Eli Lilly India GLP-1 प्रतिस्पर्धा के बीच माउंजारो विस्तार पर कायम
फोर्ब्स इंडिया को दिए गए एक साक्षात्कार में Eli Lilly and Company India के अध्यक्ष और महाप्रबंधक विंसलो टकर ने कहा कि भारत में मोटापे और मधुमेह के बड़े अपूर्ण उपचार बाजार ने माउंजारो की तेज मांग को सहारा दिया है, जबकि कंपनी जेनेरिक सेमाग्लूटाइड के प्रवेश को पहुंच बढ़ाने वाला कारक मानती है। उन्होंने कहा कि कंपनी की रणनीति उत्पाद की क्लिनिकल भिन्नता, रोग जागरूकता अभियानों और Apollo, Tata 1mg तथा Cipla जैसी साझेदारियों के जरिए अधिक मरीजों तक पहुंच बनाने पर केंद्रित है।
हाइलाइट्स
- Eli Lilly Cipla के साथ साझेदारी कर रही है, जिससे टिरजेपाटाइड (Yurpeak) की भारतीय बाजार में वितरण और भौगोलिक पहुंच छोटे कस्बों तक विस्तारित होगी।
- कंपनी अगले कई वर्षों में भारत में 1 अरब डॉलर से अधिक का निवेश कॉन्ट्रैक्ट मैन्युफैक्चरिंग, सप्लाई चेन और मैन्युफैक्चरिंग क्वालिटी हब के लिए करेगी।
- Eli Lilly भारत में GLP-1, कार्डियो-मेटाबोलिक, ऑन्कोलॉजी और अल्जाइमर क्षेत्रों के लिए 11 से अधिक जांचाधीन उत्पादों और एक ओरल GLP-1 दवा पर कार्य कर रही है।
भारत में मांग, पहुंच और उत्पाद रणनीति
टकर के अनुसार, भारत Eli Lilly के लिए पहले से एक महत्वपूर्ण बाजार है, जहां कंपनी की उपस्थिति मधुमेह और ऑन्कोलॉजी जैसे क्षेत्रों में रही है। उन्होंने कहा कि टिरजेपाटाइड का लॉन्च केवल मूल्य निर्धारण का निर्णय नहीं था, बल्कि ऐसे मरीजों तक पहुंचने का प्रयास था जिनमें मोटापा और टाइप 2 मधुमेह का बोझ बहुत बड़ा है। कंपनी की 'वन इंडिया' रणनीति भी भारत को वैश्विक स्तर पर एक रणनीतिक बाजार के रूप में देखती है।
कंपनी का कहना है कि टिरजेपाटाइड की वृद्धि उसके ड्यूल GLP-1 और GIP तंत्र, क्लिनिकल प्रभावशीलता और रोग जागरूकता प्रयासों से जुड़ी है। टकर ने साक्षात्कार में SURMOUNT 5 और SURPASS 2 जैसे अध्ययनों का हवाला देते हुए वजन घटाने और HbA1c कमी में दवा की भिन्नता पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि शुरुआती अपनाने के इस चरण में चिकित्सकों और मरीजों का अनुभव बढ़ने के साथ स्वीकार्यता भी बढ़ती है।
Cipla के साथ साझेदारी को कंपनी दूसरे और छोटे शहरों तक वितरण बढ़ाने के कदम के रूप में पेश करती है। टकर ने कहा कि Yurpeak नाम से टिरजेपाटाइड का दूसरा ब्रांड Lilly ही बनाती और आयात करती है, जबकि Cipla उसे समान कीमत पर बेचेगी। उनके मुताबिक, इस व्यवस्था का उद्देश्य मूल्य घटाना नहीं, बल्कि व्यापक भौगोलिक पहुंच के जरिए संभावित लाभार्थी मरीजों की संख्या बढ़ाना है।
जेनेरिक प्रतिस्पर्धा और भारतीय बाजार पर असर
Eli Lilly का कहना है कि जेनेरिक सेमाग्लूटाइड के आने से वह प्रतिस्पर्धा को नकारात्मक रूप में नहीं देखती, क्योंकि बाजार में अपूर्ण जरूरत बहुत बड़ी है। टकर ने कहा कि चिकित्सकों के पास अधिक विकल्प होना कई उपचार श्रेणियों में सामान्य बात है, और कंपनी का ध्यान इस पर है कि टिरजेपाटाइड उपयुक्त मरीजों के लिए क्या अतिरिक्त मूल्य देता है। साथ ही उन्होंने यह भी स्वीकार किया कि बाजार हिस्सेदारी को लेकर चिंता पूरी तरह समाप्त नहीं होती।
