ट्वीट लेखक द्वारा हटा दिया गया था.
लेकिन हमने सब कुछ सहेज लिया 🙂.
उद्योगपति और समाजसेवी हर्ष गोयनका ने जीवन में सकारात्मकता और दया भरने के लिए प्रेरित किया।
गोयनका ने अपने ट्वीट में लिखा, ''यदि आप कुछ बन सकते हैं, तो सबसे दयालु और सबसे प्रामाणिक बनें।'' उनका मानना है कि दूसरों को माफ करना और स्वयं के प्रति सकारात्मक रवैया अपनाना अत्यंत महत्वपूर्ण है।
गोयनका की इस प्रेरक सोच ने जीवन में गहराई से अर्थ तलाशने की परंपरा को आगे बढ़ाया है, जैसा कि उनके दृष्टिकोण में जीवन की गहरी समझ की आवश्यकता पर आधारित विश्लेषण पिछले विमर्श में भी देखा गया था। उनकी सोच में भारत की सामाजिक संरचना और आत्मनिर्भरता जैसे विषयों की चर्चा पूर्ववर्ती लेख के विचारों से भी प्रतिध्वनित होती है, जिसमें गोयनका ने सकारात्मकता और दयालुता को राष्ट्रीय विकास के लिए आवश्यक गुण बताया था।