भारत में ईंधन बचत अपील पर संसदीय जवाबदेही की मांग तेज

भारत में ईंधन बचत अपील पर संसदीय जवाबदेही की मांग तेज
ईंधन बचत पर जवाबदेही

पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष और ऊर्जा आपूर्ति बाधित होने की आशंका के बीच प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी लोगों से घर से काम, ऑनलाइन बैठकों और विदेश यात्रा टालने जैसे कदम अपनाने की अपील कर रहे हैं। इन सुझावों ने राजनीतिक बहस को तेज कर दिया है, जिसमें कांग्रेस सांसद कार्ति चिदंबरम ने तत्काल संसद सत्र बुलाकर सरकार से स्थिति पर स्पष्ट जानकारी देने की मांग की है।

हाइलाइट्स

  • प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने तेल खपत घटाने, वर्चुअल मीटिंग और इलेक्ट्रिक वाहनों के उपयोग की अपील कर महामारी जैसी कार्यप्रणाली दोहराने की वकालत की।
  • पश्चिम एशिया के संकट, स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में तनाव और खाड़ी में आपूर्ति बाधा के चलते वैश्विक तेल कीमतें दबाव में हैं और भारत की ऊर्जा लागत बढ़ने की आशंका है।
  • सरकार ने विदेश यात्रा टालने और सोना न खरीदने की सार्वजनिक अपील करते हुए विदेशी मुद्रा दबाव से बचाव हेतु उपभोक्ता व्यय में संयम पर जोर दिया।

ईंधन बचत उपायों पर राजनीतिक विवाद

Financial Express के अनुसार, यह बहस तब तेज होती है जब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी तेल खपत घटाने और विदेशी मुद्रा बचाने के लिए महामारी काल जैसी कुछ कार्य प्रणालियां फिर शुरू करने की वकालत करते हैं। तेलंगाना में एक कार्यक्रम के दौरान उन्होंने कहा कि घर से काम, ऑनलाइन कॉन्फ्रेंस और वर्चुअल बैठकों को फिर प्राथमिकता देना राष्ट्रीय हित में होगा।

मोदी शहरों में मेट्रो से यात्रा करने, कारपूलिंग बढ़ाने और इलेक्ट्रिक वाहनों के अधिक उपयोग की भी अपील करते हैं। उनका कहना है कि वैश्विक संकट के दौर में पेट्रोल और डीजल का सीमित उपयोग एक राष्ट्रीय संकल्प होना चाहिए।

कांग्रेस सांसद कार्ति चिदंबरम इन अपीलों को गंभीर निर्देश बताते हुए पूछते हैं कि इसके पीछे वास्तविक कारण क्या हैं। वह सरकार से तत्काल संसद बुलाने और देश को वास्तविक स्थिति से अवगत कराने की मांग करते हैं।

तेल आपूर्ति, विदेशी मुद्रा और उपभोक्ता असर

सरकार की यह अपील ऐसे समय में आ रही है जब पश्चिम एशिया में संघर्ष जारी है और ईरान द्वारा स्ट्रेट ऑफ होर्मुज की नाकाबंदी तथा खाड़ी क्षेत्र के ऊर्जा ठिकानों पर हमलों से आपूर्ति शृंखला प्रभावित होती दिख रही है। इससे वैश्विक तेल कीमतों पर दबाव बढ़ रहा है और भारत में ऊर्जा लागत बढ़ने की आशंका बनी हुई है।

पाठ में कहा गया है कि तेल कंपनियां और भारत सरकार अब तक बड़े पैमाने पर कीमतें बढ़ाए बिना नुकसान सह रही हैं, लेकिन बाजार में लागत बढ़ने की आशंका बनी हुई है। ऐसे में आवागमन घटाने वाले उपाय ईंधन खपत कम करने और आयात बिल पर दबाव सीमित करने के तौर पर पेश किए जा रहे हैं।

प्रधानमंत्री लोगों से कम से कम एक वर्ष तक विदेश यात्रा टालने और सोने की खरीद से बचने की भी अपील करते हैं। उनका तर्क है कि महंगे ईंधन आयात और सोने की खरीद, दोनों पर विदेशी मुद्रा खर्च होती है, इसलिए मौजूदा संकट में उपभोग व्यवहार में संयम को व्यापक आर्थिक हित से जोड़ा जा रहा है।

हमारी पिछली रिपोर्ट में पश्चिम एशिया संकट के बीच प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की पेट्रोल, डीजल और गैस के संयमित उपयोग की अपील पर चर्चा की गई थी, जिसे विदेशी मुद्रा बचत और युद्धजनित असर कम करने से जोड़ा गया था। इसमें तेलंगाना में करीब 9,400 करोड़ रुपये की विकास परियोजनाओं के उद्घाटन-शिलान्यास का संदर्भ भी था और बताया गया था कि आयात निर्भरता व आपूर्ति जोखिम बढ़ने पर ऊर्जा सुरक्षा के लिए खपत संतुलन कितना अहम हो जाता है।

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