ईडी ने बेस्ट फूड्स मनी लॉन्ड्रिंग मामले में 92.91 करोड़ रुपये की अतिरिक्त संपत्तियां कुर्क कीं

ईडी ने बेस्ट फूड्स मनी लॉन्ड्रिंग मामले में 92.91 करोड़ रुपये की अतिरिक्त संपत्तियां कुर्क कीं
ईडी की बड़ी कुर्की

बेस्ट फूड्स लिमिटेड से जुड़े कथित बैंक धोखाधड़ी और धनशोधन मामले में प्रवर्तन निदेशालय ने दिनेश गुप्ता की 92.91 करोड़ रुपये मूल्य की संपत्तियों पर दूसरी अस्थायी कुर्की का आदेश जारी किया है। इस कार्रवाई के बाद मामले में अब तक कुर्क की गई कुल संपत्तियों का मूल्य लगभग 266.58 करोड़ रुपये हो गया है।

हाइलाइट्स

  • प्रवर्तन निदेशालय ने 17 जुलाई 2026 को बेस्ट फूड्स लिमिटेड के खिलाफ मनी लॉन्ड्रिंग मामले में 92.91 करोड़ रुपये की अतिरिक्त चल-अचल संपत्तियां कुर्क कीं।
  • बेस्ट फूड्स लिमिटेड पर एसबीआई के नेतृत्व में बैंकों से 1,740.30 करोड़ रुपये के ऋण की धोखाधड़ी व डायवर्जन का आरोप है, जिसकी सीबीआई जांच जारी है।
  • जांच एजेंसियां अब शेल कंपनियों, बैंक जमाओं और गुप्ता परिवार के नियंत्रित रियल एस्टेट की संपत्तियों पर कार्रवाई बढ़ा रही हैं, मामला कॉरपोरेट उधारी नियंत्रण व बैंकिंग नियमन पर असर डाल रहा है।

जांच के दायरे में नई संपत्तियां

Enforcement Directorate के अनुसार, 17 जुलाई 2026 के दूसरे अस्थायी कुर्की आदेश के तहत 2 चल और 52 अचल संपत्तियां कुर्क की गई हैं, जो बेस्ट फूड्स लिमिटेड के प्रबंध निदेशक दिनेश गुप्ता की लाभकारी स्वामित्व वाली बताई गई हैं। एजेंसी यह कार्रवाई धनशोधन निवारण अधिनियम, 2002 की धारा 5(1) के तहत जारी जांच के हिस्से के रूप में कर रही है।

मामले की जांच सीबीआई, एसी-5, नई दिल्ली में दर्ज प्राथमिकी से निकलती है, जो भारतीय दंड संहिता और भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के प्रावधानों के तहत दर्ज की गई थी। यह प्राथमिकी 6 अगस्त 2020 को भारतीय स्टेट बैंक की स्ट्रेस्ड एसेट्स मैनेजमेंट ब्रांच, चंडीगढ़ की लिखित शिकायत पर दर्ज हुई, जिसमें आरोप है कि बेस्ट फूड्स ने एसबीआई की अगुवाई वाले बैंकों के संघ से मिली ऋण सुविधाओं का धोखाधड़ी से उपयोग और डायवर्जन किया, जिससे चूक के समय 1,740.30 करोड़ रुपये का बकाया खड़ा हुआ।

एजेंसी का कहना है कि कथित तौर पर डायवर्ट की गई रकम को कर्मचारियों, रिश्तेदारों और सहयोगियों के नाम पर बनाई गई शेल और डमी इकाइयों के नेटवर्क से गुजारा गया। जांच में यह भी सामने आया है कि फर्जी कारोबारी लेनदेन की परतों के जरिए इन धनराशियों को रियल एस्टेट और अन्य नियंत्रित कंपनियों में लगाया गया, जबकि लाभकारी नियंत्रण दिनेश गुप्ता के पास बना रहा।

कानूनी कार्रवाई और बैंकिंग क्षेत्र पर असर

जांच के दौरान 15 जुलाई 2025 से 17 जुलाई 2025 के बीच दिनेश गुप्ता और संबद्ध इकाइयों के परिसरों पर तलाशी अभियान चलाया गया था, जिसके बाद पांच लग्जरी वाहनों को फ्रीज किया गया और आपत्तिजनक दस्तावेज जब्त किए गए। धनशोधन निवारण अधिनियम की धारा 16 के तहत 15 जुलाई 2025 और 16 जुलाई 2025 को सर्वे भी किए गए थे।

इसके बाद दिनेश गुप्ता को 8 अगस्त 2025 को गिरफ्तार किया गया, हालांकि उन्हें 30 मई 2026 के आदेश से दिल्ली उच्च न्यायालय से जमानत मिल गई। इससे पहले ईडी ने 4 अक्टूबर 2025 को 173.67 करोड़ रुपये की अचल संपत्तियां अस्थायी रूप से कुर्क की थीं, जिनकी पुष्टि निर्णायक प्राधिकारी ने की थी, जबकि 4 अक्टूबर 2025 की अभियोजन शिकायत पर विशेष पीएमएलए अदालत, नई दिल्ली ने 29 नवंबर 2025 को संज्ञान लिया था।

नई कुर्की से संकेत मिलता है कि जांच एजेंसियां कथित अपराध की आय के सीधे और परोक्ष प्रवाह को ट्रैक करते हुए बैंक जमाओं, आवासीय और वाणिज्यिक इकाइयों तथा शेल इकाइयों के नाम पर रखी संपत्तियों तक कार्रवाई बढ़ा रही हैं। मामले की जांच जारी है, और यह प्रकरण बैंक ऋण निगरानी, कॉरपोरेट उधारी नियंत्रण और शेल संस्थाओं के जरिए धन के प्रवाह पर नियामकीय सख्ती के संदर्भ में महत्वपूर्ण बना हुआ है।

हमारी पिछली रिपोर्ट में ईडी की ‘डिजिटल अरेस्ट’ साइबर-धोखाधड़ी से जुड़े बहु-राज्य छापों की कार्रवाई पर चर्चा की गई थी, जहां जांच में म्यूल बैंक खातों, शेल कंपनियों और फॉरेक्स चैनलों के जरिए धनशोधन की परतदार व्यवस्था सामने आई। उस कार्रवाई में नकदी, विदेशी मुद्रा और सोना-आभूषण की जब्ती के साथ कई बैंक खाते पीएमएलए के तहत फ्रीज किए गए थे और फर्जी इनवॉयसिंग के जरिए रुपये को विदेशी मुद्राओं में बदलने के संकेत मिले थे।

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