GalaxEye 2029 तक 20-उपग्रह नेटवर्क बनाने की तैयारी में, प्रीमियम पृथ्वी-अवलोकन डेटा पर दांव
भारत के निजी अंतरिक्ष क्षेत्र में Mission Drishti के प्रक्षेपण के बाद GalaxEye वैश्विक पृथ्वी-अवलोकन बाजार में अपनी स्थिति मजबूत करने की कोशिश कर रही है। कंपनी का कहना है कि उसकी प्रतिस्पर्धी पेशकश कम कीमत नहीं, बल्कि हर मौसम और दिन-रात में लगातार इमेजरी उपलब्ध कराने की क्षमता है।
हाइलाइट्स
- GalaxEye 2029 के मध्य तक 20 से अधिक उपग्रहों का नेटवर्क तैयार कर लगभग वास्तविक समय की इंटेलिजेंस और निगरानी सेवाएं देने की योजना बना रही है।
- कंपनी अगली 10 सैटेलाइट्स और इंफ्रास्ट्रक्चर के लिए नई फंडिंग जुटाने की योजना बना रही है, साथ ही U.S. इकाई बनाकर उन्नत ग्राहकों तक पहुंच बढ़ाना चाहती है।
- GalaxEye ने कहा कि उसकी प्रीमियम इमेजिंग सेवाएं पश्चिमी डेटा प्रदाताओं को चुनौती देंगी, क्योंकि वे रोशनी या मौसम से परे लगातार इमेज प्रदान करेंगी।
मिशन दृष्टी के बाद विस्तार की योजना
Forbes India को दिए एक साक्षात्कार में GalaxEye के सह-संस्थापक और मुख्य कार्यपालक अधिकारी Suyash Singh ने कहा कि कंपनी 2029 के मध्य तक 20 से अधिक उपग्रहों का समूह तैयार करना चाहती है, ताकि लगभग वास्तविक समय की खुफिया और निगरानी सेवाएं दी जा सकें। उन्होंने कहा कि Mission Drishti, जो 3 मई को Falcon 9 पर प्रक्षेपित हुआ, अभी सात से 10 दिन की पुनरावृत्ति अवधि देता है, लेकिन एक उपग्रह के साथ भी बीमा, आपदा आकलन और अन्य उपयोग मामलों के लिए व्यावसायिक अवसर खुलते हैं।
Singh के अनुसार GalaxEye का OptoSAR मंच रडार और ऑप्टिकल सेंसर को एक साथ जोड़ता है, जिससे बादलों, बारिश या अंधेरे में भी उपयोगी इमेजरी मिल सकती है। उनका कहना है कि कंपनी विशेषज्ञ और गैर-विशेषज्ञ, दोनों तरह के उपयोगकर्ताओं के लिए उपग्रह डेटा को अधिक सहज बनाना चाहती है, जबकि उसकी प्राथमिक भूमिका अंतिम ग्राहकों को सीधे सेवाएं बेचने के बजाय डेटा उपलब्ध कराना है।
कंपनी अगले 10 उपग्रहों के निर्माण और जरूरी अवसंरचना के लिए नई फंडिंग जुटाने की योजना बना रही है, हालांकि Singh ने संभावित मूल्यांकन पर टिप्पणी नहीं की। उन्होंने यह भी कहा कि U.S. इकाई बनाने का उद्देश्य मुख्य रूप से उन्नत ग्राहकों तक पहुंच बढ़ाना है, न कि केवल U.S. उद्यम पूंजी बाजार से पूंजी जुटाना।
मूल्य नहीं, निरंतरता पर कारोबारी दांव
Singh ने कहा कि GalaxEye खुद को कम लागत वाले प्रदाता के रूप में पेश नहीं कर रही है और उसकी सेवाएं औसत उपग्रह इमेजरी प्रदाताओं की तुलना में महंगी हो सकती हैं। उनके मुताबिक कंपनी ग्राहकों को यह भरोसा बेचना चाहती है कि वह हर सप्ताह, मौसम या रोशनी की स्थिति से परे, लगातार इमेज उपलब्ध करा सकती है।यह रणनीति उस वैश्विक बाजार को चुनौती देने की कोशिश है, जिस पर अब तक पश्चिमी डेटा प्रदाताओं का वर्चस्व रहा है। Singh ने कहा कि कंपनी भारत के भीतर ही नहीं, बल्कि वैश्विक खुदरा और वाणिज्यिक बाजारों में भी अपनी विशिष्ट तकनीक के आधार पर हिस्सेदारी बनाना चाहती है।
प्रक्षेपण विकल्पों पर बोलते हुए उन्होंने कहा कि SpaceX और PSLV दोनों उपयुक्त हैं, और भविष्य के मिशनों में चयन समय-खिड़की, लागत और ग्राहक अनुभव पर निर्भर करेगा। उनके अनुसार भारत में निर्माण आधार बनाए रखने की सबसे बड़ी चुनौतियां पूंजी और कुछ महत्वपूर्ण प्रौद्योगिकियां, जैसे सेमीकंडक्टर, हैं, हालांकि प्रतिभा की उपलब्धता देश में मजबूत बनी हुई है।
हमारी पिछली रिपोर्ट में Skyroot Aerospace के 60 मिलियन डॉलर की फंडिंग राउंड और 1.1 अरब डॉलर के मूल्यांकन के साथ भारत की पहली स्पेसटेक यूनिकॉर्न बनने पर चर्चा की गई थी। उस लेख में बताया गया था कि यह पूंजी केवल Vikram-I के निकटवर्ती प्रक्षेपण तक सीमित नहीं, बल्कि आगामी प्रक्षेपणों, अवसंरचना विस्तार और Vikram-II रॉकेट के दीर्घकालिक विकास रोडमैप को भी सपोर्ट करती है। साथ ही, हमने यह भी नोट किया था कि इस तेजी के बावजूद प्रक्षेपण में देरी/विफलता जैसे निष्पादन जोखिम बने रहते हैं, लेकिन वैश्विक निवेशक भारत के बढ़ते स्पेस इकोसिस्टम में लंबे समय का अवसर देख रहे हैं।
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