E20 ईंधन में माइलेज गिरावट से पेट्रोल खर्च बढ़ने का असर दिखता है
भारत में पेट्रोल में एथेनॉल मिश्रण 2014 के करीब 1.5 प्रतिशत से बढ़कर पिछले साल 20 प्रतिशत तक पहुंच चुका है, जिससे देश का ईंधन बदलाव लक्ष्य तय समय से पांच साल पहले पूरा होता है। इस बदलाव के बीच सरकार मानती है कि E20 से ईंधन दक्षता 3 से 5 प्रतिशत तक घट सकती है, जिससे कार मालिकों का दीर्घकालिक पेट्रोल बिल बढ़ता है।
हाइलाइट्स
- E20 ईंधन से कारों की माइलेज में 3 से 5 प्रतिशत की कमी संभव, जिससे उपभोक्ताओं का सालाना पेट्रोल खर्च 1,580 से 2,690 रुपये तक बढ़ सकता है।
- E20 की कीमत शुद्ध पेट्रोल से कम नहीं, क्योंकि सरकार एथेनॉल उत्पादकों को 71.86 रुपये प्रति लीटर का उचित मूल्य देना जरूरी मानती है।
- दिल्ली में पेट्रोल कीमतें जून 2022 से जून 2026 के बीच 5.6 प्रतिशत बढ़ती हैं, जो पड़ोसी और यूरोपीय देशों से काफी कम है।
E20 बदलाव और अतिरिक्त लागत का हिसाब
Forbes India के अनुसार, अप्रैल 2023 के बाद भारत में बनी कारें E20 अनुकूल हैं, जबकि बड़े वाहन निर्माताओं का कहना है कि इससे पहले बनी कारों में भी कोई बड़ी समस्या नहीं है, हालांकि पुरानी कारों में माइलेज घट सकता है। सरकार यह भी कहती है कि E20 से इंजन या पुर्जों को नुकसान के प्रमाण नहीं मिले हैं, लेकिन ईंधन अर्थव्यवस्था में 3 से 5 प्रतिशत की कमी संभव है।अगर किसी पेट्रोल कार का वास्तविक माइलेज 20 किमी प्रति लीटर है और वह सालाना 10,000 किमी चलती है, तो उसे 500 लीटर पेट्रोल चाहिए। दिल्ली में 102.12 रुपये प्रति लीटर के हिसाब से यह खर्च करीब 51,060 रुपये बैठता है।
3 प्रतिशत माइलेज गिरावट पर अतिरिक्त ईंधन लागत एक साल में 1,580 रुपये, पांच साल में 7,900 रुपये और 10 साल में 15,800 रुपये होती है। यदि माइलेज में 5 प्रतिशत की कमी आती है, तो अतिरिक्त पेट्रोल खर्च एक साल में 2,690 रुपये, पांच साल में 13,440 रुपये और 10 साल में 26,880 रुपये तक पहुंचता है।
कीमत स्थिरता बनाम उपभोक्ता बचत
उपभोक्ताओं की शिकायत है कि E20 से माइलेज घटने के बावजूद इसकी कीमत शुद्ध पेट्रोल से कम नहीं है। सरकार का तर्क है कि E20 को सस्ता नहीं रखा गया है क्योंकि एथेनॉल उत्पादकों, खासकर किसानों, को उचित मूल्य देना जरूरी है, और मक्का आधारित एथेनॉल की खरीद लगभग 71.86 रुपये प्रति लीटर पर होती है।मंत्रालय का कहना है कि E20 का उद्देश्य सस्ता ईंधन देना नहीं, बल्कि कीमतों में स्थिरता लाना है। इसी संदर्भ में उसने यह तुलना दी है कि जून 2022 से जून 2026 के बीच दिल्ली में पेट्रोल कीमतें 5.6 प्रतिशत बढ़ती हैं, जबकि इसी अवधि में पाकिस्तान, बांग्लादेश, श्रीलंका और नेपाल में बढ़ोतरी इससे काफी अधिक रहती है, और फ्रांस, जर्मनी तथा इटली में भी लगभग 18 से 19 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज होती है।
हमारी पिछली रिपोर्ट में जून के खुदरा महंगाई आंकड़ों पर चर्चा की गई थी, जहां खाद्य कीमतों और कमजोर मानसून के कारण CPI में तेजी दिखी और ग्रामीण क्षेत्रों में दबाव शहरी इलाकों से अधिक रहा। रिपोर्ट में परिवहन व ईंधन लागत सहित कई कारकों से लागत दबाव बढ़ने और अलग-अलग राज्यों व उपभोक्ता श्रेणियों में कीमतों के अंतर को भी रेखांकित किया गया था।
नवीनतम भारत समाचार
- Forex
- Crypto