भारत का स्मार्टफोन बाजार 2025 के उत्तरार्ध से चली आ रही चिप कमी के बीच अब पश्चिम एशिया संकट से बढ़ी आपूर्ति बाधाओं और महंगे घटकों का सामना कर रहा है। इससे शिपमेंट अनुमान घट रहे हैं, एंट्री-लेवल फोन सबसे अधिक दबाव में हैं और 2026 में कई ब्रांडों के लिए कारोबारी जोखिम बढ़ रहा है।
हाइलाइट्स
- Counterpoint, Omdia और IDC ने भारत के स्मार्टफोन शिपमेंट 2026 के अनुमान को 3–13 मिलियन कम किया है, प्रमुख वजह लागत वृद्धि और सप्लाई चेन अनिश्चितता हैं।
- NAND और DRAM चिप कीमतों में 40–50 प्रतिशत, बुनियादी कंपोनेंट लागत में 1.5–2 गुना, और प्रमुख ब्रांड फोन कीमतों में 32–53 प्रतिशत तक की वृद्धि दर्ज की गई है।
- Apple को छोड़कर 2025 H2 से कोई ब्रांड बाजार में मजबूत प्रदर्शन नहीं कर सका, जबकि Xiaomi 2025 में नंबर 1 से पाँचवें स्थान पर खिसक गया है।
शिपमेंट अनुमान और कीमतों पर दबाव
Forbes India की रिपोर्ट के अनुसार, भारत में स्मार्टफोन क्षेत्र पर दबाव कई मोर्चों से बढ़ रहा है, जिसमें चिप की कमी, मेमोरी कीमतों में तेज उछाल और पश्चिम एशिया से जुड़े लॉजिस्टिक्स व्यवधान शामिल हैं। CMR के वाइस प्रेसिडेंट, इंडस्ट्री रिसर्च ग्रुप, प्रभु राम का कहना है कि होर्मुज जलडमरूमध्य के आसपास तनाव और खाड़ी के प्रमुख ट्रांजिट कॉरिडोर में हवाई क्षेत्र बाधाओं ने इलेक्ट्रॉनिक्स आपूर्ति श्रृंखला में नई अनिश्चितता पैदा की है, जिससे निर्यात और कंपोनेंट उपलब्धता दोनों प्रभावित हो रहे हैं।
Counterpoint Research के अनुसार शिपमेंट में सालाना आधार पर 9 प्रतिशत गिरावट दिख रही है। Counterpoint ने 2026 के लिए अपना अनुमान 142 मिलियन इकाइयों से घटाकर 139 मिलियन किया है, जबकि Omdia ने इसे 148 मिलियन से घटाकर 142-145 मिलियन किया है। IDC का अनुमान है कि शिपमेंट पिछले साल के 152 मिलियन से गिरकर 132 मिलियन इकाइयों तक आ सकता है।
Counterpoint के तरुण पाठक के अनुसार अनुमान घटने के दो प्रमुख कारण हैं, पहला मेमोरी चिप लागत में तेज बढ़ोतरी और दूसरा जारी भू-राजनीतिक संघर्ष से पैदा अनिश्चितता। उन्होंने कहा कि NAND और DRAM की कीमतें 40-50 प्रतिशत बढ़ी हैं, जबकि एंट्री-टियर, यानी 15,000 रुपये से कम कीमत वाले खंड की हिस्सेदारी Q12026 में 33 प्रतिशत रह गई, जो Q32025 में 41 प्रतिशत थी। इसके उलट 15,000 से 30,000 रुपये वाले खंड की हिस्सेदारी 35 प्रतिशत से बढ़कर 45 प्रतिशत हो गई।
खुदरा बाजार और ब्रांडों पर असर
