ट्वीट लेखक द्वारा हटा दिया गया था.
लेकिन हमने सब कुछ सहेज लिया 🙂.
प्रोफेसर शामिका रवि ने ट्वीट कर अर्थशास्त्री जगत में लंबे समय से चलते आ रहे मुद्दे को उठाया है। उनके अनुसार, भारतीय डेटा को लेकर कई बार पूर्वाग्रह देखा गया है। २००९ में एक 'ए' जर्नल के संपादक ने एक अच्छे शोध कार्य के बावजूद भारतीय डेटा की वजह से उसके प्रकाशन से इनकार कर दिया था। यह घटना दिखाती है कि सुनीति और नीयत के बीच किस प्रकार का असंतुलन हो सकता है। विवरणों की पुष्टि की जा रही है।
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