भारत ने U.S. की सेक्शन 301 जांच के कानूनी आधार को चुनौती दी
भारत ने U.S. को बताया है कि उसकी औद्योगिक नीतियों और कथित जबरन श्रम से जुड़े सेक्शन 301 जांच नोटिस कानून में तय मानकों को पूरा नहीं करते। नई दिल्ली ने यह भी कहा है कि जांच शुरू करने के लिए जिन आधारों का हवाला दिया गया, वे विशिष्ट भारतीय नीति, कृत्य या प्रथा की पहचान किए बिना व्यापक आरोपों पर टिके हैं।
हाइलाइट्स
- भारत ने USTR की सेक्शन 301 जांच को कानूनी आधार पर चुनौती दी, आरोपों को असंगत और बिना किसी ठोस नीति के बताया।
- U.S. ने सेक्शन 301 के तहत 16 और 60 अर्थव्यवस्थाओं में अतिरिक्त क्षमता व जबरन श्रम की जांच शुरू की, जबकि सेक्शन 122 में सभी आयातों पर 10% अतिरिक्त शुल्क लगाया।
- भारत ने 42 अरब डॉलर के U.S. व्यापार अधिशेष को अपनी संरचनात्मक अतिरिक्त क्षमता से जोड़ने पर आपत्ति जताई और श्रम जांच में उचित साक्ष्य न होने का तर्क दिया।
USTR जांच पर भारत की आपत्ति
Financial Express की रिपोर्ट के अनुसार, वाणिज्य एवं उद्योग मंत्रालय ने Office of U.S. Trade Representative, USTR को अपनी प्रस्तुति में कहा है कि जांच शुरू करने वाला नोटिस समष्टिगत व्यापक आर्थिक संकेतकों पर आधारित है और इसमें भारत की किसी ऐसी ठोस नीति, कृत्य या प्रथा की पहचान नहीं की गई है जिसे कानून के तहत “अनुचित या भेदभावपूर्ण” मानकर U.S. वाणिज्य पर बोझ या प्रतिबंध डालने वाला कहा जा सके।
भारत का कहना है कि स्वप्रेरित जांच शुरू करने के लिए यह स्पष्ट रूप से बताना जरूरी है कि संबंधित देश का कौन सा कृत्य, नीति या व्यवहार अमेरिकी व्यापार को नुकसान पहुंचाता है, जबकि यहां दोनों मामलों में व्यापक आरोप लगाए गए हैं। नई दिल्ली ने U.S. के सभी आरोपों का खंडन करते हुए कहा है कि केवल निवेश प्रोत्साहन या प्रमुख क्षेत्रों में उत्पादन क्षमता विकसित करना अपने आप में अनुचित या असमान नहीं माना जा सकता।
भारत ने यह भी कहा है कि नाममात्र उत्पादन क्षमता में वृद्धि को स्वतः “संरचनात्मक अतिरिक्त क्षमता” नहीं माना जा सकता, खासकर उन अर्थव्यवस्थाओं में जहां मांग बढ़ने का अनुमान है।
व्यापार वार्ता और शुल्क नीति पर असर
U.S. ने Trade Act के सेक्शन 301 के तहत दो जांच शुरू की हैं, एक 16 अर्थव्यवस्थाओं में अतिरिक्त विनिर्माण क्षमता को लेकर और दूसरी 60 अर्थव्यवस्थाओं में जबरन श्रम के मुद्दे पर। पाठ में कहा गया है कि U.S. सुप्रीम कोर्ट द्वारा पारस्परिक और अन्य देश-विशिष्ट शुल्कों को अमान्य ठहराने के बाद व्यापार वार्ताओं में दबाव बनाए रखने के लिए यह कदम उठाया गया।
इसी संदर्भ में U.S. ने Trade Act के सेक्शन 122 के तहत सभी आयातों पर 10% अतिरिक्त शुल्क भी लगाया। पाठ के अनुसार, सेक्शन 122 के तहत 150 दिनों के लिए 15% तक शुल्क लगाया जा सकता है, जबकि सेक्शन 301 में ऐसी समय सीमा नहीं है।
भारत ने U.S. के उस तर्क का भी विरोध किया है जिसमें भारत की कथित संरचनात्मक अतिरिक्त क्षमता को U.S. के साथ 42 अरब डॉलर के व्यापार अधिशेष से जोड़ा गया। भारत का कहना है कि U.S. के साथ उसका व्यापार हिस्सा अन्य भागीदारों की तुलना में काफी छोटा है, इसलिए U.S. व्यापार घाटे के विस्तार में उसकी भूमिका नहीं मानी जा सकती। जबरन श्रम से जुड़ी जांच पर भी भारत ने कहा है कि पूरे आपूर्ति तंत्र को स्वतः दूषित मान लेना और उससे भारतीय निर्यातकों को अनुचित प्रतिस्पर्धी लाभ मिलना मान लेना साक्ष्य के बिना किया गया निष्कर्ष है।
हमारी पिछली रिपोर्ट में भारत के मार्च के व्यापार आंकड़ों पर फोकस किया गया था, जहां माल व्यापार घाटा घटकर 20.7 अरब डॉलर रहा, लेकिन निर्यात-आयात दोनों में कमजोरी और कई प्रमुख सेक्टरों में निर्यात दबाव दिखा। उस लेख में कच्चे तेल के आयात में तेज गिरावट और पश्चिम एशिया के तनाव से ऊर्जा मार्गों व आपूर्ति शृंखला पर पड़ने वाले असर को भी प्रमुख संदर्भ के रूप में रेखांकित किया गया था।
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