भारत में जीएलपी-1 दवाओं की बिना पर्ची बिक्री पर नियामकीय जोखिम बढ़ा

भारत में जीएलपी-1 दवाओं की बिना पर्ची बिक्री पर नियामकीय जोखिम बढ़ा
बिना पर्ची जीएलपी-1 खतरा

फोर्ब्स इंडिया की रिपोर्ट के अनुसार, 20 मार्च को भारत में सेमाग्लूटाइड की पेटेंट सुरक्षा समाप्त होने और सस्ते जेनेरिक बाजार में आने के बाद गुरुग्राम, बेंगलुरु, अहमदाबाद और दिल्ली समेत कई शहरों में वजन घटाने वाली जीएलपी-1 दवाएं खुदरा दवा दुकानों पर बिना वैध पर्ची के आसानी से मिल रही हैं. इससे ऐसे उपचार, जो कानूनी तौर पर शेड्यूल एच के तहत केवल पर्ची पर मिलने चाहिए, अब तेज मांग और कमजोर प्रवर्तन के बीच व्यापक दुरुपयोग के जोखिम का सामना कर रहे हैं.

हाइलाइट्स

  • भारत में जीएलपी-1 दवाओं की मांग बढ़ी है, लेकिन पेटेंट समाप्ति के बाद सस्ते जेनेरिक विकल्पों के कारण बिना पर्ची बिक्री में वृद्धि देखी गई है।
  • केंद्रीय औषधि मानक नियंत्रण संगठन और ड्रग कंट्रोलर जनरल ऑफ इंडिया ने बिना पर्ची बिक्री, अप्रत्यक्ष प्रचार और ऑफ-लेबल उपयोग पर सख्ती और निरीक्षण तेज कर दिए हैं।
  • फार्मेसी बाजार में जीएलपी-1 वॉल्यूम बढ़ने के साथ अनुपालन जोखिम, लाइसेंस रद्दीकरण और जुर्माने का दबाव बढ़ रहा है, जिससे उद्योग साख और मरीज सुरक्षा प्रभावित हो सकती है।

सस्ते जेनेरिक आने के बाद बिक्री का पैटर्न बदला

पेटेंट समाप्त होने के बाद कम कीमत वाले कई विकल्प बाजार में आने से इन दवाओं की उपलब्धता तेजी से बढ़ी है. रिपोर्ट में कई केमिस्टों के हवाले से कहा गया है कि ग्राहक अक्सर पहली बार डॉक्टर से पर्ची लेते हैं, लेकिन बाद की खरीद में पर्ची कम ही दिखाई जाती है. इससे मधुमेह और मोटापे के लिए विकसित विशेष उपचार अब तेजी से लाइफस्टाइल उपयोग की दिशा में खिसकते दिख रहे हैं.

नोवो नॉर्डिस्क के विक्रांत श्रोत्रिया ने कहा कि कंपनी जीएलपी-1 दवाओं के बिना पर्ची उपयोग को प्रोत्साहित नहीं करती और फार्मेसियों से स्थानीय कानूनों का पालन करने की अपेक्षा रखती है. उन्होंने कहा कि कंपनी लगातार यह संदेश दोहरा रही है कि दवा केवल चिकित्सकीय सलाह पर और उचित चैनल से ही ली जाए. वहीं ऑल इंडिया ऑर्गनाइजेशन ऑफ केमिस्ट्स एंड ड्रगिस्ट्स के महासचिव राजीव सिंघल ने कहा कि यह ओटीसी दवा नहीं है और संगठन ने बिना पर्ची बिक्री के खिलाफ सर्कुलर जारी किया है.

