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लेकिन हमने सब कुछ सहेज लिया 🙂.
अमिताभ कांत ने किरण शॉ के एक महत्वपूर्ण लेख पर चर्चा करते हुए भारत में एनएसई और बीएसई जैसे प्रमुख स्टॉक एक्सचेंज पर शोध-अवस्था की नवाचार कंपनियों के लिए एक समर्पित लिस्टिंग ढाँचे की आवश्यकता पर जोर दिया है। उनका मानना है कि इस तरह के ढाँचे से पूंजी का सही उपयोग, वैज्ञानिक प्रतिभा का रोकथाम और बौद्धिक संपदा को देश में बनाए रखने में मदद मिलेगी। वर्तमान में, हांगकांग स्टॉक एक्सचेंज (एचकेईएक्स) इस मॉडल के अनुरूप है, जिससे भारत के लिए भी इसे अपनाना जरूरी हो गया है।
कांत की यह सिफारिशें भारतीय स्टार्टअप्स के लिए सुव्यवस्थित पूंजी व्यवस्था की ओर संकेत करती हैं, जैसा कि उन्होंने पहले भी भारतीय स्टार्टअप्स के नवोत्थान पर चर्चा करते हुए उल्लेख किया था। इसी तरह, नए शोध-आधारित प्लेटफॉर्मों के महत्त्व को विश्लेषित करना उनके पिछले विश्लेषण—विशेषकर भारत में सर्कुलर इकोनॉमी और उद्यमिता में हो रहे बदलावों पर केंद्रित लोहम की अग्रणी यात्रा की सराहना—से प्रतिध्वनित होता है।