Ashutosh Sureka

सेबी ने पश्चिम बंगाल में निवेशक जागरूकता और सुरक्षा उपायों पर जोर दिया

सेबी ने पश्चिम बंगाल में निवेशक जागरूकता और सुरक्षा उपायों पर जोर दिया
सेबी का सुरक्षा संदेश

कोलकाता में आयोजित क्षेत्रीय निवेशक जागरूकता संगोष्ठी में भारतीय प्रतिभूति बाजार में बढ़ती भागीदारी के साथ निवेशक शिक्षा को मजबूत करने की आवश्यकता पर जोर दिया गया। पश्चिम बंगाल में निवेशकों और म्यूचुअल फंड भागीदारी में तेज वृद्धि के बीच नियामक ने सरल, सुरक्षित और अधिक पारदर्शी निवेश ढांचे को आगे बढ़ाने के उपायों को रेखांकित किया।

हाइलाइट्स

  • 2015 में पश्चिम बंगाल में निवेशकों की संख्या 12 लाख से बढ़कर लगभग 90 लाख और म्यूचुअल फंड परिसंपत्तियां 3.65 लाख करोड़ रुपये तक पहुंचीं।
  • सेबी अध्यक्ष पांडे ने 1 नवंबर 2026 से एसेट मैनेजमेंट कंपनियों के डिजिटल प्लेटफॉर्म पर डायरेक्ट प्लान डिफॉल्ट विकल्प अनिवार्य करने और लागत पारदर्शिता सुनिश्चित करने की घोषणा की।
  • संगोष्ठी में बांड बाजार के नियामकीय सुधार, वैश्विक प्रतिस्पर्धा तथा खुदरा निवेश उत्पादों की सुलभता जैसे कदमों के जरिए ऋण बाजार में भागीदारी बढ़ाने का फोकस रहा।

कोलकाता संगोष्ठी में नियामकीय प्राथमिकताएं

नेशनल स्टॉक एक्सचेंज ऑफ इंडिया के अनुसार, 31 अक्टूबर 2026 को कोलकाता में आयोजित इस संगोष्ठी में सेबी अध्यक्ष तुहिन कांत पांडे ने निवेशक जागरूकता, सूचित निवेश और मजबूत निवेशक संरक्षण को पूंजी बाजार के अगले चरण की प्रमुख शर्त बताया। कार्यक्रम का आयोजन सेबी के तत्वावधान में एनएसई ने किया और इसका व्यापक संदेश "समझ से इन्वेस्टिंग सिंपल" रहा।

पांडे ने कहा कि पश्चिम बंगाल में निवेशकों की संख्या 2015 के लगभग 12 लाख से बढ़कर करीब 90 लाख हो गई है। राज्य में लगभग 43 लाख विशिष्ट म्यूचुअल फंड निवेशक हैं, जबकि वित्त वर्ष 2025-26 के अंत तक म्यूचुअल फंड परिसंपत्तियां करीब 3.65 लाख करोड़ रुपये तक पहुंच गई हैं।

उन्होंने सेबी के निवेशक सर्वेक्षण का हवाला देते हुए कहा कि 63% परिवार कम से कम एक प्रतिभूति-बाजार उत्पाद से परिचित हैं, लेकिन केवल लगभग 9.5% ही प्रतिभूति बाजार में भाग लेते हैं। केवल 36% निवेशकों में बाजार संबंधी मध्यम या उच्च स्तर का ज्ञान पाया गया, जिससे व्यापक पहुंच के साथ वित्तीय समझ बढ़ाने की जरूरत रेखांकित होती है।

सेबी अध्यक्ष ने निवेश को सरल और सुलभ बनाने के लिए आधार-आधारित ई-केवाईसी, पात्र निवेशकों के लिए बेसिक सर्विसेज डीमैट अकाउंट और एसआईपी जैसे उपायों का उल्लेख किया। उन्होंने म्यूचुअल फंड फोलियो लॉकिंग, अनधिकृत लेनदेन रोकने के लिए ट्रेडिंग अकाउंट ब्लॉक करने की सुविधा, प्रतिभूतियों का सीधे डीमैट खातों में भुगतान, स्टॉकब्रोकरों द्वारा ग्राहक निधियों का आवधिक निपटान और नामांकन व ट्रांसमिशन प्रक्रियाओं के सरलीकरण जैसे सुरक्षा उपाय भी गिनाए।

उन्होंने यह भी रेखांकित किया कि 1 नवंबर 2026 से सभी एसेट मैनेजमेंट कंपनियों के डिजिटल प्लेटफॉर्म पर डायरेक्ट प्लान डिफॉल्ट विकल्प के रूप में दिखाई देते हैं, जबकि रेगुलर प्लान चुनने वाले निवेशकों को उससे जुड़ी अधिक लागत के बारे में सूचित किया जाता है। पांडे ने फर्जी ट्रेडिंग ऐप, क्लोन वेबसाइट, भ्रामक सोशल मीडिया समूह, डीपफेक और सेबी, स्टॉक एक्सचेंजों तथा पंजीकृत मध्यस्थों के प्रतिरूपण को लेकर भी सतर्क रहने की सलाह दी।

बाजार भागीदारी और ऋण बाजार पर व्यापक असर

कार्यक्रम में निवेशक शिक्षा अभियान प्रोजेक्ट जागरूक पर भी जोर दिया गया, जिसे 5 अक्टूबर 2026 को शुरू किया गया था। इस पहल के तहत स्टॉक एक्सचेंज, डिपॉजिटरी, एएमएफआई और एनआईएसएम को एक साझा संदेश के साथ जोड़ा गया है ताकि निवेशक शिक्षा को संस्थानों तक सीमित रखने के बजाय लोगों तक पहुंचाया जा सके।

संगोष्ठी में "द बॉन्ड ब्लूप्रिंट: रेगुलेटरी रिफॉर्म्स एंड मार्केट डायनेमिक्स" विषय पर एक पैनल चर्चा भी हुई, जिसमें वित्तीय और प्रतिभूति बाजार के विशेषज्ञों ने भारत के ऋण बाजार के बदलते परिदृश्य पर विचार किया। चर्चा में कॉरपोरेट बॉन्ड बाजार के नियामकीय ढांचे, वैश्विक ऋण बाजार में भारत की स्थिति और बॉन्ड को खुदरा निवेशकों के लिए अधिक सुलभ निवेश उत्पाद बनाने के उपाय शामिल रहे।

यह फोकस संकेत देता है कि बाजार नियामक इक्विटी भागीदारी बढ़ने के साथ निवेशक आधार को अधिक विविध वित्तीय उत्पादों तक ले जाना चाहता है। निवेशक संरक्षण, लागत पारदर्शिता और वित्तीय साक्षरता पर जोर, खुदरा भागीदारी के अगले चरण में बाजार की विश्वसनीयता को मजबूत करने का आधार बनता है।

हमारी पिछली रिपोर्ट में विश्व निवेशक सप्ताह 2026 के तहत एनएसई और सेबी द्वारा चलाए गए ‘Samajh Se Investing Simple’ अभियान और Project Jagrook के जरिए निवेशक जागरूकता व वित्तीय साक्षरता बढ़ाने की पहल पर प्रकाश डाला गया था। इसमें सुरक्षित, सूचित और जिम्मेदार निवेश व्यवहार को बढ़ावा देने के साथ-साथ सत्यापन टूल्स, धोखाधड़ी रोकथाम उपायों और देशभर में बड़े पैमाने पर आयोजित निवेशक जागरूकता कार्यक्रमों की भूमिका को भी रेखांकित किया गया था।

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