RBI ने कर्नाटक की Shree Mahalaxmi Urban Co-operative Credit Bank का लाइसेंस रद्द किया

RBI ने कर्नाटक की Shree Mahalaxmi Urban Co-operative Credit Bank का लाइसेंस रद्द किया
RBI ने बैंक का लाइसेंस रद्द किया

कर्नाटक के गोकाक स्थित Shree Mahalaxmi Urban Co-operative Credit Bank Ltd. 18 जून 2026 के कारोबार बंद होने के बाद बैंकिंग कारोबार जारी नहीं रख सकती। यह कदम बैंक की कमजोर पूंजी स्थिति, सीमित आय संभावनाओं और जमाकर्ताओं के हितों पर जोखिम के बीच उठाया गया है।

हाइलाइट्स

  • RBI ने 16 जून 2026 को Shree Mahalaxmi Urban Co-operative Credit Bank, Gokak, Karnataka का लाइसेंस बैंकिंग विनियमन अधिनियम के तहत रद्द किया।
  • 18 जून 2026 से बैंक पर बैंकिंग कारोबार, जमा स्वीकारने और वापसी करने पर रोक लगी तथा परिसमापन के लिए निर्देश जारी किए गए।
  • DICGC ने 9 जून 2026 तक बीमित जमाओं में से 88.21 करोड़ रुपये चुका दिए और लगभग 97.90% जमाकर्ता पूर्ण बीमा पात्र हैं।

नियामकीय कार्रवाई और बंदी प्रक्रिया

Reserve Bank of India की 16 जून 2026 की अधिसूचना के अनुसार, Shree Mahalaxmi Urban Co-operative Credit Bank Ltd., Gokak, Karnataka का लाइसेंस बैंकिंग विनियमन अधिनियम, 1949 की धारा 22 और धारा 56 के तहत रद्द किया गया है। इस आदेश के बाद बैंक 18 जून 2026 के कारोबार बंद होने से बैंकिंग व्यवसाय नहीं कर सकती।

RBI ने कर्नाटक के सहकारी समितियों के पंजीयक से बैंक को समेटने और उसके लिए एक परिसमापक नियुक्त करने का आदेश जारी करने का भी अनुरोध किया है। लाइसेंस रद्द होने के बाद बैंक पर बैंकिंग कारोबार करने, जमा स्वीकार करने और जमा की वापसी करने पर तत्काल प्रभाव से रोक लग गई है।

केंद्रीय बैंक ने कहा कि बैंक के पास पर्याप्त पूंजी और आय अर्जित करने की संभावनाएं नहीं हैं। RBI के अनुसार, बैंक बैंकिंग विनियमन अधिनियम की विभिन्न वैधानिक आवश्यकताओं का पालन करने में विफल रही है, और उसकी मौजूदा वित्तीय स्थिति में सभी मौजूदा जमाकर्ताओं को पूरा भुगतान कर पाना संभव नहीं है।

जमाकर्ताओं पर असर और बीमा कवरेज

RBI का कहना है कि बैंक को चालू रहने देना जमाकर्ताओं के हितों के प्रतिकूल होता और इससे जनहित पर भी नकारात्मक असर पड़ता। यही वजह है कि नियामक ने बैंक को आगे बैंकिंग कारोबार जारी रखने की अनुमति नहीं दी।

परिसमापन की स्थिति में प्रत्येक जमाकर्ता Deposit Insurance and Credit Guarantee Corporation, DICGC से DICGC Act, 1961 के प्रावधानों के अधीन अधिकतम 5 लाख रुपये तक की जमा बीमा दावा राशि पाने का हकदार होगा। बैंक के जमा किए गए आंकड़ों के अनुसार, All Inclusive Directions लगाए जाने की तारीख तक लगभग 97.90% जमाकर्ता अपनी पूरी जमा राशि DICGC से पाने के पात्र थे।

9 जून 2026 तक DICGC, संबंधित जमाकर्ताओं से मिली सहमति के आधार पर, DICGC Act की धारा 18A के तहत कुल बीमित जमाओं में से 88.21 करोड़ रुपये पहले ही चुका चुकी है। इससे संकेत मिलता है कि अधिकांश खुदरा जमाकर्ताओं के लिए बीमा तंत्र से वसूली का रास्ता पहले से सक्रिय है।

हमारी पिछली रिपोर्ट में EUR/INR जोड़ी में गिरावट और भारतीय रुपये की मजबूती पर चर्चा की गई थी, जिसे RBI की सक्रिय नीतियों, घरेलू निवेशक प्रवाह और कच्चे तेल की कीमतों में नरमी से समर्थन मिला। लेख में यह भी बताया गया था कि तकनीकी संकेतक निकट अवधि में सीमित दायरे में ट्रेड और आगे दबाव की संभावना दिखाते हैं, जिससे नीति-सम्बंधी कदमों का बाजार धारणा पर असर रेखांकित होता है।

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