आरबीआई ने महाराष्ट्र के The Chikhli Urban Co-operative Bank पर 13 लाख रुपये का जुर्माना लगाया
महाराष्ट्र के चिखली स्थित The Chikhli Urban Co-operative Bank पर नियामकीय अनुपालन में कमियों के चलते भारतीय रिजर्व बैंक ने 13 लाख रुपये का मौद्रिक जुर्माना लगाया है। यह कार्रवाई 31 मार्च 2025 तक की बैंक की वित्तीय स्थिति के संदर्भ में की गई वैधानिक जांच के बाद सामने आई है, और इसका संबंध अनक्लेम्ड रकम, हाउसिंग स्कीम वित्तपोषण तथा KYC अनुपालन से है।
हाइलाइट्स
- भारतीय रिजर्व बैंक ने The Chikhli Urban Co-operative Bank पर 13 लाख रुपये का जुर्माना 8 जुलाई 2026 के आदेश के तहत लगाया।
- जुर्माना बैंकिंग विनियमन अधिनियम, 1949 की धारा 26A और 56, KYC तथा ‘Finance for Housing Schemes, UCBs’ के निर्देशों के पालन में विफलता के कारण लगा।
- आरबीआई ने पाया कि बैंक ने अनक्लेम्ड रकम DEAF में ट्रांसफर नहीं की, भूमि अधिग्रहण हेतु गलत ऋण दिए, और संदिग्ध लेनदेन मॉनिटरिंग तंत्र कमजोर रहा।
निरीक्षण के निष्कर्ष और दंड का आधार
जैसा कि भारतीय रिजर्व बैंक की प्रेस विज्ञप्ति के अनुसार बताया गया है, 8 जुलाई 2026 के आदेश के तहत यह जुर्माना बैंकिंग विनियमन अधिनियम, 1949 की धारा 26A सहपठित धारा 56 के प्रावधानों के उल्लंघन और आरबीआई के ‘Finance for Housing Schemes, UCBs’ तथा ‘Know Your Customer (KYC)’ संबंधी कुछ निर्देशों का पालन न करने पर लगाया गया है। यह दंड आरबीआई ने धारा 47A(1)(c) सहपठित धारा 46(4)(i) और धारा 56 के तहत प्राप्त शक्तियों का उपयोग करते हुए लगाया है।आरबीआई ने बैंक को कारण बताओ नोटिस जारी कर पूछा था कि संबंधित प्रावधानों और निर्देशों का पालन न करने पर उस पर दंड क्यों न लगाया जाए। बैंक के जवाब, अतिरिक्त प्रस्तुतियों और व्यक्तिगत सुनवाई में दिए गए मौखिक पक्ष पर विचार करने के बाद केंद्रीय बैंक ने पाया कि कई आरोप टिकते हैं और मौद्रिक दंड उचित है।
आरबीआई के अनुसार, बैंक ने निर्धारित अवधि के भीतर पात्र अनक्लेम्ड रकम Depositor Education and Awareness Fund में स्थानांतरित नहीं की। बैंक ने बिल्डरों और कॉन्ट्रैक्टरों को भूमि अधिग्रहण के लिए ऋण स्वीकृत किए, और संदिग्ध लेनदेन की प्रभावी पहचान व रिपोर्टिंग के लिए मजबूत सॉफ्टवेयर व्यवस्था भी लागू नहीं की।
सहकारी बैंकिंग क्षेत्र पर असर
यह कार्रवाई सहकारी बैंकों के लिए इस बात का संकेत है कि नियामकीय अनुपालन, ग्राहक पहचान मानकों और जमा से जुड़े वैधानिक दायित्वों पर आरबीआई की निगरानी कड़ी बनी हुई है। विशेष रूप से शहरी सहकारी बैंकों के लिए अनक्लेम्ड जमा के निपटान, ऋण स्वीकृति मानकों और संदिग्ध लेनदेन निगरानी तंत्र की मजबूती अब भी प्रमुख अनुपालन क्षेत्र बने हुए हैं।आरबीआई ने स्पष्ट किया है कि यह कार्रवाई वैधानिक और नियामकीय अनुपालन में कमियों पर आधारित है और बैंक तथा उसके ग्राहकों के बीच किसी लेनदेन या समझौते की वैधता पर कोई निर्णय नहीं देती। केंद्रीय बैंक ने यह भी कहा है कि यह मौद्रिक दंड भविष्य में बैंक के खिलाफ शुरू की जा सकने वाली किसी अन्य कार्रवाई पर प्रतिकूल प्रभाव डाले बिना लगाया गया है।
हमारी पिछली रिपोर्ट में Kalanee Impex Private Limited पर FEMA के तहत हुई प्रवर्तन कार्रवाई और मुंबई परिसरों पर तलाशी के निष्कर्षों का विवरण दिया गया था। उसमें निर्यात प्राप्तियों के समय पर न वसूल होने, कथित अघोषित विदेशी कंपनियों/खातों और third-party remittances की वैधता जैसे मुद्दों पर चल रही जांच का जिक्र था। यह पृष्ठभूमि दिखाती है कि अनुपालन में चूक—चाहे विदेशी लेनदेन हो या बैंकिंग प्रक्रियाएं—पर नियामकीय एजेंसियों की निगरानी और कार्रवाई लगातार सख्त बनी हुई है।
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