मरीजों के बीच दुष्प्रभावों को लेकर हिचकिचाहट को कंपनी अभी भी जागरूकता की चुनौती मानती है। टकर के अनुसार, मोटापे को एक दीर्घकालिक और प्रबंधनीय बीमारी के रूप में समझाना, और उससे जुड़ी सह-रुग्णताओं पर जोर देना, अपनाने की रफ्तार बढ़ाने के लिए जरूरी है। उनका कहना है कि भारत अभी मोटापा प्रबंधन दवाओं के शुरुआती अपनाने के चरण में है।
नियामकीय मोर्चे पर उन्होंने भारत को एक विकसित होते ढांचे वाला बाजार बताया, जहां कंपनी सरकार के साथ मिलकर बदलावों को समझने और अनुपालन सुनिश्चित करने पर काम करती है। यह रुख संकेत देता है कि GLP-1 श्रेणी में दीर्घकालिक विस्तार केवल मांग पर नहीं, बल्कि नियामकीय स्पष्टता और चिकित्सकीय स्वीकृति पर भी निर्भर करता है।
भारत निवेश, आपूर्ति श्रृंखला और व्यापक पोर्टफोलियो
टकर ने कहा कि भारत में Eli Lilly की भूमिका केवल बिक्री बाजार तक सीमित नहीं है, बल्कि वैश्विक परिचालन और नवाचार क्षमताओं तक फैली है। बेंगलुरु में 2016 से संचालित ग्लोबल कैपेबिलिटी सेंटर में लगभग 3,500 कर्मचारी हैं, और कंपनी के अनुसार उसकी वैश्विक कार्यबल का करीब 10 प्रतिशत अब भारत में है। हैदराबाद में अगस्त 2025 में शुरू की गई टेक एंड इनोवेशन साइट प्रौद्योगिकी, ऑटोमेशन, क्लाउड, डेटा और सॉफ्टवेयर इंजीनियरिंग पर केंद्रित है।
उन्होंने कहा कि अगले कई वर्षों में 1 अरब डॉलर से अधिक का निवेश मुख्य रूप से कॉन्ट्रैक्ट मैन्युफैक्चरिंग विस्तार और भारत में मैन्युफैक्चरिंग एंड क्वालिटी टेक्निकल हब स्थापित करने पर केंद्रित है। यह निवेश सीधे नए उपचारों के लॉन्च बजट के रूप में नहीं, बल्कि आपूर्ति श्रृंखला और उत्पादन क्षमताओं को मजबूत करने के लिए है। कंपनी इसे भारत के प्रति दीर्घकालिक रणनीतिक प्रतिबद्धता के रूप में पेश करती है।
वहीं, उत्पाद पोर्टफोलियो के स्तर पर Eli Lilly भारत में कार्डियो-मेटाबोलिक, ऑन्कोलॉजी और अल्जाइमर जैसे क्षेत्रों के अवसर देखती है। टकर ने कहा कि कंपनी के पास 11 से अधिक जांचाधीन कार्डियो-मेटाबोलिक उत्पाद हैं और एक ओरल GLP-1 दवा भी विकासाधीन है, जो स्वीकृति मिलने पर इंजेक्शन के विकल्प चाहने वाले मरीजों के लिए उपयोगी हो सकती है। उन्होंने ऑन्कोलॉजी और अल्जाइमर उपचारों को भी भारत की अपूर्ण जरूरतों से जुड़ा संभावित अवसर बताया।
हमने पहले भारत में सेमाग्लूटाइड पेटेंट समाप्ति के बाद वजन घटाने वाली दवाओं के बाजार में तेज प्रतिस्पर्धा और कीमतों में गिरावट पर रिपोर्ट किया था। उस रिपोर्ट में 15+ भारतीय कंपनियों द्वारा जेनेरिक लॉन्च, वितरण व डिवाइस/मूल्य रणनीतियों की दौड़, और गैर-चिकित्सकीय उपयोग व नियामकीय निगरानी जैसे जोखिमों को रेखांकित किया गया था।
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