The All India Mobile Retailers Association के आंकड़ों के अनुसार Realme फोन में सबसे तेज, लगभग 53 प्रतिशत, मूल्य वृद्धि हुई है। Vivo, Oppo और Xiaomi उत्पादों की कीमतें क्रमशः 40 प्रतिशत, 41 प्रतिशत और 32 प्रतिशत बढ़ी हैं। एसोसिएशन के संस्थापक और चेयरमैन कैलाश लखयानी का कहना है कि अप्रैल-जून तिमाही इन ब्रांडों के लिए सबसे कठिन रह सकती है, और प्रमुख ब्रांडों के एंट्री-लेवल फोन 20,000 रुपये से शुरू हो सकते हैं।
EY India के मार्केट्स एंड टेलीकॉम लीडर प्रशांत सिंघल के मुताबिक बीते एक वर्ष में कंपोनेंट लागत 1.5 से 2 गुना तक बढ़ी है, जिसमें RAM और चिपसेट की कीमतें 60-70 प्रतिशत ऊपर गई हैं। उनका कहना है कि AI-आधारित मांग और डेटा सेंटर निवेश ने पहले दबाव बनाया, जबकि युद्ध ने खासकर पश्चिम एशिया पर निर्भर मार्गों के लिए लॉजिस्टिक्स लागत और बढ़ा दी है। दिल्ली के कुछ खुदरा स्टोरों में कर्मचारियों ने यह भी कहा कि स्मार्टफोन के साथ लैपटॉप की कीमतें भी बढ़ी हैं और कुछ कंपनियां भौतिक रिटेल नेटवर्क की लागत घटाने के लिए ऑनलाइन बिक्री की ओर झुक रही हैं।
विशेषज्ञों का कहना है कि निकट अवधि में राहत की संभावना सीमित है और जुलाई-सितंबर तिमाही भी कठिन रह सकती है। विश्लेषकों ने Apple की तरह उत्पादन का स्थानीयकरण या विविधीकरण बढ़ाने की सलाह दी है, ताकि आपूर्ति जोखिम कम हो सके। CMR के प्रभु राम के अनुसार पिछले 12-18 महीनों में भारत का स्मार्टफोन बाजार मांग-आधारित से हटकर भू-राजनीति और आपूर्ति श्रृंखला प्रबंधन से संचालित बाजार बन गया है, इसलिए ब्रांडों को विविध स्रोतों और अधिक टिकाऊ लॉजिस्टिक्स पर ध्यान देना होगा।
उद्योग पर दबाव का असर वैश्विक प्रतिस्पर्धा में भी दिख रहा है। Apple को छोड़कर 2025 की दूसरी छमाही से कोई ब्रांड मजबूत छाप नहीं छोड़ पाया है। Samsung ने दिसंबर में Galaxy Z TriFold पेश किया, लेकिन ऊंची इनपुट लागत के कारण पहली खेप बिकने के बाद उसका वैश्विक रीस्टॉक नहीं कर रहा। Asus ने भी AI हार्डवेयर पर ध्यान केंद्रित करने के लिए Zenfone और ROG श्रृंखला का उत्पादन बंद कर दिया। IDC के आंकड़ों के अनुसार Xiaomi 2025 में नंबर 1 से फिसलकर नंबर 5 पर पहुंच गया, जबकि लखयानी का कहना है कि 2026 कुछ ब्रांडों, खासकर छोटे खिलाड़ियों, के लिए सबसे चुनौतीपूर्ण वर्ष बन सकता है।
हमारी पिछली रिपोर्ट में पश्चिम एशिया संकट और बढ़ती कमोडिटी लागत के बीच भारतीय वाहन उद्योग के FY26 परिदृश्य पर पड़ रहे असर पर चर्चा की गई थी। उसमें सियाम के आंकड़ों के आधार पर मार्च 2026 में उत्पादन-बिक्री के मजबूत रहने के बावजूद, इनपुट लागत और सप्लाई चेन जोखिम के चलते आने वाले हफ्तों में वाहन कीमतें बढ़ने की संभावना और कमजोर मानसून से ग्रामीण मांग पर पड़ने वाले संभावित प्रभाव को रेखांकित किया गया था।
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