RBI ने Konark Urban Co-operative Bank पर नियामकीय निर्देशों की अवधि अक्टूबर 2026 तक बढ़ाई
उल्हासनगर स्थित Konark Urban Co-operative Bank पर लागू नियामकीय प्रतिबंध अब 23 अक्टूबर 2026 तक प्रभावी रहेंगे। यह विस्तार तीन महीने के लिए किया गया है और इससे यह संकेत नहीं मिलता कि Reserve Bank of India बैंक की वित्तीय स्थिति से संतुष्ट है।
हाइलाइट्स
- RBI ने Konark Urban Co-operative Bank Ltd., Ulhasnagar पर नियामकीय निर्देशों की अवधि 23 जुलाई 2026 के बाद 23 अक्टूबर 2026 तक बढ़ा दी।
- न्यूनतम विस्तार 23 अप्रैल 2024 के आदेश से शुरू हुआ था और समय-समय पर बढ़ाया गया, जिसमें शर्तें और नियम पूर्ववत रहेंगे।
- RBI ने स्पष्ट किया कि विस्तार या संशोधन बैंक की वित्तीय स्थिति पर केंद्रीय बैंक की संतुष्टि का संकेत नहीं है।
निर्देशों के विस्तार की समयसीमा
Reserve Bank of India की प्रेस विज्ञप्ति के अनुसार, केंद्रीय बैंक ने बैंकिंग रेगुलेशन एक्ट, 1949 की धारा 35A को धारा 56 के साथ पढ़ते हुए Konark Urban Co-operative Bank Ltd., Ulhasnagar पर लागू निर्देशों की अवधि को आगे बढ़ा दिया है। नया विस्तार 23 जुलाई 2026 के कारोबार बंद होने के बाद से 23 अक्टूबर 2026 के कारोबार बंद होने तक लागू रहता है और यह समीक्षा के अधीन है।
ये निर्देश मूल रूप से 23 अप्रैल 2024 के आदेश के तहत छह महीने के लिए लागू किए गए थे, जो 23 अक्टूबर 2024 तक प्रभावी थे। इसके बाद इन्हें समय-समय पर बढ़ाया गया और सबसे हालिया विस्तार 17 अप्रैल 2026 के निर्देश के जरिए 23 जुलाई 2026 तक दिया गया था।
जमाकर्ताओं और सहकारी बैंकिंग क्षेत्र पर असर
RBI ने कहा है कि सार्वजनिक हित में निर्देशों की अवधि को 23 जुलाई 2026 के बाद भी जारी रखना आवश्यक है। साथ ही, नियामक ने स्पष्ट किया है कि इस विस्तार या किसी संशोधन को अपने आप में बैंक की वित्तीय स्थिति पर उसकी संतुष्टि के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए।केंद्रीय बैंक ने यह भी कहा है कि मूल निर्देशों की अन्य सभी शर्तें और नियम यथावत बने रहते हैं। इसका मतलब है कि बैंक पर पहले से लागू परिचालन शर्तों में इस आदेश के तहत कोई अन्य बदलाव नहीं किया गया है।
हमारी पिछली रिपोर्ट में RBI द्वारा Apothecon Pharmaceuticals Private Limited के खिलाफ विदेशी निवेश/रिपोर्टिंग से जुड़े FEMA उल्लंघनों पर जारी कंपाउंडिंग आदेश का विवरण था। इसमें Form ARF, FCGPR और FLA Return जैसी फाइलिंग में देरी, पूर्व स्वीकृति के बिना शेयर आवंटन और शेयर जारी/आवंटन में प्रक्रियात्मक चूक जैसे मामलों के निपटान के बाद निर्धारित शर्तें पूरी होने पर आगे की जांच/कार्रवाई बंद होने की प्रक्रिया समझाई गई थी।
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