RBI 8 जून को 75,000 करोड़ रुपये का चार-दिवसीय वीआरआर नीलामी आयोजित करेगा

RBI 8 जून को 75,000 करोड़ रुपये का चार-दिवसीय वीआरआर नीलामी आयोजित करेगा
RBI की बड़ी वीआरआर नीलामी

बदलती और मौजूदा तरलता स्थिति की समीक्षा के बाद भारतीय रिजर्व बैंक ने 8 जून 2026 को चार-दिवसीय वैरिएबल रेट रेपो, वीआरआर, नीलामी कराने का फैसला किया है। यह तरलता समायोजन सुविधा के तहत 75,000 करोड़ रुपये की राशि के लिए होगी और इसकी वापसी 12 जून 2026 को निर्धारित है।

हाइलाइट्स

  • RBI 8 जून 2026 को 75,000 करोड़ रुपये की चार-दिवसीय वीआरआर नीलामी सुबह 9:30 से 10:00 बजे तक आयोजित करेगा।
  • यह ऑपरेशन मौजूदा और विकसित होती तरलता परिस्थितियों के मद्देनजर RBI के अल्पकालिक तरलता प्रबंधन के सक्रिय रुख को दर्शाता है।
  • 12 जून 2026 को नीलामी रिवर्सल की तय तारीख मनी मार्केट दरों को नीति दायरे में रखने और तात्कालिक फंडिंग दबाव को संतुलित करने में मदद करेगी।

नीलामी का आकार और समय-सारिणी

भारतीय रिजर्व बैंक की प्रेस विज्ञप्ति के अनुसार, नीलामी 8 जून 2026, सोमवार को सुबह 9:30 बजे से 10:00 बजे तक आयोजित होगी। यह चार दिन की अवधि के लिए 75,000 करोड़ रुपये की अधिसूचित राशि पर आधारित होगी।

केंद्रीय बैंक ने कहा कि इस परिचालन के लिए दिशानिर्देश वही रहेंगे जो 20 जनवरी 2022 की रिजर्व बैंक प्रेस विज्ञप्ति 2021-2022/1572 में दिए गए थे। मौजूदा और विकसित होती तरलता परिस्थितियों की समीक्षा के बाद यह कदम उठाया गया है।

बैंकिंग प्रणाली और धन बाजार पर असर

यह कदम बैंकिंग प्रणाली में अल्पकालिक तरलता प्रबंधन के लिए RBI के सक्रिय रुख को दर्शाता है। चार-दिवसीय रेपो व्यवस्था बैंकों को तात्कालिक फंडिंग जरूरतों को पूरा करने का अवसर देती है, जबकि केंद्रीय बैंक को बाजार स्थितियों के अनुसार नकदी उपलब्धता को समायोजित करने की सुविधा मिलती है।

12 जून 2026 को रिवर्सल की तय तारीख से संकेत मिलता है कि यह उपाय निकट अवधि की तरलता जरूरतों को संबोधित करने पर केंद्रित है। इस तरह की वीआरआर नीलामी आमतौर पर मनी मार्केट दरों को नीति ढांचे के भीतर बनाए रखने और अल्पावधि फंडिंग दबाव को संतुलित करने में मदद करती है।

हमारे पहले के लेख में RBI की जून मौद्रिक नीति समीक्षा की पृष्ठभूमि पर चर्चा की गई थी, जहां कच्चे तेल की कीमतों, रुपये की कमजोरी, महंगाई और मानसून से जुड़ी चिंताओं के बीच बाजार गवर्नर के संकेतों का इंतजार कर रहे थे। उस रिपोर्ट में यह भी बताया गया था कि दर फैसले के साथ-साथ तरलता और वृद्धि पर केंद्रीय बैंक का मार्गदर्शन बॉन्ड, मुद्रा और इक्विटी बाजारों की अल्पकालिक दिशा को प्रभावित कर सकता है।

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