों में उछाल का एक बड़ा कारण रुपये की कमजोरी भी है, 2025 में रुपया लगभग 5% कमजोर हुआ और एक समय 91 रुपये प्रति डॉलर के पार गया। इसी अवधि में डेटा के अनुसार भारत में सोना 10 ग्राम के हिसाब से वर्ष की शुरुआत के लगभग 81,798 रुपये से दिसंबर तक 1,32,640 रुपये के आसपास पहुंचा, जबकि चांदी भी 93,196 रुपये प्रति किलोग्राम से बढ़कर करीब 2,29,452 रुपये तक गई। आगे के लिए गाडगिल का अनुमान है कि अगर पश्चिम एशिया का संघर्ष जारी रहा और तेल ऊंचा बना रहा, तो सोना फिर ऊपर की ओर ट्रेंड पकड़ सकता है, लेकिन एमएमटीसी-पैम्प के एमडी और सीईओ समीत गुहा ने निवेशकों को दीर्घकालीन एसेट एलोकेशन के अनुरूप बने रहने की सलाह दी।हमने पहले पश्चिम एशिया में बढ़ते युद्ध तनाव के बीच एआई सेक्टर में उभरते विवादों और नियामकीय दबाव पर रिपोर्ट किया था। उस रिपोर्ट में रक्षा सौदों को लेकर टेक कंपनियों के टकराव, कंज्यूमर डिवाइसेज में गोपनीयता जांच, और बड़ी टेक कंपनियों के पुनर्गठन/कैपेक्स जैसे संकेतों के जरिए जोखिम, भरोसे और लागत की बहस तेज होने की बात सामने आई थी।
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