भारत में विदेशी निवेश के नियामकीय ढांचे की समीक्षा बजट 2026-27 में घोषित व्यापक सुधार प्रक्रिया के तहत आगे बढ़ रही है। Reserve Bank of India ने अब Foreign Exchange Management (Foreign Investment) Rules, 2026 का मसौदा सार्वजनिक परामर्श के लिए जारी किया है, जिसका उद्देश्य नियमों को सरल, अधिक सुसंगत और निवेशक-अनुकूल बनाना है।
हाइलाइट्स
- RBI ने Foreign Exchange Management (Non-Debt Instruments) Rules, 2019 की व्यापक समीक्षा के बाद मसौदा विदेशी निवेश नियम वेबसाइट पर टिप्पणियों हेतु जारी किए।
- मसौदा सिद्धांत-आधारित, निवेशक-अनुकूल और सरल ढांचे पर बल देता है, जिससे नियामक स्पष्टता बढ़ेगी और अनुपालन जटिलता घटेगी।
- हितधारक 31 अगस्त, 2026 तक सुझाव दे सकते हैं; अंतिम नियम व्यापक सार्वजनिक परामर्श के बाद निर्धारित होंगे।
मसौदा नियमों की रूपरेखा और परामर्श प्रक्रिया
RBI की प्रेस विज्ञप्ति के अनुसार, मौजूदा Foreign Exchange Management (Non-Debt Instruments) Rules, 2019 भारत में विदेशी निवेश को नियंत्रित करते हैं, और इन्हीं नियमों की व्यापक समीक्षा के बाद नया मसौदा तैयार किया गया है। केंद्रीय सरकार द्वारा गठित समिति की सिफारिशों तथा अन्य हितधारकों से परामर्श के आधार पर Reserve Bank of India ने युक्तिसंगत नियमों का यह प्रारूप अपनी वेबसाइट पर टिप्पणियों और सुझावों के लिए रखा है।प्रस्तावित मसौदे में सिद्धांत-आधारित और सरल ढांचे पर जोर दिया गया है, ताकि परिभाषाओं का सामंजस्य हो, नियामकीय संरचना अधिक स्पष्ट बने और अनुपालन की जटिलता घटे। इसमें FDI नीति के साथ बेहतर तालमेल के लिए प्रक्रियात्मक FEMA प्रावधानों को नीतिगत और क्षेत्र-विशिष्ट आवश्यकताओं से अलग रखने का प्रस्ताव भी शामिल है।
RBI ने कहा है कि सभी हितधारक उसकी वेबसाइट के 'Connect 2 Regulate' खंड में उपलब्ध लिंक के माध्यम से या ईमेल से 31 अगस्त, 2026 तक अपनी टिप्पणियां भेज सकते हैं। अंतिम नियम व्यापक सार्वजनिक परामर्श के बाद तय किए जाएंगे।
कारोबार सुगमता और निवेश ढांचे पर संभावित असर
मसौदा नियमों का एक प्रमुख उद्देश्य कारोबार सुगमता बढ़ाना है, जिसके लिए प्रक्रियाओं को सुव्यवस्थित करने, अनुपालन बोझ कम करने और परिचालन लचीलापन बढ़ाने पर बल दिया गया है। RBI के अनुसार, अधिक पारदर्शी और निवेशक-अनुकूल ढांचा विदेशी निवेश से जुड़े लेनदेन को स्पष्टता दे सकता है।प्रस्तावित ढांचा भविष्य की व्यावसायिक जरूरतों के अनुरूप सिद्धांत-आधारित, investee-neutral और investor-neutral प्रावधान अपनाने की बात करता है, जबकि आवश्यक नियामकीय सुरक्षा उपाय बनाए रखे जाएंगे। इससे भारत की बदलती आर्थिक प्राथमिकताओं के अनुरूप विदेशी निवेश नियमों को अद्यतन करने की दिशा में एक संस्थागत आधार तैयार होता है।
हमारी पिछली रिपोर्ट में भारत की दीर्घकालिक निवेश कहानी और बाहरी पूंजी प्रवाह के रुझानों पर चर्चा की गई थी। उसमें बताया गया था कि AI/सेमीकंडक्टर से इतर विनिर्माण और घरेलू उत्पादन का विस्तार अधिक टिकाऊ अवसर दे सकता है, जबकि कमजोर FDI के बाद RBI की पहलों और नीति समर्थन से आगे चलकर बाहरी पूंजी प्रवाह में सुधार की संभावना भी जताई गई थी।
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