भारत ने वैश्विक संकट से निपटने के लिए उपभोग घटाने की अपील की

भारत ने वैश्विक संकट से निपटने के लिए उपभोग घटाने की अपील की
खर्च घटाएं, बचाव बढ़ाएं

वैश्विक आर्थिक दबाव और बढ़ती ईंधन कीमतों के बीच प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने नागरिकों से खर्च और आयात-निर्भर उपभोग में अस्थायी संयम बरतने का आग्रह किया। हैदराबाद में एक जनसभा को संबोधित करते हुए उन्होंने इसे राष्ट्रीय आर्थिक सुरक्षा से जोड़ा और घरों से लेकर यात्रा व खरीदारी तक कई व्यवहारिक बदलाव सुझाए।

हाइलाइट्स

  • प्रधानमंत्री ने ऊर्जा बचत को बढ़ावा देने और सार्वजनिक परिवहन, वर्चुअल बैठकों द्वारा ईंधन आयात दबाव घटाने की अपील की।
  • उन्होंने परिवारों से खाद्य तेल के उपयोग में 10% कटौती तथा एक वर्ष तक सोना खरीद टालने की सलाह दी ताकि विदेशी मुद्रा पर दबाव घटे।
  • प्रधानमंत्री ने विदेशी वस्तुओं के उपभोग में कमी और कम से कम एक वर्ष के लिए विदेश यात्रा व विदेशी आयोजनों को टालने का आग्रह किया।

ऊर्जा बचत और आयात दबाव घटाने की अपील

Financial Express की रिपोर्ट के अनुसार, प्रधानमंत्री ने कहा कि मौजूदा वैश्विक संकट के दौरान देश को सामूहिक भागीदारी और जिम्मेदार खपत की जरूरत है। उन्होंने कोविड काल जैसी कार्यशैली अपनाने, वर्क फ्रॉम होम, ऑनलाइन कॉन्फ्रेंस और वर्चुअल बैठकों को फिर से बढ़ावा देने की बात कही, ताकि महंगे ईंधल पर निर्भरता कम हो सके।

प्रधानमंत्री ने निजी वाहनों के बजाय सार्वजनिक परिवहन के इस्तेमाल पर जोर दिया और कहा कि जहां मेट्रो उपलब्ध है, वहां उसका उपयोग बढ़ना चाहिए। उनके मुताबिक इससे पेट्रोल और डीजल की खपत घटेगी और विदेशी मुद्रा पर दबाव कम होगा।

उन्होंने परिवारों से खाद्य तेल के उपयोग में 10% कटौती करने की भी सलाह दी। उनका कहना है कि इससे एक ओर आयातित वस्तुओं पर निर्भरता घटेगी, वहीं दूसरी ओर परिवारों के स्वास्थ्य को भी लाभ होगा।

सोना, विदेश यात्रा और घरेलू खर्च पर संयम

प्रधानमंत्री ने शादी-ब्याह के मौसम में सोने की खरीद को एक वर्ष के लिए टालने की अपील की और कहा कि इस मद में विदेशी मुद्रा का व्यापक उपयोग होता है। उन्होंने कहा कि घरेलू समारोह कितने भी हों, राष्ट्रीय हित में सोना खरीदने से परहेज करने का संकल्प लिया जाना चाहिए।

उन्होंने यह भी कहा कि देशभक्ति केवल युद्धक्षेत्र में बलिदान तक सीमित नहीं है, बल्कि कठिन आर्थिक परिस्थितियों में जिम्मेदारियों को निभाना भी उसका हिस्सा है। उनके अनुसार, युद्धजनित महंगाई और वैश्विक संकट के असर से निपटने के लिए परिवारों को अपनी वित्तीय प्राथमिकताओं में सामूहिक बदलाव करना होगा।

वैश्विक आपूर्ति शृंखलाओं में बाधा का उल्लेख करते हुए प्रधानमंत्री ने “वोकल फॉर लोकल” को रणनीतिक आवश्यकता बताया। उन्होंने नागरिकों से विदेशी वस्तुओं के दैनिक उपयोग की समीक्षा करने और कम से कम एक वर्ष के लिए विदेश यात्रा तथा विदेश में होने वाली शादियों या छुट्टियों को टालने का आग्रह किया।

हमारी पिछली रिपोर्ट में पश्चिम एशिया संकट के बीच पेट्रोलियम उत्पादों के संयमित उपयोग और विदेशी मुद्रा बचत पर प्रधानमंत्री की अपील पर चर्चा की गई थी। उसमें तेलंगाना में लगभग 9,400 करोड़ रुपये की विकास परियोजनाओं के उद्घाटन/शिलान्यास के साथ यह संदेश जोड़ा गया था कि जरूरत के अनुसार ईंधन खपत से युद्धजनित अस्थिरता के असर को भी सीमित किया जा सकता है। साथ ही, सौर ऊर्जा, एथेनॉल मिश्रण, LPG कवरेज और CNG/पाइप्ड गैस जैसी पहलों के जरिए ऊर्जा सुरक्षा मजबूत करने के प्रयासों का उल्लेख भी था।

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