ट्वीट लेखक द्वारा हटा दिया गया था.
लेकिन हमने सब कुछ सहेज लिया 🙂.
स्टैनफोर्ड विश्वविद्यालय के कंप्यूटर वैज्ञानिक जेफ्री उलमान ने आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण दृष्टिकोण साझा किया है। उनका मानना है कि ''आप एक अरब पैरामीटर्स को सॉफ्टवेयर की तरह डिबग नहीं कर सकते''। यह ट्विटर पर सेनापति गोपालकृष्णन के माध्यम से प्रकट हुआ। उलमान ने बताया कि AI प्रणाली की जटिलता को देखते हुए पारंपरिक सॉफ्टवेयर डिबगिंग तकनीकें अपर्याप्त हैं।
हाल ही में, AI मॉडल्स इतने विशाल हो चुके हैं कि उनका उचित मूल्यांकन करने के लिए नई तकनीकों की आवश्यकता है। विशेषज्ञों के बीच यह चर्चा तेज हो रही है कि AI सिस्टम्स के बढ़ते कंप्लेक्सिटी को कैसे नियंत्रित किया जाए।
AI प्रौद्योगिकी की जटिलता और अनिश्चितता के बीच, सेनापति गोपालकृष्णन की हाल ही में सामने आई 80,000 पीढ़ियों तक चले विकास प्रयोग पर आधारित विश्लेषण, जिसे विकास प्रयोग शीर्षक में प्रस्तुत किया गया था, इसी बहस को आगे बढ़ाता है। इसके अलावा, समाधानों की तलाश में प्राचीन खोजों की प्रासंगिकता को रेखांकित करती उनकी रिपोर्ट, जिसमें 2000 साल पुराने भूलभुलैया की खोज का उल्लेख है, तकनीकी प्रगति के ऐतिहासिक संदर्भों को भी उजागर करती है।