RBI ने विदेशी मुद्रा कारोबार के साप्ताहिक आंकड़े जारी किए
भारत के विदेशी मुद्रा बाजार में अगस्त के अंत और सितंबर 2026 की शुरुआत के कारोबारी रुझानों का नया ब्यौरा सामने आया है। भारतीय रिजर्व बैंक ने 31 अगस्त 2026 से 4 सितंबर 2026 की अवधि के लिए मर्चेंट और इंटर-बैंक खंडों में दैनिक लेनदेन के अनंतिम आंकड़े जारी किए हैं।
हाइलाइट्स
- 31 अगस्त 2026 को मर्चेंट खंड में FCY/INR स्पॉट खरीद 8,198 मिलियन U.S. डॉलर और बिक्री 8,663 मिलियन U.S. डॉलर दर्ज हुई।
- अंतर-बैंक खंड में 31 अगस्त 2026 को FCY/INR स्पॉट खरीद 29,149 मिलियन U.S. डॉलर और FCY/FCY स्पॉट बिक्री 40,556 मिलियन U.S. डॉलर रही।
- इंटर-बैंक खंड का उच्च टर्नओवर बैंकिंग प्रणाली के तरलता प्रबंधन, हेजिंग और स्थिति समायोजन गतिविधियों की निरंतरता को दर्शाता है।
31 अगस्त से 4 सितंबर के कारोबार का ब्योरा
भारतीय रिजर्व बैंक की प्रेस विज्ञप्ति 2026-2027/1281 के अनुसार, जारी आंकड़ों में विदेशी मुद्रा बाजार के मर्चेंट और इंटर-बैंक दोनों खंडों में दैनिक खरीद और बिक्री लेनदेन दिखाए गए हैं। सभी आंकड़े U.S. डॉलर मिलियन में हैं और इनमें स्पॉट, फॉरवर्ड, फॉरवर्ड रद्दीकरण तथा स्वैप जैसे अलग-अलग सौदों का विवरण शामिल है।मर्चेंट खंड में 31 अगस्त 2026 को FCY/INR स्पॉट खरीद 8,198 मिलियन U.S. डॉलर और बिक्री 8,663 मिलियन U.S. डॉलर रही, जबकि 1 सितंबर को यह खरीद 10,532 मिलियन U.S. डॉलर तक पहुंची। 4 सितंबर 2026 तक मर्चेंट खंड में FCY/INR स्पॉट खरीद 3,652 मिलियन U.S. डॉलर और बिक्री 4,256 मिलियन U.S. डॉलर दर्ज की गई।
इंटर-बैंक खंड में इसी अवधि के दौरान कारोबार का आकार काफी बड़ा रहा। 31 अगस्त 2026 को FCY/INR स्पॉट खरीद 29,149 मिलियन U.S. डॉलर और स्पॉट बिक्री 26,359 मिलियन U.S. डॉलर रही, जबकि FCY/FCY स्पॉट खरीद 36,032 मिलियन U.S. डॉलर और बिक्री 40,556 मिलियन U.S. डॉलर दर्ज की गई। सप्ताह के अंतिम कारोबारी दिन 4 सितंबर 2026 को FCY/INR स्पॉट खरीद 21,477 मिलियन U.S. डॉलर और बिक्री 19,190 मिलियन U.S. डॉलर रही।
बाजार तरलता और रिपोर्टिंग पर असर
ये आंकड़े विदेशी मुद्रा बाजार में बैंकिंग प्रणाली और कॉर्पोरेट ग्राहकों की दैनिक सक्रियता का संकेत देते हैं, खासकर तब जब मर्चेंट और इंटर-बैंक खंडों के बीच कारोबार के आकार में स्पष्ट अंतर दिखाई देता है। इंटर-बैंक खंड में ऊंचा टर्नओवर बाजार तरलता, हेजिंग गतिविधि और बैंकों के बीच पोजीशन प्रबंधन की निरंतरता को दर्शाता है।RBI ने यह भी स्पष्ट किया है कि इंटर-बैंक खंड का दैनिक टर्नओवर दोनों प्रतिपक्षों द्वारा रिपोर्ट किए गए आंकड़ों पर आधारित है। जारी डेटा अनंतिम है, इसलिए बाद के अद्यतन में इसमें सीमित संशोधन संभव हैं।
आरबीआई गवर्नर संजय मल्होत्रा की वैश्विक वित्तीय सख्ती पर चेतावनी में बताया गया था कि बढ़ते बॉन्ड यील्ड, ऊंचा लीवरेज और खिंचे हुए इक्विटी मूल्यांकन जैसे कारक बैंकों व गैर-बैंक वित्तीय संस्थानों तक दबाव फैला सकते हैं और बाजार अस्थिरता बढ़ा सकते हैं। हमारे पहले के लेख में यह भी रेखांकित किया गया था कि डॉलर व अमेरिकी यील्ड में तेजी जैसी बाहरी स्थितियां रुपये, घरेलू बॉन्ड यील्ड और फंडिंग लागत पर दबाव डाल सकती हैं, जिससे तरलता और हेजिंग गतिविधियों का महत्व और बढ़ जाता है।
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