ट्वीट लेखक द्वारा हटा दिया गया था.
लेकिन हमने सब कुछ सहेज लिया 🙂.
Gautam Chikermane ने कई राजनीतिक, कॉरपोरेट और सैन्य नेताओं से मुलाकात के बाद यह विश्लेषण प्रस्तुत किया कि अंतरराष्ट्रीय वित्त की परंपरागत मूलभूत धारणाएं—जैसे वैल्यूएशन मॉडल, आर्थिक संकेतक और मैक्रोइकोनॉमिक अनुमान—राष्ट्र की सुरक्षा के आगे कमजोर पड़ती दिखीं। उनका अवलोकन दर्शाता है कि वैश्विक स्तर पर वित्त के निर्णय अब व्यावहारिकता के साथ नीति तथा रणनीतिक प्राथमिकताओं से भी संचालित हो रहे हैं। इससे यह स्पष्ट होता है कि अब आर्थिक संकेतकों की तुलना में राष्ट्रहित को प्रमुखता दी जा रही है।
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हाल ही में Gautam Chikermane ने भारत की विकास दर पर वैश्विक चुनौतियों के असर का विश्लेषण एक विस्तृत रिपोर्ट में किया था। उन्होंने एक अन्य लेख में यह भी बताया कि भारत की सकल घरेलू उत्पाद (GDP) स्थिरता में मजबूत मैक्रोइकोनॉमिक कारकों की भूमिका रही है और स्थिरता को रेखांकित किया। इन पिछले अवलोकनों में आर्थिक संकेतकों और नीतिगत प्राथमिकताओं पर साफ चर्चा की गई है।