केरल में Cochin Minerals and Rutile Limited, CMRL, और Exalogic Solutions से जुड़े कथित वित्तीय लेनदेन का मामला राज्य की राजनीति और कॉरपोरेट अनुपालन पर दबाव बढ़ा रहा है। पूर्व मुख्यमंत्री पिनराई विजयन के आवास सहित कई ठिकानों पर प्रवर्तन निदेशालय की तलाशी, केरल हाई कोर्ट द्वारा जांच पर रोक से इनकार के तुरंत बाद, इस विवाद को और संवेदनशील बना रही है।
हाइलाइट्स
- प्रवर्तन निदेशालय ने 27 मई को CMRL मनी लॉन्ड्रिंग जांच के तहत पिनराई विजयन के आवास समेत केरल में 10 से अधिक स्थानों पर छापेमारी की।
- SFIO की 160-पृष्ठ अभियोजन शिकायत में वीना विजयन, CMRL MD ससिधरन कार्था और 25 अन्य पर करीब 2.70 करोड़ रुपये की कथित धोखाधड़ी का आरोप है।
- कोर्ट ने Exalogic की समयपूर्व दलील खारिज की, SFIO और ED की जांच को जायज ठहराया, जिससे केरल सरकार पर राजनीतिक और कॉर्पोरेट दबाव बढ़ा।
तलाशी अभियान और जांच का दायरा
FinancialExpress.com के अनुसार, प्रवर्तन निदेशालय ने बुधवार, 27 मई को पूर्व केरल मुख्यमंत्री पिनराई विजयन के आवास समेत राज्य भर में कम से कम 10 स्थानों पर तलाशी ली, जो CMRL मामले से जुड़ी मनी लॉन्ड्रिंग जांच का हिस्सा है। एजेंसी यह जांच कर रही है कि विजयन की पुत्री वीना विजयन की कंपनी Exalogic Solutions Pvt Ltd को CMRL से बिना वैध सेवा दिए भुगतान किया गया था या नहीं, और क्या ये लेनदेन व्यापक अवैध वित्तीय नेटवर्क का हिस्सा थे।
तलाशी केवल विजयन तक सीमित नहीं रही, बल्कि वीना विजयन के पति और पूर्व मंत्री, विधायक पीए मुहम्मद रियास से जुड़े परिसरों तक भी पहुंची। हालांकि पिनराई विजयन का नाम इस मामले में आरोपी के रूप में नहीं है, उनकी पुत्री की कथित भूमिका ने इस प्रकरण को केरल की सबसे संवेदनशील राजनीतिक विवादों में बदल दिया है।
मामला अगस्त 2023 में तब उभरा जब रिपोर्टों में कहा गया कि Exalogic Solutions ने 2017 से 2020 के बीच CMRL से बड़ी रकम प्राप्त की, जबकि कंपनी को कथित रूप से कोई सेवा नहीं दी गई। आयकर अंतरिम निपटान बोर्ड के हवाले से जांच में 1.72 करोड़ रुपये की प्राप्ति का उल्लेख है, जबकि Serious Fraud Investigation Office, SFIO, ने बाद में यह राशि करीब 2.70 करोड़ रुपये बताई।
SFIO की 160 पन्नों की अभियोजन शिकायत में वीना विजयन, CMRL के प्रबंध निदेशक ससिधरन कार्था और 25 अन्य को आरोपी बनाया गया है। अप्रैल 2025 में कॉरपोरेट कार्य मंत्रालय ने कंपनियां अधिनियम की धारा 447 के तहत वीना विजयन के खिलाफ अभियोजन को मंजूरी दी, जिसमें कॉरपोरेट धोखाधड़ी के लिए छह महीने से 10 साल तक की सजा और कथित धोखाधड़ी राशि के तीन गुना तक जुर्माने का प्रावधान है।
अदालती रुख और राजनीतिक असर
यह जांच पिछले 두 वर्षों में बहु-एजेंसी प्रक्रिया में विकसित हुई है। आयकर कार्यवाही के बाद भाजपा नेता शोन जॉर्ज ने कॉरपोरेट कार्य मंत्रालय से CMRL के मामलों की विस्तृत जांच की मांग की, SFIO ने जनवरी 2024 में औपचारिक जांच शुरू की और ED ने मार्च 2024 में ECIR दर्ज कर PMLA के तहत अपनी जांच आगे बढ़ाई।Exalogic की ओर से केरल हाई कोर्ट में दलील दी गई कि ED की कार्रवाई समय से पहले थी, क्योंकि SFIO की अभियोजन शिकायत उस समय दाखिल नहीं हुई थी और आयकर कानून के प्रावधान PMLA के तहत अनुसूचित अपराध नहीं हैं। लेकिन न्यायमूर्ति रवि ने यह कहते हुए चुनौती खारिज कर दी कि जनवरी 2024 से कंपनियां अधिनियम के तहत SFIO जांच पहले से चल रही थी और अप्रैल 2025 में शिकायत दाखिल होने के बाद अनुसूचित अपराध न होने का तर्क टिकता नहीं है।
अदालत ने यह भी कहा कि आयकर निपटान कार्यवाही मनी लॉन्ड्रिंग कानूनों के तहत जांच से प्रतिरक्षा नहीं देती। साथ ही, चूंकि उस चरण में ED ने केवल समन जारी किए थे और याचिकाकर्ताओं के अधिकारों पर प्रत्यक्ष अंकुश नहीं लगाया था, इसलिए चुनौती समयपूर्व मानी गई।
सीपीआई(एम) ने ED की कार्रवाई को राजनीतिक रूप से प्रेरित बताया है। पार्टी महासचिव एमए बेबी ने आरोप लगाया कि केंद्रीय एजेंसी भाजपा नीत केंद्र सरकार के विस्तार की तरह काम कर रही है, जबकि भाजपा के लिए यह मामला भविष्य के चुनावों से पहले वाम सरकार को घेरने का अवसर बन रहा है।
इस प्रकरण का महत्व केवल कानूनी नहीं, बल्कि राजनीतिक और औद्योगिक भी है, क्योंकि CMRL में केरल स्टेट इंडस्ट्रियल डेवलपमेंट कॉरपोरेशन की 13.4% हिस्सेदारी होने की सूचना ने सार्वजनिक क्षेत्र की निगरानी, कॉरपोरेट गवर्नेंस और राज्य सरकार की साख पर अतिरिक्त सवाल खड़े किए हैं।
हमारी पिछली रिपोर्ट में अहमदाबाद में बैंक ऑफ बड़ौदा की आरबीआई मुद्रा तिजोरी से 8.7 करोड़ रुपये की कथित चोरी का मामला बताया गया था, जो आंतरिक ऑडिट और सीसीटीवी ट्रेल से उजागर हुआ। रिपोर्ट में फर्जी e-Kuber बैलेंस प्रमाणपत्र, आरोपियों की गिरफ्तारी, आंशिक नकद बरामदगी और चोरी की रकम के संपत्ति व क्रिप्टो निवेश में इस्तेमाल जैसे पहलुओं पर भी प्रकाश डाला गया था।
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