भारत का औद्योगिक उत्पादन मार्च में धीमा, पश्चिम एशिया संकट के बीच वृद्धि 4.1% पर

भारत का औद्योगिक उत्पादन मार्च में धीमा, पश्चिम एशिया संकट के बीच वृद्धि 4.1% पर
उत्पादन में गिरावट

भारत के औद्योगिक उत्पादन की रफ्तार मार्च में घटकर पांच महीने के निचले स्तर 4.1% पर आ जाती है, जिससे पश्चिम एशिया के युद्ध के शुरुआती असर का संकेत मिलता है। फरवरी के 5.2% के मुकाबले यह नरमी विनिर्माण और बिजली उत्पादन में कमजोरी के बीच दिखती है, हालांकि विश्लेषक इसे कोर सेक्टर में 0.4% संकुचन के बावजूद अपेक्षाकृत मजबूत मानते हैं।

हाइलाइट्स

  • मार्च 2024 में भारत का औद्योगिक उत्पादन (IIP) प्रतिशत 4.1% तक बढ़ा, जबकि कोर सेक्टर में 0.4% की गिरावट दर्ज हुई।
  • विनिर्माण क्षेत्र की वृद्धि 4.3% रही, बिजली उत्पादन में 0.8% की मामूली वृद्धि और खनन उत्पादन 5.5% बढ़ा, खपत की अधिकांश श्रेणियों में तेजी कमजोर।
  • पूरे वित्त वर्ष में IIP वृद्धि 4.1% रही, जबकि मोटर वाहन निर्माण 18.1% और पूंजीगत वस्तुओं का उत्पादन 14.6% बढ़ा, हालांकि FY25 की पहली तिमाही में दबाव बढ़ने की आशंका।

मार्च के उत्पादन आंकड़ों में क्षेत्रवार रुझान

Forbes India के अनुसार, मार्च का IIP आंकड़ा इस संकट की शुरुआती औद्योगिक झलक देता है, क्योंकि यही वह पहला महीना है जब पश्चिम एशिया के युद्ध का प्रारंभिक असर उत्पादन पर महसूस होता है। Bank of Baroda के मुख्य अर्थशास्त्री मदन सबनवीस का कहना है कि कोर सेक्टर में 0.4% गिरावट के बावजूद IIP वृद्धि का 4.1% पर रहना महत्वपूर्ण है।

तीन प्रमुख क्षेत्रों में सबसे अधिक भार वाले विनिर्माण क्षेत्र की वृद्धि 4.3% रहती है, जो अक्टूबर के बाद सबसे निचला स्तर है। बिजली उत्पादन 0.8% की मामूली दर से बढ़ता है, जो चार महीने का सबसे कमजोर प्रदर्शन है, जबकि खनन उत्पादन 5.5% बढ़कर तीन महीने का सर्वश्रेष्ठ स्तर दर्ज करता है।

उपयोग-आधारित श्रेणियों में पूंजीगत वस्तुओं का उत्पादन 14.6% उछलता है, जो अक्टूबर 2023 के बाद सबसे तेज वृद्धि है। वहीं बुनियादी ढांचा और निर्माण वस्तुओं की वृद्धि 6.7% पर नरम पड़ती है, जो पिछले महीने के 11% से कम है। उपभोक्ता टिकाऊ वस्तुओं की वृद्धि 5.3% तक धीमी पड़ती है, जबकि उपभोक्ता गैर-टिकाऊ वस्तुएं 1.1% तक मामूली बढ़त दिखाती हैं।

विनिर्माण मिश्रण और पहली तिमाही पर असर

विनिर्माण के भीतर 23 में से 14 उद्योग समूह सकारात्मक वृद्धि दर्ज करते हैं। मोटर वाहन, ट्रेलर और सेमी-ट्रेलर निर्माण 18.1% की बढ़त के साथ आगे रहता है, जबकि मशीनरी और उपकरण 11.2% और बेसिक मेटल्स 8.6% की वृद्धि दर्ज करते हैं, जिसे HR coils, alloy steel flat products और MS slabs के अधिक उत्पादन का सहारा मिलता है।

Crisil की प्रधान अर्थशास्त्री दिप्ती देशपांडे का कहना है कि मार्च के आंकड़े झटके के केवल एक हिस्से को पकड़ते हैं, क्योंकि अनिश्चितता और उत्पादक भावना की कमजोरी अभी पूरी तरह उत्पादन आंकड़ों में नहीं दिखती। उनके अनुसार, इस वित्त वर्ष की पहली तिमाही में इसका गहरा असर अधिक स्पष्ट हो सकता है।

सबनवीस के अनुसार इलेक्ट्रॉनिक्स के उपभोक्ता खंड में नकारात्मक वृद्धि दबाव का संकेत देती है। पूरे वित्त वर्ष के आंकड़ों में IIP वृद्धि 4.1% रहती है, जो FY25 के 4% के मुकाबले मामूली अधिक है।

हमारी पिछली रिपोर्ट में भारत के जर्मनी की TKMS से छह P-75I पनडुब्बियां खरीदने के संभावित सौदे पर चर्चा की गई थी, जिसकी अनुमानित लागत करीब 8 अरब U.S. डॉलर बताई गई थी और जिनका संयोजन मुंबई में होने की संभावना है। उस लेख में बताया गया था कि यह कदम रक्षा आधुनिकीकरण के साथ घरेलू विनिर्माण पारितंत्र, तकनीकी हस्तांतरण और स्थानीय आपूर्ति श्रृंखला भागीदारी को गति दे सकता है।

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