NSE Indices 31 अगस्त से निफ्टी फिक्स्ड इनकम सूचकांकों में बदलाव करेगी
एनएसई के ऋण सूचकांक ढांचे में मासिक समीक्षा के बाद कई सरकारी प्रतिभूतियों को निफ्टी फिक्स्ड इनकम सूचकांकों में शामिल और बाहर किया जा रहा है। ये बदलाव 31 अगस्त 2026 से प्रभावी होंगे और परिपक्वता तथा अवधि आधारित कई G-Sec सूचकांकों की संरचना को प्रभावित करेंगे।
हाइलाइट्स
- NSE Indices Limited 31 अगस्त 2026 से निफ्टी G-Sec सूचकांकों में 7.10% GOVT. STOCK 2034 व 6.33% GOVT. STOCK 2035 को हटाएगी और 7.06% GOVT. STOCK 2041 सहित कई अदला-बदली करेगी।
- इन बदलावों से संबंधित सूचकांकों के घटक, मेच्योरिटी प्रोफाइल और अवधि एक्सपोजर बदलेंगे, जिससे ट्रैकिंग फंड व पोर्टफोलियो को आवंटन समायोजित करना पड़ सकता है।
- निफ्टी Fixed Income PRC Indices के G-Sec लेवल पर कोई संरचनात्मक बदलाव नहीं है, पर वेटेज समायोजन 31 अगस्त 2026 से लागू होंगे, बाजार प्रतिनिधित्व अद्यतन होगा।
31 अगस्त से लागू होने वाले सूचकांक पुनर्संतुलन
National Stock Exchange of India के अनुसार, NSE Indices Limited की Index Maintenance Sub-Committee (Debt) ने मासिक समीक्षा के बाद निफ्टी G-Sec परिपक्वता आधारित और अवधि आधारित सूचकांकों में बदलाव घोषित किए हैं। 4-8 वर्ष G-Sec सूचकांक से 7.10% GOVT. STOCK 2034 को हटाया जा रहा है और 6.54% GOVT. STOCK 2032 को शामिल किया जा रहा है, जबकि 11-15 वर्ष G-Sec सूचकांक से 7.23% GOVT. STOCK 2039 और 6.92% GOVT. STOCK 2039 बाहर हो रही हैं तथा 7.06% GOVT. STOCK 2041 और 6.83% GOVT. STOCK 2039 जोड़ी जा रही हैं।निफ्टी Composite G-Sec Index से 6.33% GOVT. STOCK 2035 को हटाकर 7.06% GOVT. STOCK 2041 जोड़ी जा रही है। साथ ही NIFTY 8-13 yr G-Sec Index और Nifty 15 yr and above G-Sec Index में कोई बदलाव नहीं किया जा रहा है।
अवधि आधारित सूचकांकों में Nifty Ultra Short Duration G-Sec Index से 6.97% GOVT. STOCK 2026 बाहर हो रही है और 7.33% GOVT. STOCK 2026 शामिल की जा रही है। Nifty Medium Duration G-Sec Index में 6.75% GOVT. STOCK 2029 की जगह 7.17% GOVT. STOCK 2030 लाई जा रही है, जबकि Nifty Long Duration G-Sec Index से 6.90% GOVT. STOCK 2065 हटाकर 7.06% GOVT. STOCK 2041 जोड़ी जा रही है।
निफ्टी Low Duration G-Sec Index, Nifty Short Duration G-Sec Index और Nifty Medium to Long Duration G-Sec Index में कोई बदलाव नहीं किया जा रहा है। ये सभी परिवर्तन 31 अगस्त 2026 से लागू होंगे, जिनका प्रभाव 30 अगस्त 2026 के बंद स्तर के बाद माना जाएगा।
ऋण बाजार और ट्रैकिंग उत्पादों पर असर
इन संशोधनों से संबंधित सूचकांकों का घटक मिश्रण, परिपक्वता प्रोफाइल और अवधि एक्सपोजर बदल रहा है, जिससे उन्हें ट्रैक करने वाले फंड, पोर्टफोलियो प्रबंधक और बेंचमार्क आधारित निवेश उत्पादों को अपने आवंटन समायोजित करने पड़ सकते हैं। खासकर 2041, 2039, 2032 और अल्पकालिक 2026 प्रतिभूतियों का समावेश विभिन्न अवधि खंडों में प्रतिनिधित्व को नया संतुलन देता है।निफ्टी Fixed Income PRC Indices में G-Sec सूचकांकों के स्तर पर कोई घटक बदलाव नहीं किया जा रहा है, लेकिन भार वितरण में विभिन्न समायोजन 31 अगस्त 2026 से प्रभावी हो रहे हैं। इससे यह संकेत मिलता है कि एनएसई सूचकांक ढांचा केवल प्रतिभूति चयन ही नहीं, बल्कि वजन संरचना के जरिए भी बाजार प्रतिनिधित्व को अद्यतन कर रहा है।
हमारी पिछली रिपोर्ट में NSE Indices Limited की मासिक शरिया अनुपालन समीक्षा के बाद Nifty500 Shariah सूचकांक में किए गए पुनर्संतुलन पर चर्चा की गई थी। इसमें बताया गया था कि किन कंपनियों को सूचकांक से हटाया/जोड़ा जा रहा है और ये बदलाव 31 अगस्त 2026 से प्रभावी होंगे, जिसका असर इस बेंचमार्क को ट्रैक करने वाले निवेशकों और उत्पादों की होल्डिंग्स पर पड़ सकता है।
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