नियामकीय सख्ती और स्वास्थ्य जोखिम पर चिंता

केंद्रीय औषधि मानक नियंत्रण संगठन और ड्रग कंट्रोलर जनरल ऑफ इंडिया हाल के हफ्तों में यह दोहरा चुके हैं कि जीएलपी-1 दवाएं केवल पर्ची पर मिलने वाली दवाएं हैं और इन्हें विशेषज्ञ चिकित्सकों द्वारा ही लिखा जाना चाहिए. नियामकों ने निर्माताओं के लिए सरोगेट विज्ञापन और अप्रत्यक्ष प्रचार पर रोक संबंधी सलाह भी जारी की है, ताकि कॉस्मेटिक या ऑफ-लेबल उपयोग को बढ़ावा न मिले. इसके साथ खुदरा दवा दुकानों, थोक विक्रेताओं, ऑनलाइन फार्मेसियों और वेलनेस क्लीनिकों पर निरीक्षण भी किए जा रहे हैं.

सरकार ने खुदरा दुकानों और वेलनेस क्लीनिकों के जरिये वजन घटाने वाली दवाओं की मांग पर उपलब्धता को लेकर विशेष चिंता जताई है. बिना निगरानी उपयोग से गंभीर स्वास्थ्य जोखिम पैदा हो सकते हैं, क्योंकि मरीज को खुराक, दुष्प्रभाव और पूर्व रोग इतिहास के आधार पर लगातार चिकित्सकीय आकलन की जरूरत होती है. रिपोर्ट में अहमदाबाद के एक मधुमेह और मोटापा रोगी का उदाहरण दिया गया है, जिसे दवा शुरू करने से पहले कम खुराक, धीरे-धीरे बढ़ोतरी और नियमित जांच की सलाह दी गई थी.

फार्मेसी क्षेत्र और स्वास्थ्य बाजार पर संभावित असर

मांग बढ़ने और कीमतें घटने से भारत के रिटेल फार्मेसी बाजार में जीएलपी-1 श्रेणी का वॉल्यूम बढ़ सकता है, लेकिन अनुपालन जोखिम भी उतनी ही तेजी से बढ़ रहा है. लाइसेंस रद्द होने, जुर्माने और अभियोजन की चेतावनी के कारण दवा दुकानों और वितरकों पर रिकॉर्ड-कीपिंग तथा पर्ची सत्यापन को मजबूत करने का दबाव बन रहा है. यह प्रवृत्ति मोटापा प्रबंधन बाजार के विस्तार का संकेत देती है, लेकिन कमजोर निगरानी रहने पर उद्योग की साख और मरीज सुरक्षा दोनों पर असर पड़ सकता है.

रिपोर्ट में यह भी सामने आता है कि कुछ इलाकों में केमिस्ट वैध पर्ची पर जोर दे रहे हैं, जिससे प्रवर्तन पूरी तरह विफल नहीं दिखता. फिर भी अलग-अलग शहरों में बिक्री व्यवहार का असमान होना बताता है that अनुपालन अभी बिखरा हुआ है और मांग-आधारित वितरण मॉडल नियामकीय ढांचे से आगे निकल रहा है. ऐसे में बाजार के विस्तार के साथ विशेषज्ञ परामर्श, चिकित्सकीय निगरानी और सख्त प्रवर्तन, तीनों की जरूरत एक साथ बढ़ रही है.

हमने पहले Novo Nordisk India द्वारा Ozempic और Wegovy की भारत में कीमतें घटाने के फैसले पर रिपोर्ट किया था, जिसे कंपनी ने सस्ते जेनेरिक विकल्प आने के बीच मरीजों की पहुंच बढ़ाने से जोड़ा था. उस रिपोर्ट में कंपनी की देशव्यापी सप्लाई/वितरण रणनीति और यह रुख भी शामिल था कि जीएलपी-1 दवाओं की बिक्री प्रिस्क्रिप्शन के आधार पर ही होनी चाहिए और बिना पर्ची उपयोग को प्रोत्साहित नहीं किया जाता.

इस सामग्री में तृतीय-पक्ष की राय शामिल हो सकती है, इस वेबपेज पर कोई भी डेटा और जानकारी हमारे अस्वीकरण के अनुसार निवेश सलाह का गठन नहीं करती है। जबकि हम सख्त संपादकीय अखंडता का पालन करते हैं, इस पोस्ट में हमारे भागीदारों के उत्पादों के संदर्भ शामिल हो सकते हैं।