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लेकिन हमने सब कुछ सहेज लिया 🙂.
भारत के केरल राज्य के त्रिशूर में फसल कटाई के बाद धान के खेतों में हज़ारों बतखों का विचरण एक पारंपरिक और पर्यावरण-अनुकूल कृषि पद्धति का उदाहरण है।
यह परंपरा न केवल मिट्टी की सफ़ाई में सहायक है, बल्कि प्राकृतिक रूप से इसकी उर्वरता भी बढ़ाती है। उद्योगपति Harsh Mariwala ने इस पद्धति को भारतीय कृषि में सतत विकास और पर्यावरणीय लाभ हेतु महत्वपूर्ण बताया। कृषि विशेषज्ञों के अनुसार, ऐसे जैविक तरीके किसानों की आय में वृद्धि और भूमि के दीर्घकालीन स्वास्थ्य की दिशा में सकारात्मक कदम हैं।
इस पारंपरिक कृषि पद्धति की सफलता में नेतृत्व, संस्कृति और नवाचार की भूमिका को नज़रअंदाज़ नहीं किया जा सकता, जैसा कि Harsh Mariwala द्वारा संगठनात्मक उत्कृष्टता पर केंद्रित हमारे हालिया विश्लेषण में स्पष्ट किया गया था। स्थिरता और प्रगतिशील सोच कृषि से लेकर अन्य क्षेत्रों तक, भारतीय उद्योग के विविध क्षेत्रों में परिवर्तनकारी परिणाम उत्पन्न कर रही है।