भारत के अनुसूचित बैंकों की देनदारियां और ऋण 30 जून पर बढ़े
भारत के बैंकिंग तंत्र में 30 जून 2026 तक जमा और ऋण दोनों ऊंचे स्तर पर पहुंचते हैं, जबकि बैंकों की भारतीय रिजर्व बैंक से उधारी में तेज बढ़ोतरी दिखती है। यह रुझान बताता है कि वित्तीय प्रणाली में तरलता, फंडिंग संरचना और क्रेडिट प्रवाह जून मध्य की तुलना में भी बदल रहे हैं।
हाइलाइट्स
- सभी अनुसूचित बैंकों की कुल जमा देनदारियां 15 जून 2026 के 26386233.55 करोड़ रुपये से बढ़कर 30 जून 2026 को 27079983.13 करोड़ रुपये हो गई हैं।
- सभी अनुसूचित बैंकों का बैंक ऋण 22059295.52 करोड़ रुपये से बढ़कर 22441492.22 करोड़ रुपये और भारतीय रिजर्व बैंक से उधारी 32882.00 करोड़ रुपये से बढ़कर 147049.00 करोड़ रुपये हो गई है।
- बैंकों की अन्य बैंकों से उधारी घटकर 72244.34 करोड़ रुपये से 60331.54 करोड़ रुपये रह गई, जबकि जमा आधार फंडिंग में प्रमुख बना रहा।
30 जून 2026 की बैंकिंग स्थिति
भारतीय रिजर्व बैंक की प्रेस विज्ञप्ति 2026-2027/674 के अनुसार, सभी अनुसूचित बैंकों की अन्य पक्षों के प्रति जमा देनदारियां 15 जून 2026 के 26386233.55 करोड़ रुपये से बढ़कर 30 जून 2026 को 27079983.13 करोड़ रुपये हो जाती हैं। इनमें मांग जमा 3249742.88 करोड़ रुपये से बढ़कर 3595930.10 करोड़ रुपये और सावधि जमा 23136490.66 करोड़ रुपये से बढ़कर 23484053.03 करोड़ रुपये पर पहुंचती हैं।इसी अवधि में सभी अनुसूचित बैंकों का बैंक ऋण 22059295.52 करोड़ रुपये से बढ़कर 22441492.22 करोड़ रुपये हो जाता है। इसमें ऋण, नकद ऋण और ओवरड्राफ्ट 21622515.31 करोड़ रुपये से बढ़कर 21993004.47 करोड़ रुपये पर पहुंचते हैं, जबकि अंतर्देशीय बिल डिस्काउंटिंग और खरीदे गए बिलों में भी बढ़ोतरी दर्ज होती है।
बैंकों की भारतीय रिजर्व बैंक से उधारी 15 जून 2026 के 32882.00 करोड़ रुपये से बढ़कर 30 जून 2026 को 147049.00 करोड़ रुपये हो जाती है। दूसरी ओर, रिजर्व बैंक के पास शेष राशि 770033.48 करोड़ रुपये से बढ़कर 803751.65 करोड़ रुपये पर पहुंचती है, जबकि नकदी 79186.56 करोड़ रुपये से बढ़कर 85510.55 करोड़ रुपये हो जाती है।
निवेश पुस्तकीय मूल्य पर 7251979.14 करोड़ रुपये से बढ़कर 7264468.76 करोड़ रुपये तक पहुंचते हैं। इनमें केंद्र और राज्य सरकार की प्रतिभूतियां सबसे बड़ा हिस्सा बनी रहती हैं, जो 7240340.30 करोड़ रुपये से बढ़कर 7253047.80 करोड़ रुपये होती हैं।
तरलता, फंडिंग और क्षेत्रीय संकेत
आंकड़े यह भी दिखाते हैं कि बैंकों की अन्य बैंकों से उधारी 72244.34 करोड़ रुपये से घटकर 60331.54 करोड़ रुपये पर आ जाती है, जबकि बैंकिंग तंत्र के प्रति मांग और सावधि देनदारियां 415993.93 करोड़ रुपये से बढ़कर 450668.96 करोड़ रुपये हो जाती हैं। इससे संकेत मिलता है कि फंडिंग मिश्रण में अंतर-बैंक स्रोतों की तुलना में जमा आधार का महत्व अधिक बना रहता है।फूड क्रेडिट बकाया अनुसूचित वाणिज्यिक बैंकों में 15 जून 2026 के 133894.60 करोड़ रुपये से मामूली घटकर 30 जून 2026 को 132049.25 करोड़ रुपये रह जाता है, जबकि अनुसूचित सहकारी बैंकों में यह 52074.00 करोड़ रुपये पर स्थिर रहता है। यह दर्शाता है कि कुल ऋण वृद्धि के बीच खाद्य खरीद एजेंसियों से जुड़ा ऋण अपेक्षाकृत स्थिर रहता है।
प्रेस विज्ञप्ति के अनुसार, चालू पखवाड़े में 120 अनुसूचित वाणिज्यिक बैंक, 26 अनुसूचित राज्य सहकारी बैंक और 55 अनुसूचित प्राथमिक शहरी सहकारी बैंक इस गणना में शामिल हैं। तुलनात्मक पिछले वर्ष के आंकड़े 27 जून 2025 की संबंधित रिपोर्टिंग शुक्रवार अवधि से जुड़े हैं, क्योंकि पुरानी पखवाड़ा परिभाषा नवंबर 30, 2026 तक लागू रहती है।
हमारी पिछली रिपोर्ट में जून 2026 के भारत के वस्तु व्यापार घाटे के पांच महीने के उच्च स्तर पर पहुंचने और आयात वृद्धि के निर्यात से तेज रहने पर चर्चा की गई थी। इसमें ऊंची कमोडिटी कीमतों के बीच Q1 FY2027 में चालू खाते का घाटा जीडीपी के लगभग 1.5% तक बढ़ने के अनुमान को बाहरी क्षेत्र पर बढ़ते दबाव के संकेत के रूप में रखा गया था।
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