RBI ने हरियाणा के Karnal Central Cooperative Bank पर KYC चूक के लिए 3 लाख रुपये का जुर्माना लगाया
भारतीय रिजर्व बैंक ने हरियाणा स्थित The Karnal Central Cooperative Bank Limited पर KYC दिशानिर्देशों के अनुपालन में कमी को लेकर 3 लाख रुपये का मौद्रिक जुर्माना लगाया है। यह कार्रवाई 3 जून 2026 के आदेश के तहत की गई है और बैंक की 31 मार्च 2025 तक की वित्तीय स्थिति के संदर्भ में हुई वैधानिक जांच के बाद सामने आई कमियों से जुड़ी है।
हाइलाइट्स
- RBI ने Karnal Central Cooperative Bank पर KYC चूक के मामले में 3 लाख रुपये का जुर्माना लगाया।
- RBI की कार्रवाई NABARD की जांच, पर्यवेक्षी निष्कर्षों और बैंक के उत्तरों की समीक्षा के बाद हुई जिसमें बैंक खातों के जोखिम वर्गीकरण की समीक्षा व सॉफ्टवेयर कमजोरियां पाई गईं।
- जुर्माना केवल नियामकीय अनुपालन की कमी पर आधारित है और भविष्य में अन्य कार्रवाई के अधिकार को अप्रभावित रखता है।
नियामकीय कार्रवाई और जांच के निष्कर्ष
Reserve Bank of India की Reserve Bank of India की प्रेस विज्ञप्ति के अनुसार, यह जुर्माना बैंकिंग विनियमन अधिनियम, 1949 की धारा 47A(1)(c) को धारा 46(4)(i) और 56 के साथ पढ़ते हुए RBI को प्राप्त शक्तियों के तहत लगाया गया है। जांच National Bank for Agriculture and Rural Development, NABARD ने की थी, और पर्यवेक्षी निष्कर्षों तथा संबंधित पत्राचार के आधार पर बैंक को कारण बताओ नोटिस जारी किया गया था।
RBI ने बैंक के लिखित जवाब, अतिरिक्त प्रस्तुतियां और व्यक्तिगत सुनवाई के दौरान दी गई मौखिक दलीलों पर विचार करने के बाद पाया कि आरोप टिकते हैं। केंद्रीय बैंक के अनुसार, बैंक खातों की जोखिम श्रेणी के आवधिक पुनरावलोकन की व्यवस्था लागू करने में विफल रहा और संदिग्ध लेनदेन की प्रभावी पहचान तथा रिपोर्टिंग के लिए मजबूत सॉफ्टवेयर भी स्थापित नहीं कर सका।
सहकारी बैंकिंग क्षेत्र पर अनुपालन का दबाव
RBI ने स्पष्ट किया कि यह कार्रवाई नियामकीय अनुपालन में कमियों पर आधारित है और इसका उद्देश्य बैंक तथा उसके ग्राहकों के बीच किसी लेनदेन या समझौते की वैधता पर निर्णय देना नहीं है। केंद्रीय बैंक ने यह भी कहा कि यह मौद्रिक जुर्माना भविष्य में की जा सकने वाली किसी अन्य कार्रवाई के अधिकार को प्रभावित नहीं करता।यह मामला सहकारी बैंकिंग क्षेत्र में KYC और संदिग्ध लेनदेन निगरानी प्रणालियों को मजबूत करने पर नियामकीय जोर को रेखांकित करता है। जोखिम वर्गीकरण की नियमित समीक्षा और निगरानी प्रौद्योगिकी की मजबूती अब केवल प्रक्रिया संबंधी अपेक्षाएं नहीं हैं, बल्कि अनुपालन ढांचे का अहम हिस्सा बन चुकी हैं।
हमारी पिछली रिपोर्ट में बैंकिंग और वित्तीय संस्थानों में AI को रणनीतिक रूप से अपनाने की जरूरत पर चर्चा की गई थी, जिसमें पीयूष गोयल ने दक्षता बढ़ाने और नए रोजगार अवसर बनने की बात कही थी। उसी संदर्भ में हमने यह भी रेखांकित किया था कि AI पर अंधाधुंध निर्भरता जोखिमपूर्ण हो सकती है और कर्मचारियों की बुनियादी समझ व जिम्मेदार उपयोग जरूरी है।
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