RBI ने महाराजगंज के नगर सहकारी बैंक पर 14.25 लाख रुपये का जुर्माना लगाया
भारतीय बैंकिंग नियमन के अनुपालन पर सख्ती के बीच Reserve Bank of India ने उत्तर प्रदेश के महाराजगंज स्थित नगर सहकारी बैंक लिमिटेड पर 14.25 लाख रुपये का मौद्रिक दंड लगाया है। यह कार्रवाई 31 मार्च 2025 की वित्तीय स्थिति के संदर्भ में की गई वैधानिक जांच के बाद सामने आई अनुपालना कमियों से जुड़ी है।
हाइलाइट्स
- RBI ने 26 मई 2026 के आदेश के तहत नगर सहकारी बैंक महाराजगंज पर 14.25 लाख रुपये का जुर्माना लगाकर नियामकीय निर्देशों के उल्लंघन की पुष्टि की।
- बैंक ने NPA की पहचान, वर्गीकरण, असुरक्षित अग्रिम सीमा, ऋण सूचना रिपोर्टिंग और अनुमोदन प्रक्रियाओं में गंभीर नियामकीय खामियां बरतीं।
- यह कार्रवाई उत्तर प्रदेश सहित सहकारी बैंकों के परिसंपत्ति वर्गीकरण और ऋण प्रबंधन मानकों पर सख्त नियामकीय हस्तक्षेप का संकेत देती है।
जांच के निष्कर्ष और दंड का आधार
RBI की प्रेस विज्ञप्ति के अनुसार, 26 मई 2026 के आदेश के तहत यह दंड ‘Income Recognition, Asset Classification and Provisioning and Other Related Matters’, ‘Exposure Norms and Statutory / Other Restrictions’, ‘Membership of Credit Information Companies (CICs)’ और ‘Management of Advances’ से जुड़े निर्देशों के उल्लंघन पर लगाया गया है। केंद्रीय बैंक ने यह कार्रवाई Banking Regulation Act, 1949 और Credit Information Companies (Regulation) Act, 2005 के प्रावधानों के तहत की है।
वैधानिक निरीक्षण में RBI ने पाया कि बैंक ने कुछ उधारकर्ताओं की ऋण सुविधाओं को गैर-निष्पादित परिसंपत्ति, यानी NPA, के रूप में वर्गीकृत नहीं किया, कुछ NPA का सही वर्गीकरण नहीं किया और NPA की लगातार पहचान भी नहीं की। इसके अलावा बैंक ने असुरक्षित अग्रिमों पर निर्धारित नियामकीय सीमा का उल्लंघन किया, अपने उधारकर्ताओं की ऋण सूचना Credit Information Companies को अपलोड नहीं की और कुछ ऋण स्वीकृतियों में कमियों से बचने के लिए उपयुक्त सावधानियां नहीं बरतीं।
RBI ने बैंक को कारण बताओ नोटिस जारी किया था और उसके जवाब तथा व्यक्तिगत सुनवाई में दिए गए मौखिक प्रस्तुतिकरण पर विचार करने के बाद इन आरोपों को कायम माना। केंद्रीय बैंक ने स्पष्ट किया कि यह दंड नियामकीय अनुपालना में कमियों पर आधारित है, न कि बैंक और उसके ग्राहकों के बीच किसी लेनदेन या समझौते की वैधता पर निर्णय है।
सहकारी बैंकिंग क्षेत्र पर नियामकीय असर
यह कदम संकेत देता है कि सहकारी बैंकों के लिए परिसंपत्ति वर्गीकरण, क्रेडिट रिपोर्टिंग और ऋण प्रबंधन से जुड़े मानकों का पालन नियामक प्राथमिकता बना हुआ है। ऐसे मामलों में मौद्रिक दंड केवल वित्तीय दंड नहीं होता, बल्कि जोखिम नियंत्रण, लेखांकन अनुशासन और उधार निगरानी प्रक्रियाओं को मजबूत करने का दबाव भी बनाता है।RBI ने यह भी कहा कि मौद्रिक दंड लगाना उसके द्वारा आगे की अन्य कार्रवाई शुरू करने के अधिकार को प्रभावित नहीं करता। इससे उत्तर प्रदेश सहित सहकारी बैंकिंग क्षेत्र के लिए यह संदेश जाता है कि पर्यवेक्षी जांच में पाई गई कमियां पूंजी, ऋण गुणवत्ता और सूचना साझाकरण से जुड़े अनुपालन मानकों पर सीधे नियामकीय हस्तक्षेप को जन्म दे सकती हैं।
हमारी पिछली रिपोर्ट में RBI की मौद्रिक नीति समिति (MPC) की बैठक और 5 जून को आने वाले नीतिगत फैसले के संदर्भ में मुद्रास्फीति, कच्चे तेल की कीमतों, कमजोर रुपये और मानसून जोखिम जैसे प्रमुख कारकों पर चर्चा की गई थी। इसमें बाजार की अपेक्षाओं के साथ यह भी बताया गया था कि रेपो दर 5.25% पर स्थिर रहने की संभावना अधिक मानी जा रही है, जबकि बाहरी जोखिम बढ़ने से आगे दरों पर दबाव बन सकता है।
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