RBI की 6.94% GS 2036 नीलामी में 34,000 करोड़ रुपये जुटाने की प्रक्रिया पूरी
भारतीय सरकारी प्रतिभूति बाजार में 6.94% GS 2036 की नीलामी के जरिए 34,000 करोड़ रुपये के उधार कार्यक्रम का एक चरण पूरा होता है। इस निर्गम के लिए 73,726.259 करोड़ रुपये की प्रतिस्पर्धी बोलियां मिलीं, जो जारी राशि के मुकाबले मजबूत निवेशक मांग दिखाती हैं।
हाइलाइट्स
- भारतीय रिजर्व बैंक ने 6.94% GS 2036 की नीलामी में 34,000 करोड़ रुपये जुटाए, जिसमें कट-ऑफ मूल्य 99.79 और प्रतिफल 6.9686% रहा।
- 382 प्रतिस्पर्धी बोलियों में से 177 बोलियां 33,941.971 करोड़ रुपये की स्वीकार हुईं, जबकि भारित औसत प्रतिफल 6.9644% और औसत मूल्य 99.82 रहा।
- नीलामी में मांग अधिसूचित राशि से अधिक रही, जिससे प्राथमिक डीलरों पर कोई डिवॉल्वमेंट नहीं हुआ और निवेशक भागीदारी मजबूत रही।
नीलामी के परिणाम और मूल्य निर्धारण
Reserve Bank of India की प्रेस विज्ञप्ति 2026-2027/390 के अनुसार, 6.94% GS 2036 के लिए अधिसूचित राशि 34,000 करोड़ रुपये रही। इस निर्गम में 382 प्रतिस्पर्धी बोलियां 73,726.259 करोड़ रुपये की प्राप्त हुईं और कट-ऑफ मूल्य 99.79 तय हुआ, जिस पर प्रतिफल 6.9686% रहा।RBI ने 177 प्रतिस्पर्धी बोलियां 33,941.971 करोड़ रुपये की स्वीकार कीं। 29 बोलियों पर 67.9515% का आंशिक आवंटन हुआ, जबकि भारित औसत मूल्य 99.82 और भारित औसत प्रतिफल 6.9644% दर्ज हुआ।
गैर-प्रतिस्पर्धी श्रेणी में 8 बोलियां 58.029 करोड़ रुपये की मिलीं और पूरी तरह स्वीकार की गईं। इससे कुल स्वीकृत राशि अधिसूचित आकार के अनुरूप रही।
बाजार मांग और प्राथमिक डीलरों पर असर
नीलामी के आंकड़े संकेत देते हैं कि इस सरकारी प्रतिभूति के लिए मांग अधिसूचित राशि से काफी अधिक रही, जिससे दीर्घावधि सरकारी उधारी के प्रति निवेशकों की रुचि स्पष्ट होती है। मजबूत बोली कवरेज आम तौर पर उधारी कार्यक्रम के सुचारु क्रियान्वयन और बाजार में मूल्य खोज की स्थिरता के लिए सहायक माना जाता है।अंडरराइटिंग के लिए अधिसूचित 34,000 करोड़ रुपये की पूरी राशि प्राथमिक डीलरों से स्वीकार की गई। प्राथमिक डीलरों पर कोई डिवॉल्वमेंट नहीं हुआ, जिससे यह संकेत मिलता है कि नीलामी में निवेशक भागीदारी पर्याप्त रही और शेष प्रतिभूतियां डीलरों पर नहीं डाली गईं।
हमारे पिछले लेख में RBI की जून मौद्रिक नीति समीक्षा के संदर्भ में बताया गया था कि कच्चे तेल की कीमतों में उछाल, रुपये की कमजोरी और मानसून संबंधी चिंताएं बाजार की धारणा को प्रभावित कर रही थीं। उस रिपोर्ट में निवेशकों का फोकस नीतिगत दर के साथ-साथ महंगाई, वृद्धि और तरलता पर केंद्रीय बैंक के संकेतों पर रहने की बात कही गई थी, जिनका असर बांड और मुद्रा बाजारों की अल्पकालिक दिशा पर पड़ सकता है।
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