RBI ने 192 NBFCs के पंजीकरण प्रमाणपत्र रद्द किए, जून 2026 में कई राज्यों पर असर
भारत के गैर-बैंकिंग वित्तीय क्षेत्र में नियामकीय कार्रवाई के तहत Reserve Bank of India ने 192 कंपनियों के पंजीकरण प्रमाणपत्र रद्द कर दिए हैं। यह कदम जून 2026 के दौरान जारी अलग-अलग निरस्तीकरण आदेशों के तहत उठाया गया, जिससे इन संस्थाओं पर NBFC कारोबार करने पर रोक लग गई है.
हाइलाइट्स
- RBI ने Reserve Bank of India Act, 1934 की धारा 45-IA(6) के तहत 192 NBFCs के पंजीकरण प्रमाणपत्र जून 2026 में रद्द किए।
- प्रभावित कंपनियों में Naveen Merico Engineering Co. Private Limited, Narayani Finance Limited और कोलकाता-पश्चिम बंगाल क्षेत्र की अधिकांश संस्थाएं शामिल हैं।
- रद्दीकरण से सम्बंधित कंपनियां अब NBFC गतिविधियां नहीं चला सकतीं, जिससे स्थानीय आर्थिक गतिविधियों और औपचारिक वित्तीय प्रणाली पर प्रभाव पड़ेगा।
जून 2026 की नियामकीय कार्रवाई
जैसा कि Reserve Bank of India की प्रेस विज्ञप्ति 2026-2027/676 के अनुसार बताया गया है, केंद्रीय बैंक ने Reserve Bank of India Act, 1934 की धारा 45-IA(6) के तहत 192 कंपनियों के Certificate of Registration रद्द किए हैं। आदेश में कहा गया है कि संबंधित कंपनियां अब धारा 45-I के खंड (a) के तहत परिभाषित Non-Banking Financial Institution का कारोबार नहीं कर सकतीं.रद्दीकरण आदेश 1 जून 2026 से 30 जून 2026 के बीच जारी हुए हैं। सूची में पश्चिम बंगाल, महाराष्ट्र, दिल्ली, गुजरात, तमिलनाडु, असम, बिहार, झारखंड, मध्य प्रदेश, उत्तर प्रदेश और चंडीगढ़ सहित कई क्षेत्रों में पंजीकृत कंपनियां शामिल हैं, हालांकि सबसे अधिक नाम कोलकाता और पश्चिम बंगाल से जुड़े दिखते हैं.
सूची में Naveen Merico Engineering Co. Private Limited, Narayani Finance Limited, Radiance Finvest Private Limited, Williamson Financial Services Limited और Clio Infotech Limited जैसी कंपनियां भी शामिल हैं। आदेश के साथ जारी सूची में प्रत्येक कंपनी का पंजीकृत कार्यालय, CoR नंबर, पंजीकरण जारी होने की तारीख और निरस्तीकरण आदेश की तारीख दी गई है.
NBFC क्षेत्र और क्षेत्रीय प्रभाव
यह कार्रवाई संकेत देती है कि RBI NBFC क्षेत्र में लाइसेंसिंग और अनुपालन ढांचे की निगरानी कड़ी बनाए हुए है। पंजीकरण रद्द होने के बाद संबंधित संस्थाएं वैध रूप से NBFC गतिविधियां नहीं चला सकतीं, जिससे स्थानीय वित्तपोषण, निवेश या उधार से जुड़ी उनकी कारोबारी गतिविधियों पर सीधा असर पड़ता है.चूंकि सूची में बड़ी संख्या में पुरानी पंजीकृत कंपनियां भी हैं, यह कदम क्षेत्र में निष्क्रिय, अनुपालन-विफल या नियामकीय मानदंडों पर खरी नहीं उतरने वाली संस्थाओं की छंटनी के रूप में देखा जाता है। इससे औपचारिक वित्तीय प्रणाली में केवल अधिकृत और नियमन के अनुरूप संस्थाओं को बनाए रखने की RBI की नीति को बल मिलता है.
हमारी पिछली रिपोर्ट में एनएसई द्वारा कई सूचीबद्ध कंपनियों से मीडिया रिपोर्टों और असामान्य गतिविधि से जुड़ी खबरों पर औपचारिक स्पष्टीकरण मांगे जाने की चर्चा की गई थी। इसमें बताया गया था कि एक्सचेंज ने निवेशकों को सटीक और समय पर जानकारी देने के लिए Gensol Engineering, IDBI Bank, JSW Dulux, Shadowfax Technologies और Zydus Lifesciences जैसी कंपनियों को पत्र भेजकर रिपोर्टों की पुष्टि या खंडन करने को कहा। यह पहल बाजार पारदर्शिता बढ़ाने और अपुष्ट सूचनाओं के प्रभाव को सीमित करने के व्यापक उद्देश्य से जुड़ी थी।
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