भारतीय रिजर्व बैंक ने गैर-बैंकिंग वित्तीय क्षेत्र पर नियामकीय कार्रवाई करते हुए 135 कंपनियों के पंजीकरण प्रमाणपत्र रद्द कर दिए हैं। आदेशों के बाद ये कंपनियां RBI अधिनियम, 1934 की धारा 45-I के तहत परिभाषित गैर-बैंकिंग वित्तीय संस्था का कारोबार नहीं कर सकेंगी।
हाइलाइट्स
- RBI ने 135 NBFC कंपनियों के पंजीकरण प्रमाणपत्र अप्रैल 2026 से मई 2026 के बीच रद्द किए, जिनमें कोलकाता व हावड़ा से सबसे अधिक कंपनियां थीं।
- रद्द पंजीकरण वाली प्रमुख कंपनियों में Express Fincap House Private Limited, Essel Finance Business Loans Limited और Citiwide Financial Services Limited शामिल हैं।
- इस कदम से NBFC सेक्टर में लाइसेंसिंग और अनुपालन निगरानी सख्त हो गई है, जिससे संबंधित राज्यों में नियामकीय जोखिम और कड़े परिचालन मानक स्पष्ट हुए हैं।
रद्दीकरण आदेश और कंपनियों का दायरा
RBI की प्रेस विज्ञप्ति 2026-2027/428 के अनुसार, केंद्रीय बैंक ने RBI अधिनियम, 1934 की धारा 45-IA(6) के तहत यह कार्रवाई की है। सूची में शामिल 135 कंपनियों के पंजीकरण प्रमाणपत्र, जिन्हें NBFC के रूप में जारी किया गया था, अलग-अलग रद्दीकरण आदेशों के जरिए अप्रैल 2026 से मई 2026 के बीच निरस्त किए गए हैं।सूची में सबसे अधिक कंपनियां पश्चिम बंगाल, खासकर कोलकाता और हावड़ा से जुड़ी हैं, जबकि कुछ संस्थाएं महाराष्ट्र, दिल्ली, मध्य प्रदेश, तमिलनाडु, तेलंगाना, मणिपुर और असम में पंजीकृत कार्यालय रखती हैं। प्रभावित संस्थाओं में Express Fincap House Private Limited, Akshay Fiscal Services Ltd, ETL Infrastructure Finance Limited, Kds Micro Credit Services Pvt Ltd, Essel Finance Business Loans Limited और Citiwide Financial Services Limited जैसी कंपनियां शामिल हैं।
RBI ने स्पष्ट किया है कि पंजीकरण रद्द होने के बाद ये इकाइयां गैर-बैंकिंग वित्तीय संस्था का कारोबार नहीं कर सकतीं। विज्ञप्ति पर मुख्य महाप्रबंधक बृज राज के हस्ताक्षर हैं।
NBFC क्षेत्र पर नियामकीय असर
यह कदम दिखाता है कि RBI NBFC क्षेत्र में लाइसेंसिंग और अनुपालन निगरानी को सख्ती से लागू कर रहा है, खासकर उन संस्थाओं पर जिनकी नियामकीय स्थिति अब वैध नहीं मानी जा रही। बड़े पैमाने पर एक साथ की गई यह कार्रवाई बाजार सहभागियों के लिए संकेत है कि पंजीकरण बनाए रखने, परिचालन पात्रता और नियामकीय मानकों का पालन क्षेत्र में केंद्रीय महत्व रखता है।क्षेत्रीय स्तर पर इसका असर उन राज्यों में अधिक दिखता है जहां सूचीबद्ध संस्थाओं का संकेंद्रण ज्यादा है, विशेषकर पश्चिम बंगाल में। निवेशकों, उधारकर्ताओं और व्यावसायिक भागीदारों के लिए यह बदलाव इस बात का संकेत है कि किसी NBFC के साथ लेनदेन से पहले उसकी वर्तमान नियामकीय स्थिति की जांच अधिक महत्वपूर्ण हो जाती है।
हमारी पिछली रिपोर्ट में जून में प्रमुख बैंकों द्वारा अंतिम लाभांश के लिए रिकॉर्ड तिथियां तय करने और उसके भुगतान विवरण पर फोकस किया गया था। इसमें Indian Bank, HDFC Bank, Canara Bank, PNB और IndusInd Bank के लाभांश प्रस्तावों के साथ यह भी बताया गया था कि रिकॉर्ड तिथियों के आसपास बैंकिंग शेयरों में गतिविधि बढ़ सकती है और निवेशकों के लिए पात्रता/टाइमिंग महत्वपूर्ण रहती है।
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