RBI ने SGB 2020-21 सीरीज-III के समयपूर्व रिडेम्प्शन का मूल्य 14,774 रुपये प्रति यूनिट तय किया
सॉवरेन गोल्ड बॉन्ड 2020-21 सीरीज-III के निवेशकों के लिए 16 जून 2026 को समयपूर्व रिडेम्प्शन की अगली देय तिथि है। यह सुविधा निर्गम की तारीख से पांचवें वर्ष के बाद ब्याज भुगतान की तिथि पर उपलब्ध है, जिससे पात्र धारकों को तय फॉर्मूले के आधार पर निकास का विकल्प मिलता है।
हाइलाइट्स
- RBI ने SGB 2020-21 सीरीज-III के समयपूर्व रिडेम्प्शन के लिए 14,774 रुपये प्रति यूनिट का मूल्य 16 जून 2026 की देय तिथि के लिए तय किया।
- यह मूल्य 11, 12 और 15 जून 2026 को 999 शुद्धता वाले सोने के India Bullion and Jewellers Association Ltd द्वारा प्रकाशित औसत बंद भाव पर आधारित है।
- समयपूर्व रिडेम्प्शन विकल्प निवेशकों को निर्धारण में पारदर्शिता देता है और खुदरा, धन प्रबंधक व बुलियन बाजार सहभागियों के लिए मार्गदर्शक मानक प्रदान करता है।
रिडेम्प्शन मूल्य और गणना का आधार
RBI की प्रेस विज्ञप्ति के अनुसार, सॉवरेन गोल्ड बॉन्ड योजना के तहत SGB 2020-21 सीरीज-III का समयपूर्व रिडेम्प्शन 16 जून 2026 को देय है। यह ट्रेंच 16 जून 2020 को जारी हुई थी और भारत सरकार की 13 अप्रैल 2020 की अधिसूचना F.No.4(4)-B(W&M)/2020 के प्रावधानों के तहत पांचवें वर्ष के बाद समयपूर्व रिडेम्प्शन की अनुमति मिलती है।इस देय तिथि के लिए रिडेम्प्शन मूल्य 14,774 रुपये प्रति यूनिट तय किया गया है। यह मूल्य रिडेम्प्शन तिथि से पहले के तीन कारोबारी दिनों, 11 जून, 12 जून और 15 जून 2026, में 999 शुद्धता वाले सोने के बंद भाव के साधारण औसत पर आधारित है, जिसे India Bullion and Jewellers Association Ltd प्रकाशित करता है।
निवेशकों और बाजार के लिए महत्व
यह मूल्य निर्धारण SGB निवेशकों को एक पारदर्शी निकास मानक देता है, क्योंकि भुगतान बाजार-आधारित सोने के औसत भाव से जुड़ा रहता है। समयपूर्व रिडेम्प्शन का विकल्प उन धारकों के लिए महत्वपूर्ण है जो परिपक्वता से पहले निवेश भुनाना चाहते हैं, लेकिन केवल निर्धारित ब्याज भुगतान तिथियों पर ही ऐसा कर सकते हैं।सॉवरेन गोल्ड बॉन्ड योजना भौतिक सोना खरीदे बिना सोने में निवेश का माध्यम देती है, इसलिए रिडेम्प्शन मूल्य की यह घोषणा खुदरा निवेशकों, धन प्रबंधकों और बुलियन बाजार पर नजर रखने वाले प्रतिभागियों के लिए प्रासंगिक है। तय मूल्य से पात्र निवेशकों को 16 जून 2026 के निकास पर मिलने वाली राशि का स्पष्ट संकेत मिलता है।
हमारी पिछली रिपोर्ट में NSE पर इलेक्ट्रॉनिक गोल्ड रसीदों (EGRs) की शुरुआत और इसके सोने की मांग व निवेशक भावना पर संभावित असर पर चर्चा की गई थी। उसमें बताया गया था कि यह नया, विनियमित मार्ग गोल्ड ETF और सॉवरेन गोल्ड बॉन्ड्स जैसे विकल्पों के साथ प्रतिस्पर्धा करते हुए तरलता बढ़ा सकता है, जबकि XAU/USD में निकट अवधि का रेंज और ब्रेकआउट जोखिम भी रेखांकित किया गया था।
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