भारत की कर व्यवस्था पर Milind Deora ने Jeff Bezos की टिप्पणी के बीच प्रगतिशील मॉडल का समर्थन किया
वैश्विक स्तर पर आय असमानता और निम्न आय वर्ग पर कर बोझ को लेकर बहस तेज हो रही है, इसी संदर्भ में राज्यसभा सांसद Milind Deora भारत की कर व्यवस्था को अधिक प्रगतिशील मॉडल के रूप में पेश करते हैं। यह चर्चा तब उभरती है जब Jeff Bezos U.S. में निचले आधे आय वर्ग के लिए संघीय आयकर पूरी तरह खत्म करने की वकालत करते हैं।
हाइलाइट्स
- Jeff Bezos ने X पर U.S. कर व्यवस्था को और ज्यादा प्रगतिशील बनाने के लिए निचले 50% आय वर्ग को संघीय आयकर से छूट देने का सुझाव दिया।
- Milind Deora ने भारतीय कर व्यवस्था का उदाहरण देते हुए बताया कि सिर्फ 4% भारतीय आयकरदाता हैं, जबकि 60% की कृषि आय और $7,500 तक की आमदनी प्रभावित रूप से कर-मुक्त है।
- California में प्रस्तावित 'Billionaire Tax Act' 1 अरब डॉलर से अधिक संपत्ति वाले व्यक्तियों पर एकबारगी 5% कर लगाने की बात कर रहा है, जिससे सामाजिक कल्याण खर्च को सपोर्ट मिल सकता है।
Bezos की कर टिप्पणी और भारत का जवाब
Financial Express के अनुसार, X पर शुरू हुई इस बहस में Jeff Bezos कहते हैं कि U.S. की कर व्यवस्था को और अधिक प्रगतिशील बनाया जा सकता है यदि निचले आधे आय वर्ग को संघीय आयकर से पूरी तरह छूट दी जाए। वह CNBC के एक इंटरव्यू के वीडियो को दोबारा साझा करते हुए कहते हैं कि शीर्ष 1% करदाताओं से कुल कर राजस्व का 40% आता है, जबकि निचले 50% सिर्फ 3% कर देते हैं, और इस हिस्से को शून्य करना कुल राजस्व पर छोटा लेकिन निम्न आय वर्ग के लिए बेहद अर्थपूर्ण कदम होगा।
Bezos उदाहरण देते हैं कि Queens में 75,000 डॉलर सालाना कमाने वाली एक nurse हर महीने 1,000 डॉलर से अधिक कर क्यों दे, जबकि वही रकम किराया, राशन और अन्य जरूरी खर्चों में मदद कर सकती है। वह Amazon के ऐसे कर्मचारियों का भी जिक्र करते हैं जो लगभग 50,000 डॉलर सालाना कमाते हैं और कहते हैं कि संघर्ष कर रहे कामगारों पर भारी कर बोझ का तर्क कमजोर पड़ता है।
इस पर Milind Deora जवाब में कहते हैं कि भारत एक उपयोगी मॉडल पेश करता है, जहां 4% से कम भारतीय आयकर देते हैं, 60% भारतीयों के लिए कृषि आय करमुक्त है, और लगभग 7,500 डॉलर तक की आय प्रभावी रूप से rebate के तहत शून्य कर देती है। उनका कहना है कि भारत की व्यवस्था कम आय वाले तबकों की रक्षा करते हुए अवसरों का विस्तार करती है।
कर बहस का व्यापक आर्थिक और नीतिगत असर
Deora की टिप्पणी भारत की rebate आधारित आयकर संरचना को रेखांकित करती है, जिसमें नई व्यवस्था के तहत कई निम्न आय वाले वेतनभोगी छूट और rebate के बाद प्रभावी रूप से आयकर नहीं देते। इससे भारत की कर नीति को सामाजिक सुरक्षा, उपभोग समर्थन और आय राहत के नजरिए से देखा जा रहा है।यह आदान-प्रदान ऐसे समय में सामने आता है जब दुनिया भर में संपत्ति असमानता, महंगाई, आवास लागत और स्वास्थ्य खर्च को लेकर राजनीतिक और आर्थिक दबाव बढ़ रहा है। U.S. में अरबपतियों और बड़ी कंपनियों पर अधिक कर लगाने की बहस पहले से तेज है, और California में प्रस्तावित “Billionaire Tax Act” 1 अरब डॉलर से अधिक संपत्ति वाले व्यक्तियों पर एक बार का 5% कर लगाने का प्रस्ताव रखता है, जिसका उपयोग स्वास्थ्य सेवा और सामाजिक कल्याण खर्च में संभावित कटौती की भरपाई के लिए किया जा सकता है।
हमारी पिछली रिपोर्ट में 2026 की वैश्विक अरबपति सूची में भारत के 229 नामों के साथ रिकॉर्ड और भारतीय अरबपतियों की संयुक्त संपत्ति के 1 ट्रिलियन डॉलर से ऊपर जाने की प्रवृत्ति पर चर्चा की गई थी। लेख में शेयर बाजार की नई लिस्टिंग्स, Reliance जैसे बड़े समूहों के प्रदर्शन और शीर्ष उद्योगपतियों की संपत्ति वृद्धि के जरिए भारत में संपत्ति संकेंद्रण की तस्वीर रखी गई थी, जो कर नीति और असमानता पर चल रही बहस को संदर्भ देता है।
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