RBI ने Canara Bank पर KYC और निष्क्रिय खातों के उल्लंघन पर जुर्माना लगाया

RBI ने Canara Bank पर KYC और निष्क्रिय खातों के उल्लंघन पर जुर्माना लगाया
RBI ने Canara Bank पर जुर्माना

भारतीय बैंकिंग नियमन पर निगरानी कड़ी करते हुए Reserve Bank of India ने Canara Bank पर 41.80 लाख रुपये का मौद्रिक जुर्माना लगाया है। यह कार्रवाई 31 मार्च 2025 की वित्तीय स्थिति के संदर्भ में किए गए पर्यवेक्षी मूल्यांकन के बाद सामने आई नियामकीय कमियों से जुड़ी है।

हाइलाइट्स

  • RBI ने 5 जून 2026 को Canara Bank पर KYC और निष्क्रिय खातों संबंधी नियमों के उल्लंघन के लिए मौद्रिक जुर्माना लगाया।
  • Statutory Inspection for Supervisory Evaluation, ISE 2025 के दौरान पाया गया कि बैंक ने CKYCR पर KYC रिकॉर्ड समयसीमा के भीतर अपलोड नहीं किए और कुछ सक्रिय खातों को गलत रूप से निष्क्रिय वर्गीकृत किया।
  • RBI ने स्पष्ट किया कि यह कार्रवाई केवल अनुपालन कमियों पर आधारित है और भविष्य में जरूरत पड़ने पर अतिरिक्त उपाय संभव हैं।

जुर्माने का आधार और नियामकीय निष्कर्ष

Reserve Bank of India की 5 जून 2026 की प्रेस विज्ञप्ति के अनुसार, यह जुर्माना बैंक द्वारा ‘Know Your Customer’ और ‘Unclaimed Deposits / Inoperative Accounts in banks’ संबंधी निर्देशों के कुछ प्रावधानों का पालन नहीं करने पर लगाया गया है। केंद्रीय बैंक ने यह कार्रवाई Banking Regulation Act, 1949 की धारा 47A(1)(c), धारा 46(4)(i) और धारा 51(1) के तहत प्राप्त अधिकारों का उपयोग करते हुए की है।

RBI ने बताया कि बैंक का Statutory Inspection for Supervisory Evaluation, ISE 2025, 31 मार्च 2025 तक की उसकी वित्तीय स्थिति के संदर्भ में किया गया था। पर्यवेक्षी निष्कर्षों के आधार पर बैंक को कारण बताओ नोटिस जारी किया गया, जिसके बाद बैंक के जवाब, अतिरिक्त प्रस्तुतियां और व्यक्तिगत सुनवाई के दौरान दी गई मौखिक दलीलों पर विचार किया गया।

केंद्रीय बैंक ने पाया कि Canara Bank ने कुछ ग्राहकों के KYC रिकॉर्ड निर्धारित समयसीमा के भीतर Central KYC Records Registry, CKYCR, पर अपलोड नहीं किए। इसके अलावा, बैंक ने कुछ खातों को निष्क्रिय के रूप में वर्गीकृत किया, जबकि उन खातों में ग्राहक द्वारा प्रेरित अंतिम लेनदेन को एक वर्ष से कम समय हुआ था।

बैंकिंग अनुपालन पर असर

RBI ने स्पष्ट किया कि यह कार्रवाई नियामकीय अनुपालन में कमियों पर आधारित है और इसका उद्देश्य बैंक तथा उसके ग्राहकों के बीच किसी लेनदेन या समझौते की वैधता पर निर्णय देना नहीं है। केंद्रीय बैंक ने यह भी कहा कि मौद्रिक जुर्माना किसी अन्य संभावित कार्रवाई पर रोक नहीं लगाता, और जरूरत पड़ने पर आगे भी कदम उठाए जा सकते हैं।

यह मामला इस बात को रेखांकित करता है कि KYC रिकॉर्ड प्रबंधन और निष्क्रिय खातों का सही वर्गीकरण भारतीय बैंकिंग क्षेत्र में अनुपालन के प्रमुख क्षेत्र बने हुए हैं। ऐसे मामलों में कार्रवाई से बैंकों पर आंतरिक नियंत्रण, रिकॉर्ड अपडेट और नियामकीय समयसीमा के पालन को और मजबूत करने का दबाव बढ़ता है।

हमारे पिछले लेख में RBI की जून मौद्रिक नीति समीक्षा के संदर्भ में बताया गया था कि कच्चे तेल की बढ़ती कीमतें, रुपये की कमजोरी और मानसून से जुड़ी चिंताएं नीति फैसले से पहले बाजार धारणा को प्रभावित कर रही थीं। उस रिपोर्ट में यह भी रेखांकित किया गया था कि निवेशकों का फोकस केवल रेपो रेट पर नहीं, बल्कि महंगाई, वृद्धि, तरलता और आगे के मार्गदर्शन पर भी रहेगा, क्योंकि ये संकेत बांड, मुद्रा और इक्विटी की निकट अवधि की दिशा तय कर सकते हैं।

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