भारत सरकार 30,000 करोड़ रुपये की प्रतिभूति स्विच नीलामी लाएगी

भारत सरकार 30,000 करोड़ रुपये की प्रतिभूति स्विच नीलामी लाएगी
सरकारी स्विच नीलामी योजना

भारत सरकार 20 जुलाई 2026 को 30,000 करोड़ रुपये के कुल अंकित मूल्य वाली सरकारी प्रतिभूतियों के रूपांतरण, स्विच के लिए नीलामी आयोजित करेगी। इस प्रक्रिया के तहत 2027 से 2030 के बीच परिपक्व होने वाली कई प्रतिभूतियों को 2034 से 2039 अवधि वाली प्रतिभूतियों में बदला जाएगा, जिससे ऋण परिपक्वता प्रोफाइल के प्रबंधन में मदद मिलेगी।

हाइलाइट्स

  • भारत सरकार 30,000 करोड़ रुपये की बहु-मूल्य प्रतिभूति स्विच नीलामी 20 जुलाई 2026 को e-Kuber मंच पर आयोजित करेगी।
  • नीलामी में 6.79% GS 2027 जैसी स्रोत प्रतिभूतियां स्विच कर 6.19% GS 2034 सहित गंतव्य प्रतिभूतियां दी जाएंगी, न्यूनतम बोली आकार 10,000 रुपये है।
  • इस स्विच से सरकार निकट अवधि के कर्ज को लंबी अवधि में रोलओवर कर ऋण प्रबंधन सुधारेगी, जबकि निपटान नकदी-तटस्थ रहेगा।

नीलामी की रूपरेखा और समयसीमा

RBI की प्रेस विज्ञप्ति के अनुसार, यह बहु-मूल्य आधारित नीलामी 20 जुलाई 2026, सोमवार को e-Kuber मंच पर सुबह 10:30 बजे से 11:30 बजे तक आयोजित होगी। नीलामी का परिणाम उसी दिन घोषित किया जाएगा और निपटान 21 जुलाई 2026, मंगलवार को होगा।

सूचित स्विच में 6.79% GS 2027, 6.64% GS 2027, 7.17% GS 2028, 7.06% GS 2028, 8.60% GS 2028, 7.37% GS 2028, 7.10% GS 2029 और 7.88% GS 2030 जैसी स्रोत प्रतिभूतियां शामिल हैं। इनके बदले 6.19% GS 2034, 7.50% GS 2034, 7.10% GS 2034, 6.64% GS 2035, 6.67% GS 2035 और 7.62% GS 2039 जैसी गंतव्य प्रतिभूतियां दी जाएंगी।

सरकार ने कहा है कि वह अधिसूचित राशि से कम बोलियां स्वीकार करने, राउंडिंग के प्रभाव के कारण मामूली अधिक खरीद करने, या किसी भी अथवा सभी बोलियों को पूर्ण या आंशिक रूप से बिना कारण बताए स्वीकार या अस्वीकार करने का अधिकार सुरक्षित रखती है।

बाजार भागीदारी और ऋण प्रबंधन पर असर

बाजार सहभागियों को e-Kuber की कोर बैंकिंग प्रणाली में स्रोत प्रतिभूति की राशि और स्रोत तथा गंतव्य प्रतिभूतियों के मूल्य, दोनों को भारतीय रुपये में दो दशमलव तक दर्ज कर बोलियां देनी होंगी। स्रोत प्रतिभूति का उद्धृत मूल्य पिछले कार्यदिवस के FBIL समापन मूल्य के बराबर होना जरूरी है, अन्यथा बोली खारिज हो जाएगी।

न्यूनतम बोली आकार 10,000 रुपये रखा गया है और इसके बाद 10,000 रुपये के गुणकों में बोली लगाई जा सकेगी। सफल बोलियां अपने-अपने उद्धृत मूल्यों पर स्वीकार होंगी, जबकि कट-ऑफ गंतव्य प्रतिभूतियों के मूल्य के आधार पर तय होगा और कट-ऑफ पर एक से अधिक सफल बोलियां होने पर प्रो-राटा आवंटन का प्रावधान रहेगा।

यह स्विच व्यवस्था सरकार को निकट अवधि में परिपक्व होने वाले कर्ज को लंबी अवधि की प्रतिभूतियों में स्थानांतरित करने का साधन देती है। यद्यपि रूपांतरण व्यापक रूप से नकदी-तटस्थ बताया गया है, फिर भी प्रत्येक बोली पर शुद्ध अर्जित ब्याज और राउंडिंग से उत्पन्न नकद समायोजन के आधार पर निधि निपटान किया जाएगा।

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