भारत सरकार एथेनॉल उपयोग बढ़ाने के विकल्प तलाशती
खाद्य सचिव संजीव चोपड़ा के अनुसार, सरकार ने पेट्रोलियम, भारी उद्योग और खाद्य मंत्रालयों का एक अंतर-मंत्रालयी पैनल बनाया है, जो देश में उपलब्ध अतिरिक्त एथेनॉल विनिर्माण क्षमता के उपयोग के रास्तों पर विचार कर रहा है। मौजूदा 20% एथेनॉल मिश्रण स्तर से आगे बढ़ने, फ्लेक्स-फ्यूल वाहनों को बढ़ावा देने और अतिरिक्त उत्पादन के लिए नए उपयोग खोजने जैसे विकल्प इस समीक्षा के केंद्र में हैं। यह पहल ऐसे समय में आगे बढ़ रही है जब पश्चिम एशिया युद्ध से तेल आपूर्ति प्रभावित है और ऊर्जा आयात पर दबाव कम करने के उपायों पर जोर है।
हाइलाइट्स
- देश में एथेनॉल विनिर्माण की अतिरिक्त क्षमता 20 अरब लीटर होने के बावजूद फिलहाल पेट्रोल में 20% मिश्रण के लिए सालाना 11-12 अरब लीटर ही खरीदा जाता है।
- 2025-26 में कुल एथेनॉल आवश्यकता का 72% यानी 7.61 अरब लीटर अनाज आधारित स्रोतों (4.78 अरब लीटर मक्का, 2.83 अरब लीटर चावल) से आएगा, जबकि 28% चीनी आधारित है।
- फ्लेक्स-फ्यूल वाहन प्रोत्साहन और एथेनॉल आधारित कुक-स्टोव जैसे नए मांग स्रोत अतिरिक्त क्षमता का इस्तेमाल बढ़ाते हुए ऊर्जा सुरक्षा और कृषि-प्रसंस्करण क्षेत्र को लाभ पहुंचा सकते हैं।
अतिरिक्त क्षमता के उपयोग पर नीति विकल्प
चोपड़ा ने कहा कि उद्योग जगत की ओर से पेट्रोल में एथेनॉल मिश्रण को मौजूदा 20% से बढ़ाने की मांग है। उनके अनुसार, देश में एथेनॉल विनिर्माण की कुल अतिरिक्त क्षमता 20 अरब लीटर है, जबकि तेल विपणन कंपनियां अभी हर साल 20% मिश्रण के लिए 11 से 12 अरब लीटर एथेनॉल खरीदती हैं। उन्होंने संकेत दिया कि अगला एथेनॉल आपूर्ति वर्ष नवंबर से शुरू होने से पहले इस विषय पर कुछ प्रगति की खबर मिल सकती है।
सरकार के अनुसार, एथेनॉल मिश्रण कार्यक्रम शुरू होने के बाद अब तक विदेशी मुद्रा के मोर्चे पर 1.65 लाख करोड़ रुपये की बचत हुई है। पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्रालय भी चीनी और खाद्यान्न प्रसंस्करण उद्योग के साथ अतिरिक्त एथेनॉल क्षमता के समाधान के लिए एक तंत्र तैयार कर रहा है। इसमें एथेनॉल निर्यात को आसान बनाना और पेट्रोल के साथ जैव ईंधन मिश्रण का हिस्सा बढ़ाने के लिए रोडमैप बनाना शामिल है।
फीडस्टॉक मिश्रण और उद्योग संरचना
वर्तमान में देश के लगभग 400 एथेनॉल निर्माताओं में से करीब 250 इकाइयां अनाज आधारित हैं, जिनमें चावल और मक्का प्रमुख हैं, जबकि शेष इकाइयां चीनी आधारित फीडस्टॉक पर चलती हैं। 2025-26 एथेनॉल आपूर्ति वर्ष में कुल आवश्यकता का केवल 28% यानी 2.89 अरब लीटर एथेनॉल चीनी आधारित स्रोतों से आवंटित हुआ है। इसके मुकाबले 72% यानी 7.61 अरब लीटर अनाज आधारित स्रोतों से आया है, जिसमें 4.78 अरब लीटर मक्का से और 2.83 अरब लीटर चावल से है।
यह संरचना बताती है कि एथेनॉल आपूर्ति में अनाज आधारित उत्पादन की भूमिका तेजी से बढ़ रही है। साथ ही, खाद्य मंत्रालय वैकल्पिक कच्चे माल के तौर पर स्वीट सोरघम की व्यवहार्यता का अध्ययन भी कर रहा है, ताकि बायोफ्यूल के लिए कच्चे माल का आधार और विविध हो सके। इससे भविष्य में आपूर्ति जोखिम घटाने और उत्पादन आधार को व्यापक बनाने में मदद मिल सकती है।
ऊर्जा सुरक्षा और नए मांग स्रोत
पश्चिम एशिया में जारी युद्ध से तेल आपूर्ति बाधित होने के बीच एथेनॉल के घरेलू उपयोग को बढ़ाना ऊर्जा सुरक्षा रणनीति का हिस्सा बन रहा है। इस संदर्भ में फ्लेक्स-फ्यूल वाहनों को बढ़ावा देना और पेट्रोल में मिश्रण अनुपात बढ़ाना, दोनों उपाय आयातित ईंधन पर निर्भरता कम कर सकते हैं। इससे कृषि प्रसंस्करण, जैव ईंधन और ऑटोमोबाइल क्षेत्रों के लिए नई मांग भी बन सकती है।
ग्रेन एथेनॉल मैन्युफैक्चरर्स एसोसिएशन ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को भेजे एक पत्र में एलपीजी के पूरक विकल्प के रूप में एथेनॉल आधारित कुक-स्टोव अपनाने का सुझाव दिया है। यह प्रस्ताव घरेलू परिवारों के साथ रेस्तरां, सड़क विक्रेताओं और संस्थागत रसोइयों जैसे व्यावसायिक उपयोगकर्ताओं को भी लक्षित करता है। यदि ऐसे विकल्प नीति समर्थन पाते हैं, तो अतिरिक्त एथेनॉल क्षमता के लिए पेट्रोल मिश्रण से परे एक नया बाजार विकसित हो सकता है।
हमने पहले पश्चिम एशिया में जारी युद्ध और होरमुज जलडमरूमध्य से जुड़े तनाव के बीच कच्चे तेल की कीमतों में उछाल पर रिपोर्ट की थी। उस रिपोर्ट में बताया गया था कि अंतरराष्ट्रीय बाजार में ब्रेंट क्रूड के 110-111 डॉलर प्रति बैरल के आसपास पहुंचने के बावजूद भारत में सामान्य पेट्रोल-डीजल के खुदरा दाम स्थिर रहे, लेकिन लागत दबाव और आगे घरेलू मूल्य नीति व महंगाई पर जोखिम बने हुए हैं।
- Forex
- Crypto